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'इस्लाम में टैटू बनवाना हराम, लड़के-लड़कियां इसे फैशन समझते हैं...', बोले देवबंद के मौलवी

देवबंद के मौलाना कारी इस्हाक गौरा ने टैटू बनवाने को इस्लाम में हराम बताया है. उन्होंने कहा कि यह अल्लाह द्वारा बनाए गए शरीर में बदलाव है, जो शरीयत के खिलाफ है. युवाओं से इस प्रथा से बचने की अपील की गई है. टैटू बनवा चुके लोगों को अल्लाह से माफी मांगने और टैटू हटवाने की सलाह दी गई है.

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सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

उत्तर प्रदेश के देवबंद में एक प्रमुख इस्लामी विद्वान मौलाना कारी इस्हाक गौरा ने टैटू बनवाने को इस्लाम के खिलाफ बताया है. उन्होंने मुस्लिम युवाओं से अपील की है कि वे इस फैशन की ओर न जाएं और अल्लाह से राह दिखाने की दुआ करें. शनिवार को जारी एक वीडियो संदेश में मौलाना गौरा ने कहा कि टैटू बनवाना शरिया के खिलाफ है, क्योंकि यह अल्लाह द्वारा बनाई गई शरीर की बनावट में बदलाव करना है.

'टैटू बनवाना शरीयत के खिलाफ है'
मौलाना गौरा ने कहा, 'इस्लाम में टैटू बनवाना 'हराम' यानी वर्जित माना गया है. मुस्लिम युवाओं को इस चलन से बचना चाहिए.' उन्होंने यह भी कहा कि आजकल के लड़के-लड़कियां टैटू को फैशन और आधुनिकता का प्रतीक मानते हैं, जबकि यह इस्लामी दृष्टिकोण से एक गलत प्रथा है.

उन्होंने अफसोस जताया कि आज का समाज टैटू को पाप या निंदनीय नहीं मानता, बल्कि इसे एक स्टेटस सिंबल की तरह देखा जा रहा है. उन्होंने कहा, 'यह सोच चिंताजनक है और मुस्लिम समाज को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए.'

टैटू बनवा चुके लोग अल्लाह से करें माफी की दुआ
मौलाना ने उन लोगों को भी सलाह दी जो पहले ही टैटू बनवा चुके हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को अल्लाह से तौबा करनी चाहिए और यदि संभव हो तो टैटू को हटवाना चाहिए.

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युवाओं से की अपील
मौलाना ने खास तौर पर मुस्लिम युवाओं से कहा कि वे अपने शरीर को अल्लाह की अमानत समझें और उसे बदलने या सजाने-संवारने के लिए ऐसे हराम तरीकों से बचें.

देवबंद में दिए गए इस बयान के बाद टैटू पर एक बार फिर धार्मिक बहस तेज हो गई है. कुछ लोग इसे व्यक्तिगत पसंद बताते हैं, तो कुछ इसका विरोध करते हुए इसे धार्मिक मर्यादा के खिलाफ मानते हैं.
 

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