यह एक ऐसी महिला की असाधारण कहानी है, जिसका 500 साल पुराना घर टूटने वाला था. अपने घर को बचाने के लिए उसने एक-एक ईंट को खुद से उखाड़ा और 150 किलोमीटर दूर सारा सामान शिफ्ट किया.इसके बाद जैसा उसका घर पहले थे, उसे उसी तरह रिकंस्ट्रक्ट करना शुरू कर दिया. इसमें कई साल लग गए. हालांकि, हुबहू मकान पूरा नहीं हो सका. क्योंकि उससे पहले उनका देहांत हो गया. अब इस कहानी पर फिल्म बनने जा रही है. इसलिए मे सैविज की इस कहानी की फिर से चर्चा हो रही है.
द मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक, इंग्लैंड के हर्टफोर्डशायर में जब काउंसिल ने एक ऐतिहासिक घर को ध्वस्त करने की धमकी दी, तो उसकी मालकिन मे सैविज ने इसे स्वयं ही तोड़ने और घर के सारे सामान, यहां तक की एक एक ईंट को उखाड़कर इसे 100 मील दूर नॉरफोक में रिकंस्ट्रक्ट करने का निर्णय लिया.
इस महिला की असाधारण कहानी पर फिल्म बनने जा रही है. क्योंकि उन्होंने अपने घर को टूटने से बचाने के लिए दूसरी जगह शिफ्ट करने का फैसला लिया. इसके लिए खुद से एक-एक ईंट उखाड़कर 150 किलोमीटर दूर ले गई. फिर, पहले की तरह ही ईंट दर ईंट जोड़कर समुद्रतट पर घर को पहले के जैसा रिकंस्ट्रक्ट करना शुरू किया. ताकि, ऐसे लगे कि पूरा घर एक जगह से दूसरी जगह जस का तस शिफ्ट हो गया है.
1450 ई. में बना था घर
मे सैविज ने अपने घर को शिफ्ट करने का ये अनोखा प्रोजेक्ट तब शुरू किया, जब उनका ऐतिहासिक घर, वेयर हॉल, जो हर्टफोर्डशायर के वेयर में लगभग 1450 में बना था, पर ध्वस्त होने का खतरे मंडराने लगा. 1969 में, काउंसिल ने एक नए गोलचक्कर के लिए जगह बनाने के लिए इस एलिजाबेथन शैली के घर को हटाना चाहती थी और बुलडोजर उनके घर के मुख्य द्वार तक भी पहुंच गए थे.
तब दृढ़ निश्चयी मे ने अपने घर को बुलडोजर से ध्वस्त करने के बजाय 15वीं सदी के उस घर को, ईंट-दर-ईंट, नॉरफ़ॉक के वेल्स-नेक्स्ट-द-सी में खरीदी गई ज़मीन पर ले जाने का फैसला किया.
उस समय मे 58 वर्ष की थीं. घर को अलग करने में उन्हें एक साल लग गए और नॉरफ़ॉक तक 11 ट्रकों के चक्कर लगाने पड़े, क्योंकि उन्होंने सभी बीमों और खिड़कियों को एक विशाल पहेली की तरह क्रमांकित कर दिया था. ताकि, घर रिकंस्ट्रक्ट करने में उसे सही जगह पर लगाया जा सके.
में का बैकग्राउंड इंजीनियरिंग का था. वह स्वयं एक इंजीनियर थीं. अपने घर को टुकड़ों में अलग-अलग कर दूसरी जगह ले जाने के बाद वह अपने कुत्ते के साथ एक पुराने कारवां में रहने लगी. क्योंकि अब उन्हें अपने घर के सभी टुकड़ों को एक विशाल जिगसॉ पज़ल की तरह फिर से बनाना था.
एक-एक ईंट को उखाड़कर ले गईं
उन्होंने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा था कि मैं अपने इस शानदार पुराने घर को बुलडोजर से जमीन में धंसने नहीं दूंगी. मेरे पास दिन भर करने को कुछ नहीं है, तो क्यों न मैं यह काम खुद ही कर लूं. क्योंकि पूरे दिन काम करने के बाद दिन के अंत में सोने के लिए भरपूर समय मिलता है.
लगभग 67 साल की आयु में रिटायर्ड ड्राफ्ट्समैन महिला अपने अधूरे घर में रहने लगीं. अजनबियों ने उनकी मदद के लिए पैसे भेजे और उनमें से कई जीवन भर के दोस्त बन गए. उनका घर पूरा नहीं हो पाया था, लेकिन रहने लायक हो गया था. वह अपने पुराने घर के तरह की इसे बना रही थी और एक-एक बीम और ईंटों को उसी तरह सजा रही थी.
1993 में जब उनका निधन हुआ, तो उन्होंने अपना घर अपनी भतीजी क्रिस्टीन एडम्स को दे दिया. उस समय तक घर का निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ था. एडम्स को इसे फिर से संवारने में 15 साल लगा दिए और अपनी चाची के इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए अभी भी काम ढूंढ रही हैं. उन्होंने अपनी चाची के घर को बचाने के लिए किए गए उल्लेखनीय प्रयासों के बारे में लिखा है और वर्तमान में निर्देशक गिलिस मैकिनॉन इसी कहानी पर आधारित एक फिल्म बना रहे हैं.