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अकेले चल पड़े Penguin का आखिर क्या हुआ? डॉक्यूमेंट्री की 5 जरूरी बातें भी जान लीजिए

Nihilist Penguin सोशल मीडिया पर वायरल है. 19 साल पुराने वीडियो को हर कोई अलग ढंग से देख रहा है. कोई उसे सिस्टम से निकला रिबेल कह रहा है, कोई Existential Crisis का पोस्टर बॉय. लेकिन ये वीडियो Encounters at the End of the World का सबसे कड़वा सच है. क्योंकि कुछ रास्ते अलग नहीं होते—बस आखिरी होते हैं.

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पेंगुइन का वायरल वीडियो 2006 में शूट हुई डॉक्यूमेंट्री का हिस्सा है (फोटो- ITG)
पेंगुइन का वायरल वीडियो 2006 में शूट हुई डॉक्यूमेंट्री का हिस्सा है (फोटो- ITG)

मनमौजी, शून्यवादी (Nihilist), पागल, भटका हुआ.... और न जाने क्या-क्या.

झुंड को छोड़ अकेले चलता पेंगुइन सोशल मीडिया का मेन कैरेक्टर बन गया है. कोई उसे सिस्टम से बाहर निकला Rebel बता रहा है, कोई Existential Crisis का शिकार, तो कोई कह रहा है.... बस vibe मैच नहीं हुई.

असल में पेंगुइन के दिमाग में क्या चल रहा था, ये किसी को नहीं पता, लेकिन उसकी उस 'सोलो वॉक' ने इंटरनेट को पूरी तरह ट्रिगर कर दिया है.

अगर आप सोशल मीडिया पर थोड़ी भी देर टिकते हैं, यकीन मानो, वो अकेला पेंगुइन आपके फीड में drop हो चुका है. अब बारी उसकी पूरी कहानी जानने की है. ये जो वायरल क्लिप है, वो 'Antarctica: Encounters at the End of the World' का हिस्सा है, जिसे Werner Herzog ने 2007 में रिलीज किया था.

एक घंटे 40 मिनट की इस डॉक्यूमेंट्री में आपको अंटार्कटिका का पूरा सिस्टम समझाया गया है. पृथ्वी का 5वां सबसे बड़ा महाद्वीप, लगभग पूरी तरह बर्फ से ढका, जहां सर्दियों में तापमान -84°C तक गिर जाता है.

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पता है क्या, अंटार्कटिका में पेड़ या झाड़ियां नहीं हैं. बस कुछ जमीन या गीली जगहों में उगने वाले छोटे पौधे (moss, lichens और algae) ही वहां दिखते हैं. यहां का समुद्र व्हेल मछलियों और अंटार्कटिका सील और पेंगुइन का घर है.

Encounters at the End of the World शूट करते वक्त Werner Herzog खुद चौंक गए थे. इसकी पांच बड़ी बातें हम आपको बता रहे हैं.

हम सब सोचते हैं कि Antarctica = बर्फ और सिर्फ बर्फ, और शायद कुछ लोग जो पेंगुइन के साथ हंसते-खेलते रहते हों. लेकिन हर्जोग जब वहां बने McMurdo Station पहुंचे, तो उनका मानो दिमाग ही घूम गया.

McMurdo Station, Antarctica का सबसे बड़ा साइंटिफिक बेस, अमेरिका ने 1955–56 में बनाया था. Herzog को इसे देखकर ऐसा लगा जैसे कोई बदसूरत शहर. जहां भारी-भरकम मशीनें, खनन का काम और तेज शोर मचाने वाले ट्रक हर जगह घूम रहे थे.

यहां जिम और ATM मशीन देखकर फिल्ममेकर हिल गए थे. उनका मानना था कि, इंसान जब भी सबसे पहले चांद या मंगल पर रुकने की जगह बनाएगा तो वो मैकमर्डो स्टेशन के जैसा ही दिखेगा.

100 साल में गेम पलट गया

डॉक्यूमेंट्री में आगे Terra Nova Expedition (1910–1913) करने वाले Robert Falcon Scott और Ernest Shackleton का जिक्र है. ये वे लोग थे जो सबसे पहले अंटार्कटिका गए थे. उस वक्त हालात आज के मुकाबले कई गुना ज्यादा क्रूर थे.

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स्कॉट की पूरी टीम यहीं बर्फ में दफन हो गई थी. वहीं शैकलटन किसी तरह अपनी टीम को बचाने में कामयाब हुए थे. उनके इस सर्वाइवल पर फिल्म भी बनी. लेकिन 2006 यानी करीब 100 साल बाद जब डॉक्यूमेंट्री शूट हुई तब वहां मौजूद एक शोधकर्ता गर्व से अपने गर्म कैबिन जो दिखाता है, जिसपर बाहर की जानलेवा ठंड का असर नहीं.

यानि वही जगह, जहां कभी इंसान जिंदा नहीं बच पा रहा था, अब वहां इंसान आराम से खड़ा होकर अपनी सो कॉल्ड तरक्की दिखा रहा है.

डॉक्यूमेंट्री में आगे जिक्र आता है Iceberg B-15 का.

साल 2000 में यह अंटार्कटिका की Ross Ice Shelf से टूटकर अलग हुआ था. आकार ऐसा कि दिल्ली से कई गुना बड़ा- नक्शे पर देखो तो दिमाग ठहर जाए. इसने पेंगुइन और सील जैसे जीवों के खाने तक पहुंचने के रास्तों पर भी असर डाला था.

