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Bahraich में गांववाले कर रहे हनुमान चालीसा-सुंदरकांड का पाठ, भेड़ियों के आतंक के बीच चमत्कार की आस

Bahraich Bhediya News: वन विभाग के हाथ अगली सफलता ना लगते देख ग्रामीण अब भेड़िया भगाने के लिए 'ईश्वरीय मदद' की आशा कर रहे हैं. इसके लिए उन्होंने मंगलवार को हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ शुरू कर दिया है.

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बहराइच में पूजा-पाठ शुरू
बहराइच में पूजा-पाठ शुरू

यूपी के बहराइच में 'ऑपरेशन भेड़िया' जारी है. वन विभाग ने फिलहाल चार भेड़ियों को पकड़ने में सफलता हासिल की है लेकिन दो आदमखोर अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं. ये भेड़िये कभी भी, किसी पर हमला कर दे रहे हैं.  इन्होंने 10 लोगों को मौत के घाट उतार दिया है, साथ ही दर्जनों ग्रामीणों को घायल भी किया है. इस बीच गांव वाले अब भेड़ियों से मुक्ति पाने के लिए भगवान भरोसे हो गए हैं. उन्होंने पूजा-पाठ शुरू कर दिया है.  

वन विभाग के हाथ अगली सफलता ना लगते देख ग्रामीण अब भेड़िया भगाने के लिए 'चमत्कार' की आशा कर रहे हैं. मंगलवार को उन्होंने हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ शुरू कर दिया है. ग्रामीणों का कहना है कि जब वन विभाग अपनी क्षमता साबित नहीं कर पा रहा है, तो अब केवल बजरंगबली ही आदमखोर भेड़ियों को दूर करेंगे. पुजारी का कहना है कि हनुमान चालीसा और सुंदरकांड से बुरी ताकत (भेड़ियों) को दूर भगाएंगे. बजरंगबली जरूर कोई कमाल दिखाएंगे. 

गौरतलब है कि बहराइच के महसी तहसील में आदमखोर भेड़ियों के लगातार जारी हमले से 35 गांवों के लोग दहशत में हैं. इस दौरान सीएम योगी के आदेश पर कई बड़े अफसर घटनास्थल पहुंचे हैं. जिसमें वन निगम के एमडी (IFS) संजय कुमार, मुख्य वन संरक्षक (IFS) एचवी गिरीश, दो DFO और 2 सहायक वन संरक्षक समेत 10 अफसर शामिल हैं. 

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अब सर्च ऑपरेशन MD संजय कुमार और CCF एचवी गिरीश के संयुक्त नेतृत्व में चलेगा. वहीं, CCF रेनू सिंह पुलिस-प्रशासन के साथ समन्वय करते हुए रेस्क्यू टीमों का सहयोग करेंगी.

इन आदमखोर भेड़ियों को पकड़ने के लिए 5 वन प्रभागों बहराइच, कतर्नियाघाट वाइल्ड लाइफ, श्रावस्ती, गोंडा और बाराबंकी की लगभग 25 टीमें लगी हुई हैं. भेड़िये के ज्यादातर हमले महसी तहसील क्षेत्र में देखे गए हैं. इसलिए 25 टीमों में से केवल महसी क्षेत्र में 12 टीमें लगाई गई हैं. सुरक्षा के लिए दो कंपनी PAC जवानों के साथ पुलिस लगी हुई है.  

इन सबके बीच बहराइच जिले में आदमखोर भेड़ियों को पकड़ने के लिए वन विभाग अब रंग-बिरंगी गुड़ियों (टेडी डॉल) का इस्तेमाल कर रहा है. इन 'टेडी डॉल' को दिखावटी चारे के रूप इस्‍तेमाल किया जा रहा है. खास बात ये है कि इन 'डॉल' को बच्चों के यूरिन में भिगोया गया है, ताकि इनसे बच्चों जैसी गंध आए और भेड़िये इनकी तरफ खिंचे चले आएं. इन 'टेडी डॉल' को नदी के किनारे, भेड़ियों के आराम करने के स्थानों और मांद के करीब रखा गया है.

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