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UP में आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए चलाया जा रहा अभियान, योगी सरकार ने बढ़ाई समय सीमा

उत्तर प्रदेश में आवारा पशुओं के लिए चलाए गए अभियान की अवधि को बढ़ाया गया है. अब तक 60 दिन में विशेष अभियान (01 नवम्बर 2023 से 31 दिसम्बर 2023 तक) चलाकर 184060 गोवंश संरक्षित किया गया है. अभियान के दौरान 323 नए अस्थाई गौ आश्रय स्थल और 536 गौ आश्रय स्थलों में शेड विस्तारीकरण किया गया.

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प्रतीकात्मक फोटो.
प्रतीकात्मक फोटो.

उत्तर प्रदेश में आवारा पशुओं के लिए चलाए गए अभियान की अवधि को बढ़ाया गया है. प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने निराश्रित गोवंश संरक्षण के लिए चल रहे विशेष अभियान की अवधि 16 जनवरी तक बढ़ाए जाने के निर्देश दिए हैं. प्रदेश के विभिन्न जनपदों में अभी भी लगभग 45 हजार गोवंश बेसहारा विचरण कर रहे हैं.

दरअसल, अब तक 60 दिन में विशेष अभियान (01 नवम्बर 2023 से 31 दिसम्बर 2023 तक) चलाकर 184060 गोवंश संरक्षित किया गया है. अभियान के दौरान 323 नए अस्थाई गौ आश्रय स्थल और 536 गौ आश्रय स्थलों में शेड विस्तारीकरण किया गया. बेसहारा गोवंशों को पकड़ने हेतु अभियान में 1574 विशेष दस्तों का गठन कर 687 कैटल कैचर की सहायता ली जा रही है.

गोवंश का संरक्षण एवं संवर्द्धन राज्य सरकार की प्राथमिकता

पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह के मुताबिक गोवंश का संरक्षण एवं संवर्द्धन राज्य सरकार की प्राथमिकता है और निराश्रित गोवंशों के कारण फसलों के नुकसान तथा मार्ग दुर्घटनाओं की समस्या से निजात दिलाने की कवायद है. फिलहाल 6168 अस्थाई गौ आश्रय स्थल, 298 वृहद गो संरक्षण केन्द्रों, 253 कान्हा गो आश्रय तथा 314 कांजी हाऊस का निर्माण कर कुल 1402491 गोवंशों को संरक्षित किया जा चुका है.

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गोवंश को संरक्षित करने के लिए बढ़ाई अभियान अवधि

उन्होंने कहा कि पशुपालकों द्वारा नर गोवंशों का कृषि कार्य में उपयोग न होने, दूध न देने वाली और गर्भधारण न करने वाले गोवंशों को बेसहारा छोड़ देने के कारण अभी भी बेसहारा गोवंश सड़को तथा खेतो में जहा-तहां दिखाई दे रहे हैं. वहीं, प्रदेश में निराश्रित गोवंश को संरक्षित करने के लिए अभियान अवधि बढ़ाई जा रही है. इसके लिए मुख्य सचिव पशुधन डा0 रजनीश दुबे द्वारा सभी जिलाधिकारियों को भी पत्र प्रेषित कर दिया गया है.

सरकार ने किसानों एवं पशुपालकों से पुनः की ये अपील

संरक्षित किए जाने वाले निराश्रित गोवंश के देखभाल हेतु उनके चारे, भूसे, टीनशेड, पेयजल, विद्युत आपूर्ति, उपचार और ठंड से बचाव आदि की समुचित व्यवस्था भी की जा रही है. इस अभियान में गृह, राजस्व, पंचायती राज, ग्राम्य विकास एवं नगर विकास से परस्पर सहयोग एवं समन्वय स्थापित करके कार्य किया जा रहा है. सरकार ने किसानों एवं पशुपालकों से पुनः अपील करते हुए कहा है कि कृषि कार्य में उपयोगी न होने एवं दूध न देने वाली गौवंशों को निराश्रित न छोड़े.

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