वैज्ञानिक बताते हैं, अगर इस हिमखंड की पूरी बर्फ एक साथ पिघल जाती, तो उसमें इतना पानी होता जितना नील नदी 75 साल में बहाती है. यानि ये कोई साधारण बर्फ का टुकड़ा नहीं था, बल्कि अंटार्कटिका की ताकत की झलक भर था. हालांकि, बाद में B-15 टूटकर कई छोटे टुकड़ों में बंट गया, 2005 के बाद इसके टुकड़े धीरे-धीरे पिघलते और बिखरते चले गए.

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Ashrita furman और पोगो स्टिक

डॉक्यूमेंट्री में हर्जोग एक बड़ी सीख भी छोड़ते हैं. वह दिखाते हैं कि 'सबसे पहले' कुछ करने की दौड़ कैसे पृथ्वी के किसी भी कोने को-चाहे वह अंटार्कटिका हो या माउंट एवरेस्ट, कभी शांत नहीं रहने देती.

इसी कड़ी में आगे अश्रिता फरमान का जिक्र आता है. दुनिया में सबसे ज्यादा Guinness World Records (600+) उनके नाम हैं. रिकॉर्ड बनाने की यही सनक उन्हें अंटार्कटिका तक ले गई, जहां उन्होंने pogo stick पर कूदते हुए अपना नाम दर्ज कराया. हर्जोग इस दृश्य को उपलब्धि की तरह नहीं, बल्कि एक सवाल की तरह रखते हैं- कि इंसान आखिर हर जगह कुछ साबित करने में क्यों लगा रहता है.

चलिए, अब ज्ञान का गियर थोड़ा डाउन. सीधे मुद्दे पर आते हैं.

अंटार्कटिका में मैकमर्डो स्टेशन से थोड़ी दूर है केप रॉय. यहीं बसी है पेंगुइन की कॉलोनी.

इसी जगह फिल्ममेकर हर्जोग की मुलाकात होती है डेविड एनली से. डेविड कोई टूरिस्ट नहीं, पूरे 20 साल से पेंगुइन स्टडी कर रहे एक्सपर्ट हैं.

डेविड बताते हैं कि 2006 के उस वक्त मादा पेंगुइन अंडे देकर खाना ढूंढने समुद्र की तरफ निकल जाती हैं. पीछे रह जाते हैं नर पेंगुइन.

अब उनका काम क्या है? करीब दो महीने तक अंडों पर बैठे रहना. ठंड, भूख, बर्फीली हवा. सब झेलते हुए.

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जब मादा पेंगुइन वापस लौटती हैं, तब रोल बदलता है. अब नर पेंगुइन समुद्र की तरफ निकल जाते हैं, अपनी बारी के खाने के लिए.

एक जरूरी बात. ये सिस्टम हर पेंगुइन प्रजाति में नहीं होता. यहां जिनकी बात हो रही है, वो हैं Emperor Penguin. वही जो सबसे बड़े होते हैं और सबसे हार्डकोर भी. वैसे दुनिया में कुल 18 पेंगुइन प्रजातियां हैं.

फिल्ममेकर ने पूछा, 'क्या पेंगुइन भी गे हो सकते हैं?'
डेविड बोले, 'मैंने ऐसा कोई नहीं देखा, लेकिन यहां लव ट्रायंगल होता है—एक फीमेल और दो मेल पेंगुइन.'

खुलकर बात हो रही थी, तो डेविड पेंगुइन की थोड़ी 'वेश्यावृत्ति' की भी कहानी सुनाते हैं. फीमेल पेंगुइन को अपना घर बनाने के लिए पत्थर चाहिए, और कभी-कभी वो किसी अनजान पेंगुइन के साथ रिलेशन बनाकर उसका पत्थर चुरा लेती हैं.

फिर सवाल आता है, 'क्या कभी किसी पेंगुइन को पागल होते देखा है?'

डेविड कहते हैं, 'दीवार में सिर नहीं मारा किसी ने, लेकिन अपने रास्ते से भटक जरूर जाते हैं. और फिर ऐसे जगह पहुंच जाते हैं, जहां उन्हें नहीं होना चाहिए.'

और फिर आता है वो viral वीडियो, जिसकी चर्चा दुनियाभर में है. इसमें एक पेंगुइन.... ना तो समुद्र की तरफ जाता है, ना अपनी कॉलोनी में, सिर्फ अकेला पहाड़ों की तरफ चल देता है, जो उससे करीब 70 किलोमीटर दूर थे.

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डेविड बताते हैं, अगर उसे पकड़कर वापस लाया जाता, तो थोड़ी देर बाद वह फिर अकेला किसी दूसरे रास्ते पर निकल जाता. ऐसा ही दूसरा ‘भटका’ हुआ पेंगुइन भी मिलता है, जो अपनी कॉलोनी से करीब 80 किलोमीटर दूर पहुंच चुका था.

लेकिन यहां इंसानों के लिए साफ नियम है- पेंगुइन का रास्ता मत रोको, मत पकड़ो. मतलब, उसे बस जाने दो.

फिर यह अकेला पेंगुइन महाद्वीप के अंदरूनी हिस्से की तरफ चला जाता है- जहां निश्चित मौत लिखी थी. क्योंकि पेंगुइन के लिए जिंदा रहना मतलब है बाहरी आइस शेल्फ के आसपास रहना, जहां खाना और पानी मिलता रहे.

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