एक महिला का हाथ शार्क मछली के हेड की तरह हो गया है. उसने अपने हाथ का फोटो शेयर किया और कहा- मुझे इस बात का अंदाजा नहीं था कि मेरे हाथ एक शार्क के हेड की तरह दिखने लगेंगे. दरअसल, इस महिला को एक जानलेवा बीमारी ने जकड़ लिया था.
इस 34 वर्षीय महिला का नाम सैडी केम्पो है. वो अपने दो बच्चों के साथ रहती है. एक दिन अचानक उसे किडनी में तेज दर्द महसूस हुआ. जिसके बाद वो तुरंत हॉस्पिटल पहुंची. यहां उसे पेन किलर देकर वापस घर भेज दिया गया. और कहा गया कि अगर फिर से तबीयत बिगड़ती है तो दोबारा आ जाए.
अगले ही दिन सैडी फिर से हॉस्पिटल पहुंच गई. जिसके बाद वो दो हफ्तों तक बेहोशी की हालत में रही. डॉक्टरों की मानें तो सैडी को ये दर्द किडनी स्टोन की वजह से हो रहा था. इसके चलते उसे इंफेक्शन हो गया. जिसने बाद में सेप्सिस का रूप ले लिया. बता दें कि सेप्सिस एक जानलेवा कंडीशन है, जहां बॉडी अपने ही टिशू और ऑर्गन को अटैक करने लगती है. इसकी वजह से सैडी के अंगुलियों को काटकर अलग करना पड़ा.
हाथ को पेट के एक हिस्से से सिल दिया ताकि बाजुओं में खून पहुंचे
बाद में डॉक्टरों ने उसके हाथ को पेट के एक हिस्से से सिल दिया, जिससे कि उसके बाजुओं में खून पहुंचता रहे. और जब सैडी के हाथ को पेट से बाहर निकाला गया तो वो बहुत अलग तरह का दिखने लगा था.
ब्रिटेन के पीटरबरो की रहने वाली सैडी ने इसे लेकर एक वीडियो बनाया. कहा कि उनका नया हाथ एक शार्क की तरह दिखने लगा है. उन्होंने कहा- जब मैंने अपने हाथ को पहली बार देखा और अंगूठे को हिलाने की कोशिश की तो मैं हैरान रह गई. ये शार्क की तरह लग रहा था. हालांकि, उन्होंने कहा कि सोचा नहीं था कि वो वायरल हो जाएगा.
सैडी के एक वीडियो पर 60 मिलियन से ज्यादा व्यूज हैं. उसे 2.1 मिलियन लोगों ने लाइक किया है. सैडी ने आगे कहा- मैंने हाल ही में टिकटॉक यूज करना शुरू किया है. मैं सिर्फ एक हफ्ते पहले से ही वीडियो अपलोड कर रही हूं. मैंने अपनी जिंदगी पर कल एक वीडियो किया था और मुझे बताया गया कि वो ट्रेंड कर रहा है. जो कि अद्भुत है.
सैडी ने बताया- मैं सेप्सिस की वजह से बहुत कुछ खोया है. मेरे हाथ, एक रिलेशनशिप, इंडिपेंडेंस और मैं ये चाहती हूं कि ये बीमारी किसी को ना हो. मैं इसके खतरे को लेकर लोगों को जागरुक करना चाहती हूं.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के डाटा के मुताबिक सलाना लगभग 11 मिलियन लोगों की मौत सेप्सिस से जुड़े कॉम्प्लिकेशन की वजह से हो जाती है. इनमें ज्यादातर बच्चे होते हैं.
सैडी ने आखिर में कहा- अगर मैं लोगों को सेप्सिस को लेकर सचेत करती हूं और लोगों को जल्द से जल्द इसके इलाज करने के लिए जागरुक कर पाऊंगी तो उम्मीद है कि मैं लोगों की जान बचा पाऊंगी.