
UP News: बुंदेलखंड क्षेत्र के महोबा जिले में दो मुस्लिम युवक कौमी एकता की मिशाल बन कर उभरे हैं. दोनों पूरे जिले में सुंदरकांड का पाठ पढ़ते देखे जाते हैं. यह दोनों पिछले कई सालों से हिंदू लोगों के साथ सुंदरकांड का पाठ पढ़ रहे हैं.
मुहम्मद जहीर और सुलेमान नाम के इन दोनों मुस्लिम युवकों के लिए हिंदू-मुस्लिम के बीच 'न कोई मजहब की दीवार न कोई भेदभाव है. दोनों मुस्लिम व्यक्ति कार्यक्रम में हिन्दू समाज के साथ वर्षों से सुंदरकांड का पाठ करते हैं.
हिन्दू मुस्लिम एकता और ईश्वर एक की धारणा रखने वाले ये दोनों मुस्लिम व्यक्ति साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल हैं और तमाचा है उन लोगों पर जो धर्म के नाम पर इंसानियत को बांटकर आपसी भाईचारे के लिए नासूर बनते हैं.
सुंदरकांड का पाठ करने वाले सुलेमान के पिता बसीर चच्चा जो कि खुद भी 'बाणासुर' का अभिनय करते रहे थे. उन्होंने मरने से पहले अपने लड़कों से कहा था, ''मेरी मौत के बाद 'चालीसवां' भी करना और "तेरहवीं" भी करना.
कुलपहाड़ तहसील के सुगिरा गांव सहित जिले में कहीं भी सुंदरकांड होता है तो मुहम्मद जहीर और सुलेमान को बुलाया जाता है. ये ईश्वर को एक मानते हैं. सोमवार रात गांव के ही अमित द्विवेदी के घर में पाठ सुंदरकांड का पाठ हुआ था, जिसमें यह दोनों मुस्लिम युवकों को पाठ पढ़ते देख कर लोग अचंभित रह गए थे.
आज के इस नफरत के माहौल में भी यह दोनों मुस्लिम युवक कौमी एकता की मिशाल बने हुए हैं और हिंदू-मुस्लिम भाईचारे को मजबूत कर रहे हैं. ढोल मजीरा के बीच भक्ति में डूबे माहौल में दो मुस्लिम युवकों का सुंदरकांड का पाठ करना सभी को भा गया.
मुहम्मद जहीर बताते हैं कि वो 16 साल से सुंदरकांड का पाठ कर रहे हैं. हम हिन्दू मुस्लिम एक हैं और एक ही रहेंगे. जिनको राजनीति की रोटियां सेंकना हैं, वो हिन्दू मुस्लिम में भेद डाल रहे हैं. हमारी भावनाओं से खेल रहे हैं. हम हिन्दू मुस्लिम एक समान है और ईश्वर एक है.
वहीं, सुलेमान ने कहा कि वो भी 16 वर्षों से सुंदरकांड का पाठ कर रहे हैं. हमारे गांव में हिन्दू मुस्लिम में कोई भेदभाव नहीं हैं और सब मिलकर रहते हैं. एक दूसरे के त्यौहार में भी शामिल होते हैं. उनकी मानें तो बुरे वक्त में हिन्दू भाई उनकी मदद भी करते हैं. बताते हैं कि उनके पिता भी रामलीला में किरदार निभाया करते थे और उनसे ही सांप्रदायिक सौहार्द की सीख मिली है.
