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ये है PAK में रह रही गीता की पूरी कहानी...

पाकिस्तान में रहने वाली भारत की गीता का असली नाम हीरा है. जी हां, पहली बार गीता का असली नाम सामने आया है. गीता उर्फ हीरा के परिवार का कहना है कि उसका दस साल का एक बेटा भी है. गीता की पूरी कहानी जानकर किसी का भी दिल आसानी से पसीज जाएगा.

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अब खत्म होने वाला है इंतजार...
अब खत्म होने वाला है इंतजार...

पाकिस्तान में रहने वाली भारत की गीता का असली नाम हीरा है. जी हां, पहली बार गीता का असली नाम सामने आया है. गीता उर्फ हीरा के परिवार का कहना है कि उसका दस साल का एक बेटा भी है. गीता की पूरी कहानी जानकर किसी का भी दिल आसानी से पसीज जाएगा.

गीता का बेटा अपनी मां को बुला रहा है. कराची में करीब दस साल से रहने वाली गीता के पूरे परिवार को आज तक ने ढूंढ निकाला है. गीता बेजुबान है, मगर उसका बेटा बोल रहा है. इस मासूम को लगता है कि मां उसे छोड़कर चली गई थी. सरहद के इस पार से वो मां को पुकार रहा है. सरहद के उस पार से गीता इशारों में कह रही है...मैं जल्दी आऊंगी. कराची में करीब 2005 से रहने वाली गीता को लेकर कई राज सामने आए हैं.

सहरसा के परिवार का दावा सही
गीता उर्फ हीरा की यह दास्तान बिहार के सहरसा से शुरू होती है. मगर दुनिया इस बारे में तभी जान पाई, जब कराची से खबर आई कि एक बेजुबान भारतीय लड़की यहां पर दस साल से रह रही है. कराची से गीता उर्फ हीरा के बारे में खबर आई, तो बिहार के सहरसा में परिवार ने उसे पहचाना. परिवार ने बताया कि गीता सहरसा से लुधियाना गई थी और उसके बाद वहां से बदकिस्मती ने उसे सरहद पार पहुंचा दिया.

सहरसा की हीरा जब गलती से पाकिस्तान की सीमा में दाखिल हो गई, तो वे उसे नया नाम मिला 'गीता'. सहरसा में रहने वाले जनार्दन महतो का दावा है कि गीता उनकी बेटी है और उसका असली नाम हीरा है.

जो बात गीता की जुबान से कभी बयां नहीं हो सकी, वो सब तस्वीरों के जरिए दुनिया के सामने आ गई है. कराची में रहने वाली गीता उर्फ हीरा ने सबको पहचान लिया है. जिन आंखों में कल तक परिवार की याद में आंसू छलकते थे, उन आंखों में अब अपनों के पास लौटने की चमक है. सहरसा से जब परिवार ने गीता उर्फ हीरा के लिए तस्वीरें भेजीं, तो उसने एक ही लम्हे में सबकुछ इशारों और निगाहों के जरिए बयां करना शुरू कर दिया.

रिपोर्ट देखकर पिता ने पहचाना
गीता को टीवी और अखबारों में देखते ही पिता ने पहचान लिया. पिता को आज भी अपनी हीरा यानी गीता की एक-एक बात और एक-एक निशानी याद है. पूरे परिवार को इंतजार है गीता की वतन वापसी का.

लुध‍ियाना से गलती से पाकिस्तान गई गीता
गीता का परिवार बिहार के सहरसा और लुधियाना में रहता है. सहरसा में पुश्तैनी घर है और लुधियाना में उसका परिवार मजदूरी करता है. लुधियाना से ही गीता के पाकिस्तान जाने का अनचाहा रास्ता बन गया था. परिवार के मुताबिक, 2004 में गीता की शादी जालंधर में हुई थी. 2005 में गीता उर्फ हीरा को एक बेटा हुआ था. 2005 में गीता ससुराल गई थी. जालंधर के करतारपुर में मल्ली गांव में बैसाखी का मेला लगा था. गीता भी मेले में गई और वहीं से गायब हो गई. परिवारवालों को कुछ दिनों बाद गीता उर्फ हीरा के लापता होने की खबर मिली. ससुरालवालों ने गीता के बेटे को उसके माता-पिता को सौंप दिया. कई साल तक परिवार के लोग गीता उर्फ हीरा को तलाशते रहे. परिवार ने गीता की गुमशुदगी भी थाने में दर्ज करवाई थी. मगर उसके बारे में कोई खबर नहीं मिल सकी. इसी साल अगस्त में गीता की खबरें अखबारों और टीवी में आईं. परिवार के लोगों ने उसे पहचान लिया.

एदी फाउंडेशन ने की मदद
गलती से पाकिस्तान की सीमा में दाखिल होने वाली हीरा को वहां की कोर्ट ने कराची के एदी फाउंडेशन एनजीओ में भेज दिया. वहां एदी फाउंडेशन की संचालक बिलकिस एदी ने उसे गीता नाम दिया. हालांकि, गीता को एदी फाउंडेशन में परिवार जैसा प्यार मिला.

गीता को यह यकीन हो चला है कि अब वह करीब दस साल बाद फिर अपने परिवार के बीच पहुंच सकेगी. चेहरे और इशारों से वो अपनों का साथ पाने की बेकरारी को बयां करती है. वो भले ही बोल नहीं सकती, लेकिन जहां उसे इतने सालों तक पनाह मिली, वो उन लोगों को भी हमेशा याद रखने का वादा करती है.

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