सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हर्षा रिछारिया जो कुंभ 2025 में वायरल होने के बाद धर्म प्रचारक की छवि बना चुकी हैं, उन्होंने सनातन धर्म का मार्ग छोड़ने का फैसला वापस ले लिया है. आजतक से बातचीत में हर्षा ने कहा, 'मैं आजीवन सनातन के लिए काम करूंगी. मेरा जीवन सनातन को समर्पित है.' ट्रोलर्स और विरोधियों से तंग आकर उन्होंने पहले पुराने काम (मॉडलिंग) पर लौटने का फैसला किया था. लेकिन करीबियों और संतों से बात करने के बाद उन्होंने इसे बदल दिया.
बेहद परेशान हो गईं थी हर्षा रिछारिया
हर्षा ने बताया, 'मुझे बेवजह कुछ लोगों ने टारगेट किया. मैं बेहद परेशान हो गई थी, एक साल में तीन से चार बार सुसाइड तक की सोच रही थी, लेकिन अब मैं पहले से ज्यादा मजबूत हूं.' भावुक होते हुए उन्होंने कहा, 'हमें अपनी गलती भी नहीं पता, फिर भी बिना वजह सवाल खड़े किए जा रहे हैं. मैं चाहती हूं कि वो खुद आकर मेरी गलती बताएं, ताकि मैं समझ सकूं.' हर्षा ने जोर देकर कहा कि उनका जीवन अब लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाने में लगेगा.
लड़कियों को डिफेंस की ट्रेनिंग देंगी हर्षा रिछारिया
सनातन धर्म के प्रचार के अलावा वे लड़कियों की रक्षा और आत्मरक्षा प्रशिक्षण पर काम करेंगी. जब उनसे पूछा गया कि प्रयागराज में चर्चा है कि वे किसी शहर से चुनाव लड़ रही हैं, तो हर्षा ने सहजता से कहा, 'तथास्तु.' मॉडलिंग और सनातन धर्म के बीच तुलना पर उन्होंने कहा कि सनातन की दुनिया में आने में ज्यादा समय लगा. आगे के मिशन के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि 'मैं लड़कियों के लिए काम करना चाहती हूं और उनका संकल्प लेकर आत्मरक्षा सिखाऊंगी.'
हाल ही में हर्षा ने कहा था कि बीते डेढ़ साल में उन्हें जिस तरह लगातार विरोध, तिरस्कार और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा, उसने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया है. इसी पीड़ा और हताशा के चलते उन्होंने अब धर्म प्रचार से दूरी बनाते हुए ग्लैमर की दुनिया में वापसी का ऐलान करती हैं.
'मैं अपना धर्म कभी नहीं छोड़ सकती'
हर्षा रिछारिया ने कहा था कि उनका सनातन धर्म से मोहभंग नहीं हुआ है, बल्कि उन्होंने धर्म के खुले प्रचार-प्रसार से खुद को अलग करने का फैसला लिया है. उन्होंने कहा कि सनातन धर्म कोई तब तक नहीं अपना सकता, जब तक सनातन धर्म उस व्यक्ति को न अपनाए. मैंने धर्म को नहीं अपनाया, धर्म ने मुझे अपनाया है. मैं खुद को सौभाग्यशाली मानती हूं कि मेरा जन्म इस धर्म में हुआ. मैं अपना धर्म कभी नहीं छोड़ सकती, क्योंकि मुझे गर्व है कि मैं इस धर्म में पैदा हुई.
हर्षा रिछारिया ने भावुक होते हुए कहा था कि धर्म की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जब धर्म की बात आती है, तो गैर-धर्मों से पहले अपने ही धर्म के लोगों से संघर्ष करना पड़ता है. हमें पहले अपने ही धर्म के लोगों के सवालों का जवाब देना पड़ता है, उनके शक दूर करने पड़ते हैं. ऐसे में दूसरों को क्या समझाएं, जब हमारे अपने ही एकजुट नहीं हैं.