
वाराणसी में एक ही परिवार से पांच लोगों की मर्डर मिस्ट्री की गुत्थी सुलझने के बजाय उलझती चली जा रही है. शहर के भेलूपुर थाना क्षेत्र के भदैनी इलाके में रहने वाले गुप्ता परिवार के चार सदस्यों- पत्नी, दो बेटे और एक बेटी की हत्या के बाद ऐसा लग रहा था कि 'कातिल' कोई और नहीं, बल्कि परिवार का मुखिया राजेंद्र गुप्ता ही है. लेकिन कुछ घंटे बाद घटनास्थल से लगभग 15 किलोमीटर दूर रोहनिया क्षेत्र में राजेंद्र के निर्माणधीन मकान में उसका शव मिला. जिसके बाद इस कहानी में बड़ा ट्विस्ट आ गया.
क्योंकि, माना जा रहा था कि राजेंद्र गुप्ता ने ही परिवार का खात्मा करने के बाद अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली, लेकिन राजेंद्र के शरीर पर एक नहीं, बल्कि 2 से 3 गोलियों के निशान पाए गए. साथ ही घटनास्थल पर मर्डर वेपन भी बरामद नहीं हुआ. ऐसे में यह शक गहराता चला जा रहा है कि राजेंद्र सहित उसके पूरे परिवार का खत्मा करने वाला कोई और है. फिलहाल, वाराणसी पुलिस कई एंगल पर काम कर रही है जिसमें पुरानी रंजिश, प्रॉपर्टी विवाद और अवैध संबंध भी शामिल है.
आइए जानते हैं पूरी कहानी...
दरअसल, कल (6 नवंबर) सुबह भेलूपुर थाना क्षेत्र के भदैनी इलाके में स्थित राजेंद्र गुप्ता के मकान में उस समय चीख-पुकार मच गई जब नौकरानी ने घर में एंटर किया. मकान के अलग-अलग कमरों में और बाथरूम में राजेंद्र की पत्नी सहित उनके तीनों बच्चों के शव खून से सने पाए गए. मृतकों में राजेंद्र की 45 वर्षीय पत्नी नीतू गुप्ता, 25 वर्षीय पुत्र नमनेंद्र, 17 साल की बेटी गौरंगी व सबसे छोटा बेटा शिवेंद्र (15) शामिल था.
चारों को मारी गई थी गोली, फिर राजेंद्र को भी...
मौके पर पहुंची पुलिस के मुताबिक, सभी चारों को गोली मारी गई थी. घटना के कई घंटे बीतने के बाद भी जब परिवार के मुखिया राजेंद्र गुप्ता का पता नहीं चला तो पुलिस यह मान बैठी कि गुस्सैल और आपराधिक प्रवृति के राजेंद्र गुप्ता ने ही पारिवारिक कलह से आजिज आकर पहले अपने परिवार के चार सदस्यों का खात्मा किया और फिर फरार हो गया.

क्योंकि, राजेंद्र गुप्ता पर वर्ष 1997 में प्रॉपर्टी के लालच में अपने भाई कृष्णा और उसकी पत्नी मंजू की गोली मारकर हत्या करने का आरोप लगा था. इसमें वह जेल भी गया था. खुद राजेंद्र के पिता लक्ष्मी नारायण ने ही भेलूपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था. उस समय राजेंद्र ने पिता को भी जान से मारने की धमकी दी थी. कुछ टाइम बाद पिता को सच में गोली मार दी गई थी. इस घटना में उनकी सुरक्षा में लगे सुरक्षाकर्मी और एक अन्य व्यक्ति की भी मौत हो गई.
जब जेल से बाहर आ गया राजेंद्र
हालांकि, बाद में इस केस की ठीक से पैरवी ना हो पाने की वजह से राजेंद्र जेल से बाहर आ गया. बाहर आने के बाद उसने पिता की पूरी संपत्ति पर अकेले कब्जा कर लिया. लेकिन कल की घटना के बाद जब पुलिस राजेंद्र की लोकेशन ट्रेस करते हुए शहर के रोहनिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रामपुर लठिया पहुंची तो सन्न रह गई. क्योंकि, वहां पर राजेंद्र के निर्माणाधीन मकान में उसकी लहूलुहान लाश मिली.
राजेंद्र गुप्ता की बॉडी पर गोलियों के निशान थे. उसे 2 से 3 गोलियां मारी गई थीं. ऐसे में राजेंद्र के सुसाइड करने वाली थ्योरी गलत निकली. अब सवाल है कि आखिर राजेंद्र और उसकी फैमिली का कातिल कौन है? पुलिस जांच में जुटी हुई है. हर पहलू की बारीकी से जांच-पड़ताल की जा रही है.