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इलाज के मंदिर में 'धर्म परिवर्तन' का रैकेट! KGMU प्रशासन की सिफारिश पर यूपी STF ने संभाली जांच, डॉ. रमीजुद्दीन की बढ़ेंगी मुश्किलें

लखनऊ के केजीएमयू प्रशासन ने अवैध धर्मांतरण और यौन शोषण मामले में चुप्पी तोड़ते हुए जांच UPSTF को सौंपने की सिफारिश की है. सात सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट में डॉ. रमीजुद्दीन के रैकेट और कैंपस में संदिग्ध गतिविधियों की पुष्टि हुई है. प्रशासन ने साफ किया कि ऐसी अवैध गतिविधियां बर्दाश्त नहीं होंगी.

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डॉक्टर रमीज मलिक.(Photo: ITG)
डॉक्टर रमीज मलिक.(Photo: ITG)

लखनऊ के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में सामने आए अवैध धर्मांतरण और यौन शोषण के गंभीर मामले में प्रशासन ने अपनी चुप्पी तोड़ी है. संस्थान ने स्पष्ट किया है कि उन्हें पहले ऐसे किसी रैकेट की जानकारी नहीं थी. मामला उजागर होने के बाद गठित 7 सदस्यीय Fact Finding Committee की रिपोर्ट के आधार पर अब इसकी जांच UPSTF से कराने की सिफारिश की गई है.

केजीएमयू प्रशासन ने डॉक्टर केके सिंह और पूर्व डीजी भावेश कुमार सिंह की अध्यक्षता वाली समिति की जांच के बाद यह कड़ा कदम उठाया है. समिति ने अपनी रिपोर्ट में डॉ. रमीजुद्दीन के धर्मांतरण रैकेट और कैंपस के भीतर हो रही संदिग्ध गतिविधियों की पुष्टि करते हुए विस्तृत जांच की जरूरत बताई है.

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प्रशासन का कहना है कि केजीएमयू परिसर में छात्रों या कर्मचारियों के साथ किसी भी तरह के शोषण या अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अब STF इस पूरे सिंडिकेट और इसमें शामिल अन्य चेहरों की जांच करेगी.

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इससे पहले केजीएमयू में सामने आए अवैध धर्मांतरण मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी डॉक्टर रमीज मलिक को लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया. आरोपी पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था. वह पिछले 16 दिनों से फरार चल रहा था. लखनऊ पुलिस के मुताबिक, आरोपी डॉक्टर रमीज मलिक कोर्ट में सरेंडर करने की तैयारी में था,  लेकिन उससे पहले ही चौक पुलिस ने उसे धर दबोचा.  

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