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UGC के विरोध में कल लखनऊ में आंदोलन करेगी करणी सेना, सवर्णों से शामिल होने की अपील

यूजीसी कानून के विरोध में 27 जनवरी को शाम 4 बजे लखनऊ के परिवर्तन चौक से बड़ा आंदोलन शुरू होगा. करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष दुर्गेश सिंह ने सवर्ण समाज से इसमें बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है. उन्होंने कहा कि यह कानून समाज के हितों के खिलाफ है. करणी सेना ने आंदोलन को शांतिपूर्ण बताया है. प्रशासन भी आंदोलन को लेकर सतर्क है और सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए जाने की संभावना है.

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यूजीसी के नए नियम के प्रावधान को लेकर हंगामा बढ़ता जा रहा है. Photo ITG
यूजीसी के नए नियम के प्रावधान को लेकर हंगामा बढ़ता जा रहा है. Photo ITG

यूजीसी कानून के विरोध में राजधानी लखनऊ में बड़ा आंदोलन होने जा रहा है. 27 जनवरी को शाम 4 बजे यह आंदोलन परिवर्तन चौक से शुरू होगा. करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष दुर्गेश सिंह ने इस कानून के खिलाफ सड़कों पर उतरने का आवाहन किया है.

दुर्गेश सिंह ने कहा कि यूजीसी कानून सवर्ण समाज के हितों के खिलाफ है और इससे समाज में असंतोष बढ़ रहा है. उन्होंने दावा किया कि इस आंदोलन में सवर्ण समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल होंगे और सरकार के सामने अपनी बात मजबूती से रखेंगे.

करणी सेना का कहना है कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा, लेकिन सरकार तक अपनी मांगों को मजबूती से पहुंचाने के लिए हर स्तर पर आवाज उठाई जाएगी. संगठन की ओर से समर्थकों से तय समय पर परिवर्तन चौक पहुंचने की अपील की गई है.

यूजीसी कानून के विरोध में होने वाले इस आंदोलन को लेकर प्रशासन भी सतर्क है. राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए जाने की संभावना है.

UGC के विरोध में आंदोलन

बरेली में तैनात सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा
उत्तर प्रदेश के बरेली में तैनात सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने UGC नियमों और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद के बीच अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. बताया जा रहा है कि उन्होंने अपना त्यागपत्र जिला मजिस्ट्रेट को सौंप दिया है. इस घटनाक्रम के बाद यह सवाल उठ रहा है कि किसी प्रशासनिक अधिकारी के इस्तीफे के बाद आगे की औपचारिक प्रक्रिया क्या होती है और अंतिम फैसला कौन लेता है.

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इस्तीफे के बाद क्या होती है प्रक्रिया?
प्रशासनिक व्यवस्था में भले ही राज्य के संवैधानिक प्रमुख राज्यपाल होते हों, लेकिन किसी अधिकारी के व्यक्तिगत इस्तीफे की प्रक्रिया अलग होती है. जब कोई अधिकारी, जैसे सिटी मजिस्ट्रेट, पद छोड़ने का निर्णय लेता है तो वह अपना इस्तीफा आमतौर पर जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से शासन तक भेजता है. कुछ मामलों में यह सीधे नियुक्ति विभाग या शासन को भी भेजा जा सकता है.

इस्तीफा कब तक स्वीकार होता है?
डीएम के स्तर से इस्तीफा शासन के नियुक्ति विभाग को अग्रेषित किया जाता है. इसके बाद सरकार तय करती है कि त्यागपत्र स्वीकार किया जाए या नहीं. इस पूरी प्रक्रिया के लिए कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं होती. कभी निर्णय कुछ दिनों में हो जाता है, तो कभी इसमें हफ्तों या महीनों का समय भी लग सकता है. अंतिम फैसला पूरी तरह सरकार के विवेक पर निर्भर करता है.

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