
आमतौर पर जब एसडीआरएफ (राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल) का नाम सामने आता है तो आंखों के सामने बाढ़, भूकंप, हादसे और जान जोखिम में डालकर लोगों को बचाते जवानों की तस्वीर उभरती है. लेकिन लखनऊ स्थित एसडीआरएफ की पहली बटालियन इन दिनों किसी बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन की वजह से नहीं, बल्कि एक अमरूद की वजह से चर्चा में है. जी हां, यहां एक सिपाही को सिर्फ इसलिए स्पष्टीकरण नोटिस जारी कर दिया गया, क्योंकि उसने ड्यूटी के दौरान अपने बॉस के घर में लगे अमरूद के पेड़ से फल तोड़कर खा लिया. विभाग ने इसे अनुशासनहीनता कहा जबकि सिपाही ने इसका जवाब दे दिया है.अब यही अमरूद पूरे महकमे में चर्चा का विषय बना हुआ है.
मामला जनवरी के पहले सप्ताह का है. लखनऊ स्थित एसडीआरएफ दफ्तर परिसर में बने कमांडेंट आवास पर उस दिन एक सिपाही की पहरा ड्यूटी लगी थी. परिसर में एक अमरूद का पेड़ भी लगा है.सर्दी का मौसम था, ड्यूटी लंबी थी और इसी दौरान सिपाही ने पेड़ से अमरूद तोड़कर खा लिया. बस यहीं से शुरू हो गया एक ऐसा मामला, जो फाइलों से निकलकर चर्चाओं तक पहुंच गया. बताया जा रहा है कि किसी अधिकारी की नजर इस पर पड़ गई. मामला ऊपर तक पहुंचा और तय किया गया कि ड्यूटी के दौरान इस तरह फल तोड़कर खाना अनुशासन के खिलाफ है. इसके बाद लखनऊ एसडीआरएफ की पहली बटालियन में तैनात सूबेदार सैन्य नायक की ओर से सिपाही को बाकायदा लिखित स्पष्टीकरण नोटिस जारी कर दिया गया.
नोटिस देखकर सिपाही भी रह गया हैरान
नोटिस मिलने के बाद सिपाही खुद भी असमंजस में पड़ गया. आमतौर पर इस तरह के नोटिस गंभीर मामलों जैसे ड्यूटी से अनुपस्थित रहना, आदेशों की अवहेलना या किसी अनुशासनहीनता में दिया जाता है. लेकिन यहां मामला सिर्फ अमरूद खाने का था. इसके बावजूद प्रक्रिया पूरी की गई और सिपाही से पूछा गया कि उसने ड्यूटी के दौरान ऐसा क्यों किया.
सिपाही का जवाब: पेट दर्द और यूट्यूब का सहारा
इस केस का सबसे रोचक हिस्सा होता है सिपाही का जवाब. सिपाही ने जो स्पष्टीकरण दिया, वह न सिर्फ सीधा-सादा था, बल्कि मानवीय भी. उसने अपने जवाब में लिखा कि उस दिन उसे तेज पेट दर्द हो रहा था. छुट्टियां बंद थीं, इसलिए वह मेडिकल अवकाश नहीं ले सकता था. ड्यूटी छोड़कर जाना भी संभव नहीं था. दर्द से राहत पाने के लिए उसने मोबाइल पर यूट्यूब देखा. वहां उसे जानकारी मिली कि अमरूद खाने से पेट दर्द में आराम मिल सकता है. बस इसी घरेलू नुस्खे पर भरोसा करके उसने परिसर में लगे अमरूद के पेड़ से फल तोड़कर खा लिया. सिपाही ने यह भी साफ किया कि उसका किसी भी तरह से अनुशासन तोड़ने या सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था. अपने जवाब के आखिर में उसने बेहद विनम्र शब्दों में माफी भी मांगी और अनुरोध किया कि उसकी मजबूरी को समझते हुए उसे क्षमा कर दिया जाए.

अधिकारी भी पड़े सोच में
सिपाही का जवाब जब अधिकारियों के सामने पहुंचा तो वे भी कुछ देर के लिए सोच में पड़ गए. एक तरफ नियम-कानून और अनुशासन की किताब थी, तो दूसरी तरफ एक जवान की मजबूरी और ईमानदार स्वीकारोक्ति. बताया जा रहा है कि इस जवाब पर वरिष्ठ स्तर पर चर्चा हुई और आखिरकार यह तय किया गया कि मामले को ज्यादा तूल नहीं दिया जाएगा. सूत्रों के मुताबिक, सिपाही को सख्त चेतावनी दी गई और भविष्य में ड्यूटी के दौरान इस तरह की गलती न दोहराने की हिदायत देकर छोड़ दिया गया .यानी अमरूद के इस मामले में सिपाही को अंततः राहत मिल गई.