मां रसोई के काम में व्यस्त थीं, पिता आंगन में कुछ काम निपटा रहे थे और पलंग पर लेटा दस साल का मयंक फोन पर रील स्कॉल कर रहा था. किसी को अंदेशा नहीं था कि कुछ ही पलों में यह सुकून भरा पल मातम में बदल जाएगा. अचानक मयंक का शरीर ढीला पड़ा और वह पलंग पर बैठे-बैठे लुढ़क गया. आवाज सुनकर जब तक परिजन दौड़कर पहुंचे, तब तक घर की खुशियां खामोशी में बदल चुकी थीं.
यह दर्दनाक घटना अमरोहा जिले के मंडी धनोरा इलाके की है, जहां चौथी कक्षा में पढ़ने वाले मयंक की अचानक मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है. बच्चे की मौत को डॉक्टरों ने हार्ट अटैक बताया है, लेकिन बिना पोस्टमार्टम अंतिम संस्कार हो जाने के कारण असली वजह सामने नहीं आ पाई.
किसान दीपक कुमार अपने परिवार के साथ गांव में रहते हैं. पत्नी पुष्पा देवी, बड़ा बेटा मयंक और छोटा बेटा शिवम. चार लोगों का यह छोटा-सा परिवार अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में व्यस्त था. शाम करीब पांच बजे मयंक घर में रखे पलंग पर बैठकर मोबाइल फोन पर रील देख रहा था. परिजन पास ही थे, लेकिन किसी को अंदेशा नहीं था कि यह उसकी जिंदगी के आखिरी पल साबित होंगे. अचानक मयंक पलंग से लुढ़क गया. पहले तो परिजनों को लगा कि शायद चक्कर आया है, लेकिन जब उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, तो घर में हड़कंप मच गया. मां बदहवास होकर बेटे को आवाज देने लगीं, पिता ने तुरंत उसे उठाया और बिना देर किए डॉक्टर के पास ले गए.
अस्पताल पहुंचते ही टूटा उम्मीद का धागा
परिजन बच्चे को लेकर पहले नजदीकी डॉक्टर और फिर धनोरा के एक प्राइवेट अस्पताल पहुंचे. अस्पताल में डॉक्टर अवनीश गिल ने बच्चे की पल्स, ब्लड प्रेशर और अन्य जरूरी पैरामीटर की जांच की. कुछ ही मिनटों में डॉक्टर का चेहरा गंभीर हो गया. जांच के बाद उन्होंने मयंक को मृत घोषित कर दिया. यह खबर सुनते ही परिजनों पर जैसे पहाड़ टूट पड़ा. मां पुष्पा देवी का रो-रोकर बुरा हाल था. पिता दीपक कुमार कुछ समझ ही नहीं पा रहे थे कि जो बच्चा कुछ देर पहले मोबाइल पर हंसते-मुस्कुराते वीडियो देख रहा था, वह अचानक कैसे हमेशा के लिए खामोश हो गया.
बिना पोस्टमार्टम अंतिम संस्कार
अस्पताल से शव घर लाया गया. गांव में खबर फैलते ही लोगों की भीड़ जमा हो गई. हर कोई स्तब्ध था. इतनी कम उम्र में इस तरह की मौत ने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया. परिजनों ने गहरे सदमे की हालत में बिना पोस्टमार्टम कराए ही बच्चे का अंतिम संस्कार कर दिया. पोस्टमार्टम न होने की वजह से यह साफ नहीं हो पाया कि बच्चे की मौत की असली वजह क्या थी. डॉक्टर की शुरुआती राय हार्ट अटैक की है. मयंक की मौत के बाद जुझैला चक गांव में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है. कोई इसे मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडिएशन से जोड़ रहा है, तो कोई बच्चों में बढ़ते हार्ट अटैक के मामलों को वजह मान रहा है. कुछ लोग कह रहे हैं कि ज्यादा देर तक मोबाइल देखने से बच्चे की तबीयत बिगड़ी, तो कुछ इसे अचानक आई प्राकृतिक मौत बता रहे हैं.
मासूम की यादें और टूटा परिवार
मयंक अपने परिवार की आंखों का तारा था. पढ़ाई में ठीक-ठाक, स्वभाव से शांत और छोटे भाई का ख्याल रखने वाला. उसके अचानक चले जाने से घर सूना हो गया है. मां बार-बार यही सवाल कर रही हैं कि आखिर उनके बेटे की क्या गलती थी. पिता दीपक कुमार अब भी सदमे में हैं और किसी से ज्यादा बात नहीं कर पा रहे.