समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर संविधान विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि संविधान को अपने से नीचे समझना किसी भी सत्ताधारी के लिए ठीक नहीं है. अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि जब भाजपा नेताओं ने अपने ऊपर लगे मुकदमे हटवाए थे, तो यह संविधान के किस अनुच्छेद के तहत किया गया था. अखिलेश यादव ने कहा कि जो लोग इन गतिविधियों में शामिल हैं, उनके लिए मौन रहना ही बेहतर होगा. उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद वाले मसले पर कहा, 'सत्ताकामी भाजपा का धर्म विरोधी चेहरा अब बेनकाब हो चुका है.'
‘शासनाधीश याद रखें हठ, हत करता है’
अखिलेश यादव ने शासनाधीशों को चेतावनी देते हुए कहा कि हठ अंततः विनाश का कारण बनता है. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का विचार, वक्तव्य और व्यवहार हमेशा असंवैधानिक रहा है और सत्ता के अहंकार में डूबी ‘संविधान विरोधी भाजपा’ ज्यादा दिन नहीं टिकेगी.
‘सनातनी संतों के अपमान का आरोप’
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि कुछ लोग मंचों से लगातार ‘सनातनी संतों’ का तिरस्कार कर रहे हैं और उनके खिलाफ अपमानजनक व अवांछित उपमाएं दी जा रही हैं. उन्होंने कहा कि ऐसी भाषा और सोच समाज को बांटने का काम कर रही है.
माघ मेले के धार्मिक सौहार्द पर सवाल
सपा प्रमुख ने कहा कि ‘बुलडोज़री सोच’ के समर्थन में नारे लगवाकर माघ मेले जैसे धार्मिक आयोजन के सौहार्द को बिगाड़ा जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि माघ मेले में उपद्रव फैलाने वालों के खिलाफ मुकदमे दर्ज नहीं किए जा रहे, जो बेहद चिंताजनक है.
माफी पर भी उठाए सवाल
उन्होंने कहा कि अब अगर भाजपा और उसके सहयोगी माफी भी मांग लें, तो उसका कोई मतलब नहीं रह जाएगा, क्योंकि माफी वही मायने रखती है जो दिल से मांगी जाए, मजबूरी में नहीं.