इन दिनों इंटरनेट पर 'जीरो सिविक सेंस' ट्रेंड छाया हुआ है. लोग कैमरा ऑन कर रील शूट करना शुरू करते हैं, तभी पीछे से कोई आ जाता है. फिर, वीडियो शूट को डिस्टर्ब करने वाले लोग पर टिप्पणी की जाती है कि लोगों में कोई सिविक सेंस नहीं है.
ये अब ट्रेंड बन चुका है. लोग स्टेशन पर खड़े होकर भी वीडियो बना रहे हैं और पीछे से गुजरने वाली ट्रेन को लेकर कमेंट करते दिखते हैं कि जरा भी सिविक सेंस नहीं है ट्रेन के ड्राइवर में. ऐसे वीडियो काफी फनी भी हैं और कुछ व्यंग्यात्मक भी हैं.
कुछ यूजर्स ऐसे रील भी बना रहे हैं, जिसमें पीछे साफ-सफाई करते लोग दिख रहे हैं और उन पर भी टिप्पणी की जा रही है. लोग ये कहते दिख रहे हैं कि इनमें जरा भी सिविक सेंस नहीं हैं. रील बनाते समय फ्रेम में आ जाते हैं.
दरअसल, 'जीरो सिविक सेंस' ट्रेंड अमूल्या रतन नाम की इंफ्लुएंसर के एक पुराने वीडियो के फिर से वायरल होने के बाद शुरू हुआ. इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर एक बहस छेड़ दी थी. इसमें सोशल मीडिया पर अमूल्या रतन की काफी आलोचना भी की गई थी. लोगों का कहना था कि वो खुद सार्वजनिक जगह पर वीडियो बना रही हैं और आने-जाने वाले लोगों को सिविक सेंस का पाठ पढ़ा रही हैं.
हालांकि, पहले वीडियो में जो कुछ हुआ वो रेंडम था. उसमें पीछे से गुरजने वाला शख्स अचानक से फ्रेम में आया. लेकिन, अब जो वीडियो बन रहे हैं, उसमें इसकी नकल करते हुए वैसे ही दृश्य जानबूझकर क्रिएट किए जा रहे हैं.
बस यहीं से लोगों ने ऐसे अटपटे वीडियो बनाने शुरू कर दिए, जो एक गहरा व्यंग्यात्मक संदेश देता दिखाई देता है. कुछ लोगों ने इसकी नकल करते हुए ऐसे वीडियो शूट किए जिसमें जानबूझकर बैकग्राउंड में किसी के निजता का हनन होता दिखाई दे रहा था और फिर यूजर उल्टे उस पर जीरो सिविक सेंस होने की तोहमत लगता दिखा. हालांकि, ऐसे वीडियो में सीन क्रिएट किए जा रहे हैं और ये दिखाने की कोशिश की जा रही है कि वीडियो बनाने वाले के पास जीरो सिविक सेंस है या फ्रेम में अचानक से आ जाने वाले के पास.