लखनऊ में यूजीसी के नए नियम को लेकर भारतीय जनता पार्टी के भीतर एक दिलचस्प स्थिति सामने आई है. बीजेपी नेता बृज भूषण शरण सिंह के दोनों बेटे इस मुद्दे पर अलग अलग रुख अपनाए हुए हैं. एक तरफ उनके बेटे और विधायक प्रतीक भूषण सिंह इस नियम का विरोध कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर उनके बेटे और सांसद करण भूषण सिंह इस नियम के समर्थन में हैं.
विवाद इसलिए भी खास है क्योंकि जिस यूजीसी के नए नियम को लेकर चर्चा चल रही है, उसे तैयार करने वाली संसदीय कमेटी में बीजेपी सांसद करण भूषण सिंह सदस्य रहे हैं. ऐसे में उनका इस नियम के समर्थन में होना स्वाभाविक माना जा रहा है. वहीं उनके विधायक भाई प्रतीक भूषण सिंह ने इस नियम के खिलाफ सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी है.
UGC पर प्रतीक और करण आमने-सामने
प्रतीक भूषण सिंह ने सोशल मीडिया पर किए गए अपने पोस्ट में इतिहास और समाज से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने लिखा कि इतिहास के नाम पर बाहरी आक्रांताओं और उपनिवेशी ताकतों द्वारा किए गए भीषण अत्याचारों को अक्सर अतीत की बात कहकर भुला दिया जाता है. इसके उलट भारतीय समाज के एक वर्ग को लगातार ऐतिहासिक अपराधी के रूप में चिन्हित किया जा रहा है.
इतिहास के दोहरे मापदंडों पर अब गहन विवेचना होनी चाहिए जहाँ बाहरी आक्रांताओं और उपनिवेशी ताकतों के भीषण अत्याचारों को ‘अतीत की बात’ कहकर भुला दिया जाता है, जबकि भारतीय समाज के एक वर्ग को निरंतर ‘ऐतिहासिक अपराधी’ के रूप में चिन्हित कर वर्तमान में प्रतिशोध का निशाना बनाया जा रहा है।
— Prateek Bhushan Singh (@PrateekBhushan) January 26, 2026
उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान समय में उसी वर्ग को प्रतिशोध का निशाना बनाया जा रहा है. प्रतीक भूषण सिंह के अनुसार इस पूरे विषय पर गहन विवेचना की जरूरत है, ताकि इतिहास को संतुलित नजरिये से देखा जा सके. उनका मानना है कि यूजीसी के नए नियम से जुड़ी बहस सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर समाज की सोच पर भी पड़ता है.
दोनों नेताओं का मतभेद चर्चा का विषय बना हुआ है
एक ही परिवार के दो नेताओं के बीच इस तरह का मतभेद बीजेपी के भीतर चर्चा का विषय बना हुआ है. लखनऊ के राजनीतिक गलियारों में इस बात पर नजर है कि यूजीसी नियम को लेकर आगे पार्टी के भीतर क्या रुख सामने आता है.