ग्रेटर नोएडा के जेवर में दुनिया के चौथे सबसे बड़े और एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट का निर्माण का काम तेजी से चल रहा है. एयरपोर्ट का रनवे लैंडिंग और टेकऑफ टेस्टिंग के लिए लगभग तैयार है. एयरपोर्ट के निर्माण काम में लगी एजेंसी को अब लंबी दूरी के विमानों की सुचारू लैंडिंग-टेकऑफ़ के टेस्टिंग की जरूरत है. जिसके लिए लगभग 600 यूकेलिप्टस पेड़ों को हटाना होगा. लैंडिंग और टेकऑफ में ये पेड़ दिक्कत पैदा करेंगे. पेड़ों को हटाने का काम अगले कुछ महीनों में हो जाएगा.
पिछले साल भारतीय हवाईअड्डा प्राधिकरण (AAI) ने एक सर्वे रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें आस-पास के स्थानों के बारे में चिंता जताई गई थी जहां 600 से अधिक यूकेलिप्टस के पेड़ हैं. सर्वे रिपोर्ट में बताया गया था कि टेक-ऑफ और लैंडिंग में ये पेड़ परेशानी पैदा कर सकते हैं. ग्रेटर नोएडा के जेवर विधानसभा क्षेत्र से विधायक धीरेंद्र सिंह ने कहा कि एयरपोर्ट के निर्माण के लिए बिना किसी परेशानी के भूमि अधिग्रहण की योजना बनाई गई. उन्होंने कहा, लैंडिंग और टेकऑफ़ में किसी भी बाधा को दूर करने के लिए वन विभाग और यमुना औद्योगिक विकास प्राधिकरण से बातचीत के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की गई है. काम में लगी संबंधित एजेंसियां दिन-रात काम कर रही हैं.
विधायक धीरेंद्र सिंह ने कहा कि नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के निर्माण के अगले चरण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है. अधिग्रहण की शर्तों पर चर्चा के लिए हम जल्द ही किसानों के साथ बैठक करेंगे. इस क्षेत्र को एयरपोर्ट मिलने से किसान खुश हैं. पेड़ों को हटाने के अलावा, रनवे के उत्तरी छोर पर सड़क पर सुचारू लैंडिंग और टेकऑफ के लिए चार मीटर की बाधा सामने आएगी. यह सुनिश्चित करने के लिए बैरियर लगाया जाएगा कि चार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले भारी वाहन आसपास के क्षेत्र में प्रवेश न करें.