कानपुर के किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़े संगठित गिरोह की जांच में पुलिस को चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ है कि इस रैकेट के तार साइबर अपराध की दुनिया से भी जुड़े हुए हैं. आरोपी तकनीक और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर अपने नेटवर्क को व्यवस्थित तरीके से चला रहे थे, जिससे वे आसानी से लोगों तक पहुंच बना सकें.
पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य टेलीग्राम और व्हाट्सएप पर सक्रिय विभिन्न साइबर ग्रुप्स के जरिए ऐसे व्यक्तियों की तलाश करते थे, जो आर्थिक रूप से कमजोर हों या पैसों की सख्त जरूरत में हों. इन लोगों से संपर्क साधने के बाद उन्हें शुरुआत में छोटे-छोटे ऑनलाइन टास्क दिए जाते थे, ताकि उनका भरोसा जीता जा सके. इन टास्क के बदले उन्हें कुछ पैसे भी दिए जाते थे, जिससे वे धीरे-धीरे गिरोह पर निर्भर होने लगते थे.
जांच में यह भी सामने आया है कि जब कोई व्यक्ति आर्थिक रूप से और अधिक जरूरतमंद हो जाता था, तब गिरोह के सदस्य उसे बड़ी रकम का लालच देकर किडनी डोनर बनने के लिए तैयार करते थे. इस पूरी प्रक्रिया में लोगों की मजबूरी और जरूरत का फायदा उठाया जाता था, जिससे वे बिना पूरी जानकारी के इस अवैध नेटवर्क का हिस्सा बन जाते थे.
फिलहाल, मामले में पुलिस आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है. आरोपी शिवम का बयान दर्ज करने के लिए जांच अधिकारी रवाना हो चुके हैं. उसके बयान के आधार पर आगे की कड़ी कार्रवाई की जाएगी और उसे पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेने के लिए अदालत में अर्जी दाखिल की जाएगी.
उधर, कानपुर में किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़े अवैध नेटवर्क का खुलासा होने के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है. मामले के सामने आने और मीडिया रिपोर्ट्स के बाद विभाग ने कल्याणपुर क्षेत्र में बिना अनुमति संचालित अस्पतालों के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू कर दिया है. इस कार्रवाई के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले कई अस्पतालों को बंद कर सील कर दिया गया है.
कल्याणपुर इलाके में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार तैनात रहीं. जैसे ही किडनी तस्करी से जुड़े ठोस इनपुट मिले, एसीएमओ डॉ. रमित रस्तोगी के नेतृत्व में छापेमारी की गई. इस दौरान मेड लाइफ हॉस्पिटल पर सबसे बड़ी कार्रवाई हुई, जिसे जांच में अवैध पाए जाने के बाद तुरंत सील कर दिया गया.
इसके अलावा गोल्ड हॉस्पिटल, मृगनेश हॉस्पिटल और एमपी हॉस्पिटल पर भी प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए ताला लगवा दिया. जांच में सामने आया कि इन अस्पतालों के पास न तो वैध लाइसेंस थे और न ही निर्धारित मानकों के अनुरूप सुविधाएं मौजूद थीं.
नोटिस की समयसीमा पूरी, आगे होगी कार्रवाई
एसीएमओ के अनुसार, प्रिया और आहूजा हॉस्पिटल को पहले ही नोटिस जारी किया गया था, जिसकी समयसीमा पूरी हो चुकी है. यदि इन अस्पतालों की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
अधिकारी के मुताबिक, कल्याणपुर क्षेत्र में सघन जांच अभियान चलाया गया है. मेड लाइफ सहित चार अस्पतालों को सील किया गया है, क्योंकि ये बिना वैध पंजीकरण के संचालित हो रहे थे. इनके किडनी ट्रांसप्लांट नेटवर्क से संभावित संबंधों की भी जांच जारी है. प्रिया और आहूजा हॉस्पिटल को नोटिस दिया गया था, समयसीमा पूरी होने के बाद नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी. अवैध रूप से चल रहे किसी भी नर्सिंग होम को बख्शा नहीं जाएगा.
इस कार्रवाई के बाद शहर में अवैध अस्पताल संचालकों के बीच हड़कंप मच गया है. प्रशासन अब इस नेटवर्क की गहराई से जांच कर रहा है, ताकि इसके पूरे फैलाव और मुख्य आरोपियों तक पहुंचा जा सके.