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अलाया अपार्टमेंट केसः 'मुझे बदनाम करने की साजिश', फरार आरोपी बिल्डर याजदान ने वीडियो जारी कर कहा

लखनऊ के अलाया अपार्टमेंट मामले में फरार चल रहे बिल्डर फहद याजदान की ओर से एक वीडियो जारी किया गया है. इसमें फहद ने कहा कि इस बिल्डिंग से यजदान बिल्डर का कोई लेना देना या वास्ता कभी नहीं रहा. ये सब मुझे बदनाम करने की साजिश है.

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अलाया अपार्टमेंट केस में आरोपी बिल्डर फहद याजदान ने वीडियो जारी कर अपनी बात रखी है (फाइल फोटो)
अलाया अपार्टमेंट केस में आरोपी बिल्डर फहद याजदान ने वीडियो जारी कर अपनी बात रखी है (फाइल फोटो)

लखनऊ के अलाया अपार्टमेंट मामले में फरार चल रहे बिल्डर फहद याजदान की ओर से एक वीडियो जारी किया गया है. इस वीडियो के जरिए फहद ने कहा कि मुझे बदनाम करने और माननीय मुख्यमंत्री को भ्रमित करने की साजिश रची जा रही है. इस घटना के 2 दिन बाद सबकी बातें सुनने के बाद में अपना बयान आप लोगों के सामने जाहिर कर रहा हूं. 

वीडियो जारी कर फहद ने कहा कि इस बिल्डिंग से याजदान बिल्डर का कोई लेना देना या सरोकार कभी नहीं रहा. उस बिल्डिंग की किसी भी चीज से शाहिद मंजूर के बेटे और भतीजे का भी कोई लेना देना नहीं है. उन्होंने फ्लैट बेचे हैं, रजिस्ट्री की है. इस हादसे के वह दोनों लोग भी जिम्मेदार नहीं हैं.

फहद याजदान ने कहा कि पार्किंग में कैमरे लगे थे. मेरी सभी अफसरों से गुजारिश है कि वह मलबे से कैमरे निकाल कर देखें कि उस बिल्डिंग में ड्रिलिंग का जो काम हो रहा था, वह काम खुद शाहिद मंजूर खड़े होकर करवा रहे थे, जिसको लेकर बिल्डिंग में रहने वाले लोगों से शाहिद मंजूर की तीखी नोकझोंक और बहस भी हुई थी. याजदान ने कहा कि लोगों ने उन्हें रोका भी था, लेकिन पता नहीं क्यों शाहिद मंजूर ने खुदाई के काम को नहीं रोका.

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फहद याजदान ने कहा कि अपने आप को बचाने के लिए इसकी सारी जिम्मेदारी मेरे ऊपर डाली जा रही है, जबकि मेरा इस बिल्डिंग से कभी कोई लेना-देना नहीं रहा. जब यह बिल्डिंग 2009 और 2010 में बन रही थी, तो मैंने शाहिद मंजूर से ताल्लुक होने के चलते 3 फ्लैट उस बिल्डिंग के बिकवाए थे, जिसका कमीशन मुझे मिला था. बाकी मेरा कोई मतलब नहीं था.

याजदान बिल्डर के फहद याजदान ने कहा कि लोग जो कह रहे हैं कि बिल्डर एग्रीमेंट मेरे नाम था, बिल्डर एग्रीमेंट अगर मेरे नाम पर था तो वह मांगा जाए कि कौन सा बिल्डर एग्रीमेंट था. उन्होंने कहा कि अगर किसी तरह का एग्रीमेंट फहद यजदानी के नाम होगा, तो मैं खुद जेल जाने को तैयार हूं.

यह बिल्डिंग 2010 और 2011 में बनी थी, जबकि याजदान बिल्डर की फर्म 2012-13 में बनी है. तो सवाल ये है कि इसमें हमारा इंवॉल्वमेंट कैसे हो जाएगा? उन्होंने कहा कि सब लोग फहद यजदान के पीछे पड़ गए है. जबकि मेरा इससे कोई लेना देना नहीं है. फहद यजदानी की बिल्डिंग प्राग नारायण रोड पर थी, जिसे एलडीए ने तोड़ दिया. इस पर हमें कोई ऑब्जेक्शन नहीं हुआ. 

फहद यजदान ने कहा कि मेरी सभी से गुजारिश है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाए. हफ्ते-10 दिन में कोर्ट से राहत मिलती है, तो ठीक है. वरना मैं खुद सरेंडर कर दूंगा.

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