प्रदेश में 10,000 करोड़ रु. के खदान घोटाले के आरोपों के चलते उनका भविष्य अधर में है. उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों पर अवैध उत्खनन को बढ़ावा देने के आरोप हैं.
इसमें उनका हाथ होने से भी इनकार नहीं किया जा सकता. पर गोवा के मुख्यमंत्री दिगंबर कामत, जिनके पास खनिज विभाग है, बेपरवाह हैं.
इंडिया टुडे से मुलाकात में उन्होंने अवैध उत्खनन पर रोक न लगाने के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया. कुछ अंशः
गोवा में अवैध खुदाई का खतरा कितना गंभीर है?
बीते पांच साल में चीन से कम ग्रेड वाले अयस्क की मांग बढ़ गई है. इसका नतीजा अवैध खनन में निकला है. कुछ लोगों ने अपनी निजी जमीन पर बिना इजाजत ही उत्खनन शुरु कर दिया. जिन खदानों को इजाजत दी गई है, वहां भी अनियमितताएं हो सकती हैं.
अवैध खदानों की जानकारी होने के बावजूद आपने कार्रवाई क्यों नहीं की?
जहां कहीं बिना इजाजत के उत्खनन हो रहा था, वहां हमने मशीनें जब्त कर लीं और रॉयल्टी से दस गुना जुर्माना लगाया. लेकिन जिन जगहों पर उत्खनन की इजाजत है, वहां हो रही अवैध गतिविधियों के बारे में मैं कहूंगा कि उन्हें रोकना अकव्ले मेरी जिम्मेदारी नहीं. उत्खनन की इजाजत पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारतीय खदान ब्यूरो और खदान सुरक्षा महानिदेशक देते हैं.
क्या आप यह जिम्मेदारी केंद्र सरकार पर डाल रहे हैं?
मैं किसी पर जिम्मेदारी नहीं डाल रहा हूं. मैं आपको हकीकत बता रहा हूं. 2010 में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने स्थानीय लोगों के विरोध के बावजूद नई खदानों के लिए पर्यावरण संबंधी मंजूरी जारी कर दी. मैंने फरवरी में जयराम रमेश (तत्कालीन मंत्री) को पत्र लिखकर मंजूरी न देने की गुजारिश की थी. उन्होंने मेरा आग्रह मान लिया. हमने 2010 में परिपत्र जारी कर लौह अयस्क के कारोबारियों के लिए जहाजों में अयस्क लदान से पहले खनिज निदेशालय से प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य कर दिया था.
अवैध उत्खनन के कारण रॉयल्टी का नुकसान होने के साथ ही पर्यावरण भी बर्बाद हो रहा है?
जहां कहीं भी उत्खनन होता है, वहां पर्यावरण को नुकसान होता है. हम संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं.
क्या आपके बहुत-से सहयोगी खदान मालिकों के ठेकेदार नहीं हैं?
जहां तक मेरे सहयोगियों की बात है तो मैंने स्पष्ट कर दिया है कि मुझे वैध तरीके से कारोबार करने वालों से कोई शिकायत नहीं है.
अवैध उत्खनन के खिलाफ आप कार्रवाई क्या इसलिए नहीं कर रहे हैं कि आप अपने रिश्तेदार और जाने-माने खदान मालिक दिनार तारकार को संरक्षण देना चाहते हैं?
दिनार तारकार मेरे रिश्तेदार नहीं हैं. न तो मैं और न ही मेरे परिवार का कोई सदस्य खनिज कारोबार से जुड़ा है. मैंने अवैध उत्खनन के मामले को देखने के लिए अतिरिक्त प्रमुख वन संरक्षक की अगुआई में एक समिति का गठन किया है. इस समिति के पास कानून का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करने का अधिकार है. इसके अलावा अवैध उत्खनन को रोकने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति भी है.
भाजपा ने अवैध उत्खनन की सीबीआइ जांच की मांग की है. आपको उसकी इस मांग में कितना दम लगता है?
केंद्र सरकार ने पहले ही जस्टिस एम.बी. शाह आयोग बनाया है. किसी और एजेंसी से जांच कराने की मांग नहीं आई है.
आप पर पद छोड़ने का कोई दबाव?
मुझ पर कोई दबाव नहीं है. दस साल में कोई नया पट्टा जारी नहीं किया गया है. मैं पार्टी के फैसले का सम्मान करूंगा.