मछली का पित्ताशय यानी गॉलब्लैडर आर्सेनिक से भी अधिक विषैला होता है. इसका कुछ ग्राम भी किसी व्यक्ति पर जहर जैसा असर दिखा सकता है. वहीं अधिक मात्रा जानलेवा साबित हो सकती है. इसके बावजूद पूर्वी चीन की एक महिला ने सिरदर्द से राहत पाने के चक्कर में मछली का पित्ताशय कच्चा चबा गई. कुछ ही घंटों बाद उसे अस्पताल के गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती कराना पड़ा.
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, जियांग्सू प्रांत की रहने वाली 50 साल की लियू नाम की महिला ने एक लोक उपचार के मुताबिक, मछली का गॉलब्लैडर निकालकर कच्चा ही खा गई. लोक उपचार के दावे के अनुसार मछली का पित्ताशय गर्मी को दूर कर सकता है. साथ ही शरीर को विषाक्त पदार्थों से मुक्त कर सकता है. इसके अलावा लगातार माइग्रेन से राहत दिला सकता है जो उसे परेशान कर रहा था.
14 दिसंबर की सुबह, लियू ने बाजार से 2.5 किलोग्राम की ग्रास कार्प मछली खरीदी. घर पर उसका पित्ताशय निकाला और उसे कच्चा ही निगल गई. महज दो घंटे बाद, उसे उल्टी, दस्त और पेट में दर्द होने लगा. उसके परिवार ने उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया. हॉस्पिटल में मछली के पित्ताशय निगलने की वजह से होने वाले जहर के असर को कम किया गया. साथ ही तेजी से फेल हो रहे लीवर का भी इलाज किया गया.
महिला को आईसीयू में भर्ती किया गया
उन्हें तुरंत जियांग्सू विश्वविद्यालय से संबद्ध अस्पताल के आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया. चिकित्सा दल ने उन्हें प्लाज्मा एक्सचेंज उपचार और निरंतर गुर्दा प्रतिस्थापन चिकित्सा प्रदान की, जो रक्त शुद्धिकरण की एक धीमी विधि है. पांच दिन बाद, लियू की हालत में सुधार हुआ और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई. इस मामले की सूचना अस्पताल ने 7 जनवरी को दी.
डॉक्टर हू झेनकुई ने कहा कि मछली का पित्ताशय आर्सेनिक से भी अधिक विषैला होता है. उन्होंने समझाया कि केवल कुछ ग्राम ही किसी व्यक्ति की जान लेने के लिए पर्याप्त हो सकते हैं और 5 किलोग्राम या उससे अधिक वजन वाली मछलियों का पित्ताशय घातक हो सकता है.
उन्होंने बताया कि गॉलब्लैडर में ऐसे विषाक्त पदार्थ होते हैं जो लीवर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इससे लीवर और किडनी फेल जैसी समस्या और विफलता हो सकती है. गंभीर मामलों में, ये विषाक्त पदार्थ आघात, मस्तिष्क के अंदर ब्लीडिंग और यहां तक कि मृत्यु का कारण भी बन सकते हैं.