
Uttar Pradesh News: संभल के बदनपुर बसई गांव की रहने वाली तमन्ना मलिक ने अपने हिंदू पति अमन त्यागी के साथ हरिद्वार से गंगाजल लाकर शिव मंदिर में जलाभिषेक किया. उन्होंने साढ़े तीन साल पहले प्रेम विवाह की बाधाएं दूर होने पर यह मन्नत मांगी थी. रविवार को महाशिवरात्रि के अवसर पर बुर्का पहने तमन्ना ने क्षेम नाथ मंदिर में 'हर-हर महादेव' के नारों के बीच पूजा-अर्चना की.
10 फरवरी को शुरू हुई इस 170 किमी लंबी यात्रा के दौरान सनातन धर्म के लोगों ने उनका स्वागत किया. हालांकि, सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क सहित कुछ लोग इस कदम की तीखी आलोचना कर रहे हैं.

मन्नत पूरी करने के लिए उठाया कांवड़
तमन्ना और अमन त्यागी ने साढ़े तीन साल पहले अलग-अलग धर्मों की दीवारों को तोड़कर शादी की थी. उस समय तमन्ना ने मन्नत मांगी थी कि यदि उनकी शादी सफल रही, तो वह जलाभिषेक करेंगी. शादी के बाद यह जोड़ा गांव छोड़कर चला गया था और एक साल पहले ही वापस लौटा है. तमन्ना के दो बेटे, आर्यन और दक्ष भी हैं. अपने पति के समर्थन से उन्होंने इस कठिन यात्रा को पूरा किया और अपनी आस्था को धर्म की सीमाओं से ऊपर रखा.
बुर्के पर सवाल और भारी विरोध
यात्रा के दौरान तमन्ना के बुर्का पहनने और कांवड़ लाने पर विवाद छिड़ गया है. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए तमन्ना ने कहा कि वह पहले भी बुर्का पहनती थीं, तो अब किसी को दिक्कत क्यों है. उन्होंने विरोध करने वालों को 'अनजान' बताते हुए उन पर ध्यान न देने की बात कही.

वहीं, उनके पति अमन का कहना है कि विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे संगठनों ने यात्रा में उनकी पूरी मदद की. हालांकि, सपा सांसद द्वारा आलोचना किए जाने से मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ चुका है.
बुर्का पहनकर कांवड़ लाने पर बर्क ने बोला हमला
जियाउर्रहमान बर्क ने कहा कि तमन्ना दूसरे धर्म में शादी कर चुकी हैं, इसलिए इस मामले को तूल नहीं देना चाहिए. उन्होंने नसीहत दी कि व्यक्ति जिस समाज में है, उसी के त्योहार मनाए पर दूसरों के अधिकारों का उल्लंघन न करे. बर्क ने तंज कसते हुए कहा कि तमन्ना हमारी धर्मगुरु नहीं हैं और कम ज्ञान के कारण उन्होंने गलत कदम उठाया है, जिससे लोगों का उन पर से विश्वास उठ चुका है. सांसद ने 'मोहम्मद दीपक' का उदाहरण देते हुए कहा कि उसने मस्जिद में नमाज नहीं पढ़ी थी, बल्कि जुल्म के खिलाफ आवाज उठाई थी, इसलिए दोनों की तुलना नहीं की जा सकती.