उत्तर प्रदेश के मऊ में अधिकारियों ने बताया कि अयोध्या में तैनात GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह के दिव्यांगता प्रमाणपत्र की प्रामाणिकता की जांच चल रही है. यह जांच उनके इस्तीफे के एक दिन बाद सामने आई है. मऊ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. संजय गुप्ता ने बुधवार को बताया कि प्रशांत कुमार सिंह के दिव्यांग प्रमाणपत्र की दोबारा जांच के लिए वर्ष 2021 में शिकायत दर्ज की गई थी. यह जांच स्वास्थ्य विभाग, दिव्यांगजन आयोग कार्यालय और उच्च प्रशासनिक स्तर पर की जा रही है.
भाई ने लगाया फर्जी प्रमाणपत्र का आरोप
अयोध्या में इस्तीफे की घोषणा के बाद प्रशांत कुमार सिंह के भाई विश्वजीत सिंह ने मीडिया के सामने आरोप लगाया कि GST अधिकारी ने फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की थी. CMO के अनुसार, संबंधित दिव्यांग प्रमाणपत्र वर्ष 2009 में जारी किया गया था. 2021 में इसकी दोबारा जांच की मांग की गई, जिसके बाद से सत्यापन की प्रक्रिया लगातार जारी है.
मेडिकल बोर्ड के सामने नहीं हुए पेश
डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि शिकायत के बाद अधिकारी को करीब 40 प्रतिशत दिव्यांगता के आकलन के लिए दो बार डिविजनल दिव्यांग मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होने को कहा गया, लेकिन वह दोनों बार उपस्थित नहीं हुए.
स्वास्थ्य विभाग ने DG से किया संपर्क
CMO ने बताया कि 19 दिसंबर को स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले में डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज से दिशा-निर्देश मांगते हुए आधिकारिक पत्र जारी किया था. इस पत्र की एक प्रति शिकायतकर्ता विश्वजीत सिंह को भी भेजी गई थी. डॉ. गुप्ता ने बताया कि पूरे मामले की जानकारी दिव्यांगजन आयोग को दे दी गई है. विभागीय स्तर पर सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं और आगे की कार्रवाई उच्च अधिकारियों के निर्देश के बाद की जाएगी.
दुर्लभ आंखों की बीमारी पर विशेषज्ञ बोर्ड तय करेगा राय
जब उनसे यह पूछा गया कि संबंधित दिव्यांगता आंखों से जुड़ी ऐसी बीमारी बताई जा रही है, जो 50 वर्ष की उम्र में दुर्लभ मानी जाती है, तो CMO ने कहा कि इस पर अंतिम और प्रमाणिक राय केवल विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड ही दे सकता है.
दबाव के आरोपों से किया इनकार
CMO डॉ. संजय गुप्ता ने साफ कहा कि उन पर किसी भी तरह का कोई दबाव नहीं है. पूरी जांच प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से और नियमों के अनुसार की जा रही है. मामला फिलहाल दिव्यांगजन आयुक्त, स्वास्थ्य निदेशालय और अन्य उच्च संस्थानों के पास लंबित है.
आपत्तिजनक बयान के विरोध में दिया था इस्तीफा
प्रशांत कुमार सिंह ने मंगलवार को इस्तीफा देते हुए कहा था कि वे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ दिए गए कथित आपत्तिजनक बयानों से आहत हैं. उन्होंने कहा कि जाति और धर्म के आधार पर देश को बांटने के प्रयास उन्हें पीड़ा पहुंचाते हैं.
सरकार और संविधान के समर्थन में कदम
सिंह ने कहा था कि वह सरकार, संविधान और देश के निर्वाचित नेतृत्व के समर्थन में पद छोड़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि प्रयागराज की पवित्र भूमि से शंकराचार्य द्वारा संवैधानिक पद पर आसीन मुख्यमंत्री के खिलाफ की गई टिप्पणी आपत्तिजनक है.
माघ मेला विवाद से जुड़ा है मामला
ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के अवसर पर माघ मेला के दौरान गंगा स्नान के लिए रथ यात्रा की अनुमति न मिलने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा था.
शंकराचार्य पद को लेकर नोटिस
इसके एक दिन बाद माघ मेला प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर पूछा था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद वे खुद को ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य कैसे बता रहे हैं, जबकि इस पद को लेकर मामला अभी अदालत में लंबित है.