पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जनवरी को पश्चिम बंगाल के मालदा टाउन रेलवे स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. इस ट्रेन के शुरू होने के कुछ ही घंटों के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो वयारल होने लगा, जिसमें ट्रेन के फर्श पर इस्तेमाल किए हुए कप और रैपर बिखरे पड़े थे.
आम ट्रेनों में ऐसे नजारे आम होते हैं, चाहे सुपरफास्ट राजधानी एक्सप्रेस हो या कोई एक्सप्रेस और लोकल ट्रेन. बर्थ से लेकर टॉयलेट तक गंदगी होना आम बात है, लेकिन वंदे भारत स्लीपर जैसी ट्रेनों में भी लोग कचरा इधर-उधर फेंकने से बाज नहीं आ रहे हैं.
देश की पहली स्लीपर वंदे भारत ट्रेन हावड़ा से कामख्या के लिए रवाना हुई. यह एक एलीट ट्रेन है. हालांकि, इसमें साफ-सफाई और डस्टबीन की प्रोपर व्यवस्था है. इसके बावजूद लोग जहां-तहां कचरा फेंक दे रहे हैं. सभी सुपरफास्ट स्लीपर ट्रेनों में साफ-सफाई करने वाले आते हैं और जगह-जगह डस्टबीन भी लगे होते हैं. इसके बाद भी लोग तय जगह पर गंदगी को न फेंककर उसे कम्पार्टमेंट में फैला देते हैं.
रेलवे अधिकारी ने कही ये बात
भारतीय रेलवे ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो का संज्ञान लिया है. एक वरिष्ठ रेलवे अधिकारी ने कहा कि रेलवे में सफ़ाई बनाए रखना हर नागरिक की ज़िम्मेदारी है, क्योंकि रेलवे सिस्टम सार्वजनिक संपत्ति है.अधिकारी ने आगे कहा कि वंदे भारत ट्रेनों में इस तरह की गंदगी या गंदे व्यवहार की स्थिति में, जरूरत पड़ने पर तुरंत सफाई करने के लिए समर्पित ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग स्टाफ़ हमेशा उपलब्ध रहता है.
लोगों के ऐसे आए रिएक्शन
इस वायरल वीडियो को लेकर लोग ट्रेनों में ऐसी हरकत करने वालों की काफी आलोचना करते दिखे. लोगों ने लिखा कि भारत को बाहरी दुश्मनों की जरूरत नहीं है. हम खुद ही अपनी व्यवस्थाओं को तोड़फोड़कर उसे बर्बाद करने के लिए काफी हैं.