सनातन धर्म के प्रति आस्था अब केवल भारत तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि विदेशी नागरिक भी भारतीय संस्कृति और हिंदू रीति-रिवाजों को अपनाने लगे हैं. ऐसा ही एक अनोखा और भावनात्मक दृश्य उत्तर प्रदेश के वाराणसी में देखने को मिला, जहां एक रशियन जोड़े ने पूरे सनातन विधि-विधान के साथ सात फेरे लेकर विवाह रचाया. यह विवाह वाराणसी के डॉ. राजेंद्र प्रसाद घाट स्थित एक मंदिर में संपन्न हुआ.
मंदिर परिसर में भारतीय परिधान में सजे इस विदेशी जोड़े को देखकर मौजूद लोग भी हैरान रह गए. अग्नि के सात फेरे, सात वचन और मंत्रोच्चार के बीच यह विवाह पूरी श्रद्धा और परंपरा के साथ कराया गया. विवाह के दौरान पूरा माहौल भक्तिमय और आध्यात्मिक नजर आया.
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11 साल पहले रूस में हुई थी शादी
दरअसल, यह जोड़ा रूस का रहने वाला है. दूल्हे का नाम कांसटेनटाइन (55) और दुल्हन का नाम मरीना (35) है. दोनों ने बताया कि वे करीब 11 साल पहले रूस में अपने रीति-रिवाजों के अनुसार शादी कर चुके हैं. इसके बावजूद सनातन धर्म के प्रति गहरी आस्था होने के कारण उन्होंने हिंदू रीति-रिवाजों से दोबारा विवाह करने का निर्णय लिया.
हिंदू परंपरा के अनुसार अग्नि के सामने सात फेरे लेकर दोनों ने सात जन्मों तक साथ निभाने का संकल्प लिया. इसके बाद दूल्हे ने दुल्हन की मांग में सिंदूर भरा और दोनों ने एक-दूसरे को जयमाला पहनाई.
काशी को बताया सबसे पवित्र नगरी
रशियन दंपति ने बताया कि उन्हें भारतीय संस्कृति और सभ्यता से बेहद लगाव है. इसी कारण उन्होंने सनातन परंपरा के अनुसार विवाह करने का फैसला लिया. उन्होंने कहा कि विवाह के लिए काशी का चयन इसलिए किया क्योंकि यह दुनिया की सबसे पवित्र नगरी है.
दंपति ने भगवान शिव के प्रति अपनी अटूट आस्था का भी जिक्र किया और बताया कि शिव भक्ति ही उन्हें काशी खींच लाई.
पुजारी ने बताया विधि-विधान
विवाह संपन्न कराने वाले पुजारी शिवाकांत पांडे ने बताया कि राजेंद्र प्रसाद घाट स्थित नरवावीर बाबा मंदिर में पूरे हिंदू विधि-विधान के साथ विवाह कराया गया.
उन्होंने बताया कि विवाह के दौरान सिंदूरदान, कन्यादान और सात फेरे सहित सभी धार्मिक परंपराओं का पालन किया गया. यह विवाह सनातन संस्कृति के प्रति बढ़ती वैश्विक आस्था का एक सुंदर उदाहरण है.