नोएडा में हुए हादसे और सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के मामले में प्रशासन ने बड़ा एक्शन लिया है. नोएडा अथॉरिटी के CEO एम लोकेश को हटा दिया गया है. हाल ही में हुई इंजीनियर की मौत के मामले में बड़ा एक्शन लिया गया है.
युवराज मेहता, गुरुग्राम में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे और टाटा यूरेका पार्क के रहने वाले थे. उनकी मौत तब हुई जब, उनकी कार नोएडा के सेक्टर 150 के पास एक निर्माणाधीन इमारत के बेसमेंट के लिए खोदे गए पानी से भरे गड्ढे में गिर गई. वह शुक्रवार रात काम से घर लौट रहे थे, तभी कथित तौर पर गाड़ी का कंट्रोल खो गया और वह बिना बैरिकेड वाले गड्ढे में गिर गई.
जांच के लिए बनी एसआईटी
पुलिस ने बताया कि घटना की जानकारी करीब 12.15 बजे मिली, लेकिन शव शनिवार सुबह लंबे रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद ही निकाला जा सका, जिसमें फायर डिपार्टमेंट, स्थानीय पुलिस, स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF) और नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) शामिल थे.
एक चश्मदीद, डिलीवरी एजेंट मोहिंदर ने आरोप लगाया कि रेस्क्यू में देरी हुई. चश्मदीद ने इस दौरान यह भी दावा किया कि अगर वक्त पर कार्रवाई होती तो इंजीनियर को बचाया जा सकता था. उसने कहा कि ठंड और बाहर निकली लोहे की छड़ों के कारण बचाव दल पानी से भरे गड्ढे में उतरने में हिचकिचा रहे थे.
'साइट पर नहीं थे सुरक्षा से जुड़े उपाय...'
मेहता के पिता की शिकायत के आधार पर, पुलिस ने रविवार को नॉलेज पार्क पुलिस स्टेशन में MJ विशटाउन प्लानर लिमिटेड और लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ FIR दर्ज की. परिवार ने आरोप लगाया है कि डेवलपर्स ने बैरिकेड और रिफ्लेक्टर जैसे बेसिक सुरक्षा उपाय नहीं किए, जबकि यह इलाका दुर्घटना संभावित था और निवासियों ने बार-बार इस बारे में बताया था.