उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है. रविवार को लखनऊ में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में कुल 6 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली, जबकि 2 नेताओं को प्रमोशन देकर नई जिम्मेदारी सौंपी गई. इसे सिर्फ कैबिनेट विस्तार नहीं, बल्कि यूपी में 2027 के चुनावी समीकरणों की पहली बड़ी पटकथा माना जा रहा है.
रायबरेली के ऊंचाहार से विधायक मनोज पांडे योगी सरकार में मंत्री बन गए हैं. यूपी में मनोज पांडे बड़े ब्राह्मण चेहरों में से एक हैं. 2024 में समाजवादी पार्टी का दामन छोड़कर उन्होंने योगी सरकार में शामिल होने का फैसला किया था. लोधी समुदाय से आने वाले कैलाश राजपूत को भी मंत्री बनाया गया है.कन्नौज के तिर्वा से बीजेपी विधायक कैलाश राजपूत की ओबीसी में अच्छी पकड़ मानी जाती है.
बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को भी कैबिनेट विस्तार में जगह दी गई है. पश्चिमी यूपी का अहम जाट चेहरा भूपेंद्र चौधरी माने जाते हैं. खागा सीट से कृष्णा पासवान मंत्री बनी हैं. चौथी बार की विधायक कृष्णा पासवान पासी समुदाय की नेता हैं.
साथ ही, यूपी विधान परिषद के सदस्य हंसराज विश्वकर्मा भी मंत्री बने हैं. पिछड़े समाज के नेता के रूप में हंसराज विश्वकर्मा की धमक है. अलीगढ़ की खैर सीट से विधायक सुरेंद्र दिलेर को भी मंत्री बनाया गया है. एससी समुदाय के बड़े नेता के रूप में सुरेंद्र दिलेर को जाना जाता है.
मेरठ दक्षिण से विधायक सोमेंद्र तोमर का इस मंत्रिमंडल विस्तार में प्रमोशन हुआ है. योगी कैबिनेट में सोमेंद्र तोमर का कद बढ़ा है. उन्हें बीजेपी का मजबूत गुर्जर चेहरा माना जाता है. योगी मंत्रिमंडल में राज्य मंत्री अजीत पाल का भी प्रमोशन हुआ है. कानपुर देहात की सिकंदरा सीट से अजीत सिंह पाल विधायक हैं. ये पाल समुदाय के बड़े नेता माने जाते हैं.
यूपी में पश्चिम से पूर्वांचल तक योगी का बैलेंस गेम दिखता है. हर समीकरण का ध्यान रखा गया है. या यूं कहें कि समाजवादी पार्टी के PDA फॉर्मूले के जवाब में बीजेपी ने सत्ता का नया सामाजिक गणित सामने रख दिया है.
योगी सरकार के इस आखिरी मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सभी 60 मंत्री पद भर चुके हैं. अब सरकार में सवर्ण मंत्रियों की संख्या 22, ओबीसी मंत्रियों की संख्या 25 और दलित मंत्रियों की संख्या 11 हो गई है. वहीं, एक मुस्लिम और एक सिख मंत्री भी शामिल हैं.