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जगुआर, सुखोई और तेजस की गड़गड़ाहट से गूंजा सुल्तानपुर... एक्सप्रेस-वे पर वायुसेना के करतब की आंखों-देखी

सुल्तानपुर में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर भारतीय वायुसेना ने युद्धाभ्यास करते हुए दमदार एयर शो किया. बुधवार दोपहर 2 बजे शुरू हुआ यह कार्यक्रम 3:30 बजे तक चला. मंगलवार को ही फाइटर जेट और जवान सुलतानपुर पहुंच गए थे. जगुआर, सुखोई, एमआई-17 वी-5 और तेजस की गड़गड़ाहट से पूरा इलाका गूंज उठा. एयर शो को लेकर लोगों में भारी उत्साह और कौतूहल देखने को मिला.

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वायुसेना के एयर शो ने दिखाया भारत का दम.(Photo: ITG)
वायुसेना के एयर शो ने दिखाया भारत का दम.(Photo: ITG)

'आसमान की जद में रहना ए परिंदों, क्योंकि ये बाजों का इलाका है... इनकी परवाज में जुनून है, कोई महज कहानी नहीं है!' उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की धरती पर बुधवार दोपहर यही एहसास सच बनकर उतर आया. दोपहर 2 बजे जैसे ही आसमान में गड़गड़ाहट गूंजी, लोगों ने समझ लिया कि यह कोई सामान्य दिन नहीं है. यह भारतीय वायुसेना का दिन था. शौर्य का दिन, संदेश का दिन और भरोसे का दिन.

इसको लेकर मंगलवार को ही फाइटर जेट और सैन्य विमान सुलतानपुर पहुंच चुके थे. लेकिन बुधवार को जब घड़ी ने दो बजाए, तब आसमान की चुप्पी टूट गई. एक-एक कर जब लड़ाकू विमानों ने एक्सप्रेस-वे की 3.2 किलोमीटर लंबी एयरस्ट्रिप को छुआ, तो ऐसा लगा मानो सड़क नहीं, रणभूमि तैयार हो गई हो. सुखोई, जगुआर, मिराज, तेजस और एमआई-17 वी-5 की गूंज ने पूरे इलाके को रोमांच और गर्व से भर दिया.

यह भी पढ़ें: पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर वायुसेना का महापराक्रम: सुखोई और मिराज की गर्जना से कांपा आसमान; रात में भी होगा युद्धाभ्यास

यह महज एक एयर शो नहीं था. यह भारतीय वायुसेना की उस क्षमता का प्रदर्शन था, जो बताती है कि जरूरत पड़ने पर हमारी सड़कें भी रनवे बन सकती हैं और हर दिशा से जवाब दिया जा सकता है.

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जब डामर की सड़क बनी युद्धभूमि

पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का यह हिस्सा केवल सड़क नहीं रहा. यह भारतीय वायुसेना की अजेय शक्ति का जीवंत प्रमाण बन गया. दोपहर 2 बजे के बाद जैसे ही लड़ाकू विमानों ने टचडाउन शुरू किया, हवा का सीना चीरती हुई आवाजें दूर-दूर तक सुनाई देने लगीं. जब सुखोई-30 एमकेआई नीचे आया, जब जगुआर की रफ्तार ने रडार को चकमा दिया और जब स्वदेशी तेजस की हुंकार गूंजी, तब पूरा पूर्वांचल गवाह बना कि वायुसेना को दुनिया का 'अभिजेय कवच' क्यों कहा जाता है.

यह अभ्यास केवल अभ्यास नहीं था, यह संदेश था- अगर युद्ध हुआ तो एयरबेस के बिना भी लड़ाई जारी रहेगी. हाईवे पर बनी यह एयरस्ट्रिप युद्ध के समय बैकअप रनवे का काम करती है. 320 मिलीमीटर मोटी कंक्रीट की यह सतह भारी लड़ाकू विमानों का भार सहन करने में सक्षम है. इसी वजह से यह एयरस्ट्रिप रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है.

युद्ध के समय दुश्मन सबसे पहले एयरबेस को निशाना बनाता है. ऐसे में हाईवे पर बनी यह एयरस्ट्रिप वायुसेना को लगातार ऑपरेशन जारी रखने की ताकत देती है.

आसमान में गूंजती ताकत की आवाज

इस एयर शो में कई प्रकार के लड़ाकू, परिवहन और हेलीकॉप्टर शामिल हुए. लड़ाकू विमानों में Su-30 MKI, जगुआर और मिराज 2000 ने हिस्सा लिया. परिवहन विमानों में C-295 और AN-32 ने अपनी क्षमता दिखाई. वहीं, हेलीकॉप्टर वर्ग में Mi-17 V5 ने प्रदर्शन किया. सुलतानपुर के अखलिकिरी करवत गांव के पास बनी 3.2 किलोमीटर लंबी एयरस्ट्रिप पर इन विमानों ने टचडाउन किया. यह एयरस्ट्रिप इतनी मजबूत है कि C-130J हरक्यूलिस जैसे भारी विमान भी यहां उतर सकते हैं.

