
यूपी के गोरखपुर में बीजेपी एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने यूजीसी आरक्षण विवाद पर मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने यूजीसी के अध्यक्ष और सचिव को 22 जनवरी को लिखे पत्र का सरकार से संज्ञान लेने की मांग की है. उन्होंने यूजीसी को खलनायक बताते हुए कहा कि ये निर्णय हिटलरशाही से बढ़कर रौलट एक्ट की तरह है. उन्होंने कहा कि यूजीसी ने 2025 में एक गजट प्रकाशित किया था कि यदि कोई गलत शिकायत करेगा, तो जुर्माना लगेगा और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी. 2026 में दंड के प्रावधान को समाप्त कर दिया गया. यूजीसी ने 2025 के गजट में केवल एससी/एसटी के लिए प्राविधान था. 2026 के गजट में एससीएसटी के साथ ओबीसी को भी जोड़ दिया.
बीजेपी एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि ये मान लेना कि सामान्य वर्ग का विद्यार्थी शोषक और उत्पीड़क है, ये गलत अवधारणा है. बिना हमारा पक्ष सुने, जाने फैसला देना गैरकानूनी है. नए कानून से साफ लगता है कि यदि दलित बच्चा शिकायत करता है, तो उसे कोई प्रमाण नहीं देना है. एक शिकायत के बाद विभागाध्यक्ष नोटिस देगा, वो आपको हास्टल, परीक्षा और विश्वविद्यालय से बाहर कर सकता है.
यूजीसी ने ये जो नियम बनाया है, उसमें सामान्य वर्ग के छात्रों के हितों का ध्यान नहीं रखा गया. पहले से ही उन्हें आरोपी मान लिया गया. एक माइंडसेट का व्यक्ति शिकायत करेगा. उसी माइंडसेट का व्यक्ति सुनवाई करेगा, तो न्याय मिलना संभव नहीं है. देवेंद्र प्रताप इसे रौलट एक्ट की तरह देख रहे हैं. जैसे पूरा देश रौलट एक्ट के खिलाफ सड़कों पर निकल गया वैसे ही आज हो रहा है.
बकौल बीजेपी एमएलसी- यूजीसी के कानून और नियम से समाज में नफरत और जातीय संघर्ष बढ़ेगा. देश के सामने सिविल वार जैसी स्थिति आएगी. वे देश के पहले विधायक हैं जिन्होंने सबसे पहले 22 जनवरी को यूजीसी के अध्यक्ष और सचिव को पत्र लिखा है. वे जनता-जनार्दन के साथ केन्द्र और राज्य की जनता से अपील करते हैं कि इसका शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताएं. जो नियम पहले से ही आरोपी मान ले, उसे तो उसे स्वीकार करने का कोई सवाल ही नहीं उठता है. यूजीसी का गठन शिक्षा के उत्कृटतम संस्थान के रूप में स्थापित हो. यूजीसी आज दुनिया की टॉप 100 विश्वविद्यालय में एक भी नहीं दे पाया.

उन्होंने आगे कहा कि ये भाजपा के खिलाफ यूजीसी की साजिश है. उनकी केन्द्रीय नेतृत्व से अपील है कि यूजीसी की इस साजिश को समझें और इस रौलट एक्ट को यूजीसी वापस ले. जब तक वापस नहीं हो जाता तब तक वे आवाज उठाते रहेंगे.
बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफा पर टिप्पणी नहीं करते हुए उन्होंने कहा कि लोगों को लग रहा है कि इससे उनके बच्चों का भविष्य समाप्त हो सकता है. यूजीसी पूरे देश में खलनायक की तरह हो गया. 13 को गजट आया और दिल्ली श्रीराम कालेज के दलित छात्र ने सामान्य वर्ग की छात्रा को प्रपोज किया और उसने मना किया तो उसने कम्पलेंट डाल दिया. कोई सुनवाई नहीं हुई. इसके बाद छात्रा का पिता दलित लड़के के घर जाकर 50 हजार रुपए देकर मामले को खत्म किया. इसका अभी से दुरुपयोग शुरू हो गया है. 98 प्रतिशत मामले फर्जी पाए जाते हैं.
उन्होंने आगे कहा कि ये उनका नहीं, न्यायाधीशों का कहना है. इस एक्ट का दुरुपयोग पक्का होगा. ऐसे किसी एक्ट की आवश्यकता नहीं थी. दलितों और पिछड़ों ने ये नियम नहीं मांगा था. इन लोगों ने अपने कार्य से अलग हटकर पूरे देश में बवाल मचा दिया है, जो उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि वे सच की आवाज हैं, जो सच होगा वहीं बोलेंगे. जो सच होगा, वही करेंगे. सच्चाई के रास्ते पर अंतिम दम तक लड़ते रहेंगे. देश की संसद, किसी राज्य की विधानसभा में नहीं बना है. ये अधिकार केवल संसद और विधानसभा को है. यूजीसी कहता है कि जो उसके नियम का पालन नहीं करेगा, उसकी आर्थिक मदद रोक देगा. ये देश संविधान से चलेगा. धौंस से नहीं चलेगा. उन्होंने कहा कि ये हिटलरशाही नहीं रौलट एक्ट है. इसका वे विरोध करते हैं.