
वाराणसी के दशाश्वमेध क्षेत्र के मदनपुरा इलाके में पिछले सैकड़ों वर्षों से मुस्लिम बहुल इलाके में बंद पड़े सिद्धेश्वर महादेव मंदिर को बुधवार को खोल दिया गया है. मंदिर के अंदर 3 खंडित शिवलिंग मिले हैं, जिसकी पुनर्स्थापना खरमास के बाद की जाएगी और मंदिर परिसर में पूजा-पाठ भी शुरू होगी. पुलिस ने बताया कि इस दौरान पूरे इलाके में भारी सुरक्षा बल की तैनाती की गई थी.
मौके पर मौजूद डीसीपी काशी गौरव बंसवाल ने बताया कि मदनपुरा इलाके में 100 से ज्यादा सालों से बंद पड़े शिव मंदिर को खोला गया है. मंदिर के अंदर बहुत धूल और मिट्टी थी, जिसको नगर निगम की टीम की मदद से बाहर निकाला गया. पूरे इलाके में पुलिस और पीएसी के जवानों की तैनाती की गई थी. हालांकि, लोगों के सहयोग से कार्रवाई की गई. साथ ही कैमरे, ड्रोन और रुफ टॉप ड्यूटी के जरिए भी निगरानी की गई.
जब उनसे पूछा गया कि मंदिर में पूजा-पाठ के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मंदिर सार्वजनिक और किसी एक को अधिकृत नहीं किया जा सकता है. कोई भी आकर मंदिर में पूजा-पाठ कर सकता है.
'मंदिर में मिली 2 फिट से ज्यादा मिट्टी'
वहीं, ADM सिटी आलोक वर्मा ने बताया कि मंदिर को खोले जाने का किसी ने भी विरोध नहीं किया. मंदिर में पूजा-पाठ पर जल्द निर्णय लिया जाएगा. 2 फिट से ऊपर मिट्टी जमा थी, जिसे नगर निगम के सहयोग से साफ किया गया है.

सनातन रक्षक दल के प्रदेश अध्यक्ष अजय शर्मा ने बताया कि काशी वासियों के वर्षों के प्रयास के बाद यह मंदिर खुला है. इस समय खरमास चल रहा है, मंदिर में तीन शिवलिंग खंडित मिले है. जिनकी पूजा अभी नहीं हो सकती है. खरमास के बाद प्राण प्रतिष्ठा का काम तिथि विधि निकालने के बाद ही किया जाएगा. फिलहाल प्रशासन ने मंदिर खोल दिया है और शिखर दर्शन के अलावा साफ-सफाई का काम भी चल रहा है.

सनातन रक्षक दल ने की थी मांग
आपको बता दें कि 16 दिसंबर को सनातन रक्षक दल ने वाराणसी के दशाश्वमेध थाना के मदनपुरा मुस्लिम बहुल इलाके में सैकड़ों वर्षों से बंद पड़े मंदिर के शिव मंदिर होने का दावा प्रार्थना पत्र देकर मंदिर खोलकर पूजा पाठ कराने की गुजारिश की थी. इसके बाद से संभल जैसी स्थिति वाराणसी में भी दिखाई देने लगी थी. इसपर पुलिस-प्रशासन ने मंदिर के दस्तावेज को चेक कराए जाने का वक्त मांगा और बाद में मंदिर सार्वजनिक पाए जाने पर बुधवार को उसे खोल दिया गया है.