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वायुसेना इन विमानों का उपयोग ग्रुप फॉर्मेशन में करती है, जो युद्ध के समय सामूहिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है. जब विमान एक के बाद एक उतरते और उड़ान भरते दिखे, तो यह केवल प्रदर्शन नहीं बल्कि युद्ध की तैयारी का संकेत था.

सुरक्षा के लिए बदला ट्रैफिक, सील हुआ एक्सप्रेस-वे

एयर शो के चलते सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए. पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर वाहनों के आवागमन का मार्ग परिवर्तित कर दिया गया. एक मई तक ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया ताकि वायुसेना का कार्यक्रम सुरक्षित तरीके से संपन्न हो सके. यह पहली बार नहीं था जब इस एक्सप्रेस-वे ने वायुसेना की ताकत देखी हो. वर्ष 2023 में यहां चार घंटे का एयर शो हुआ था, जिसमें सुखोई और मिराज ने टच एंड गो अभ्यास किया था. उस समय 12 किलोमीटर का क्षेत्र सील किया गया था.

इससे पहले 16 नवंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन किया था. उस दौरान एयरफोर्स का हरक्युलिस विमान एक्सप्रेस-वे पर उतरा था और मिग, सुखोई, जगुआर और मिराज ने आसमान में करतब दिखाए थे.

वायुसेना के ‘बाहुबली’ विमानों की ताकत

सू-30 एमकेआई

इसका काम है एयर स्पेस कंट्रोल. यह एक हवाई कमांड सेंटर की तरह काम करता है. यह पीछे से आने वाले अपने छोटे विमानों को निर्देश देता है और दुश्मन के रडार को पूरी तरह जाम करने की क्षमता रखता है. सीमा पर दुश्मन ने आंख दिखाई, तो सबसे पहले इसी का पेलोड जवाब देता है.

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सी-295

यह पहले की तुलना में स्मार्ट ट्रांसपोर्ट है. यह उन छोटे रनवे पर उतर सकता है जहां बड़े विमान नहीं उतर सकते हैं. यह सेना को युद्ध के सबसे करीब तक पहुंचाता है. भारतीय वायुसेना में माल ढोने के लिए यह सबसे भरोसेमंद वाहक माना जाता है. इसे गेम चेंजर भी कहा जाता है.

एएन-32

यह पहाड़ों का असली मालिक है. जब होता है और बाकी विमान नहीं उड़ पाते, तब एएन-32 का इंजन रोर (गरज) ही सुनाई देती है. इसे सेना का खाना, गोला-बारूद और जवान पहुंचाने के लिए बनाया गया है.

जैगुआर

यह रडार को चकमा देने का उस्ताद है. यह ट्री-टॉप लेवल यानी पेड़ों की ऊंचाई पर उड़कर दुश्मन की सीमा में घुसता है. इसका काम सिर्फ हवाई लड़ाई नहीं, बल्कि दुश्मन के बंकरों, तेल डिपो या पुलों को एक ही झटके में नेस्तनाबूद करना है. इसे सर्जिकल स्ट्राइक का सबसे भरोसेमंद साथी माना जाता है.

एमआई-17वी-5

यह केवल माल ढोने वाला नहीं है, यह स्पेशल फोर्स (जैसे गरुड़ कमांडो) के लिए आकाश का गेट है. जब सामान्य हेलीकॉप्टर जमीन पर नहीं उतर सकता (जंगल, पहाड़) तब स्लिदरिंग के जरिए कमांडो को उतरता है. यह सेना को तुरंत वॉर-जोन में उतारकर सुरक्षित वापस निकालने का बड़ा माध्यम है.

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मिराज 2000

यह बहुत पुराना है लेकिन इसका एवियोनिक्स व निशाना लगाने की सटीकता आज भी दुनिया में टॉप क्लास है. जब लक्ष्य छोटा हो व नुकसान शून्य रखना हो (जैसे बालाकोट) तब वायुसेना मिराज को ही चुनती है क्योंकि यह बम गिराकर वापस भी सुरक्षित आ जाता है.

संदेश साफ है- हर सड़क बन सकती है रनवे

पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर हुआ यह अभ्यास केवल प्रदर्शन नहीं था, बल्कि स्पष्ट संदेश था कि भारत की वायुसेना किसी भी परिस्थिति में तैयार है. जरूरत पड़ने पर देश की सड़कें भी रनवे बन सकती हैं और दुश्मन को जवाब देने में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी. 

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