सिने अभिनेता अमिताभ बच्चन का एक फिल्मी संवाद है मूंछे हो तो नत्थूलाल जैसी. कभी गौर किया है कि हर शख्स किसी न किसी की तरह दिखता है या दिखने की कोशिश करता है.
बेचारे नत्थूलाल तो मोटी मूंछों वाले किरदार थे लेकिन लोग खुद को आकषर्क व्यक्तित्व के रूप में पेश करना चाहते हैं. हर जमाने में किसी न किसी व्यक्तित्व का क्रेज होता है लोग उनकी आइकोनिक छवि से प्रेरित होते हैं और उनका अनुसरण करते हैं.
भारतीय परिप्रेक्ष्य में बात करें तो लोग अपने अपने आइकन से उनके बालों की शैली, परिधान और रूपरेखा की नकल करते हैं. उनके जैसा दिखने की कोशिश करते हैं. 70 के दशक में अभिनेत्री साधना को रुपहले पर्दे पर देख युवतियां उनकी तरह के बालों को रखने लगी. तब से महिलाओं में बाल रखने की इस शैली का नाम साधना कट पड़ गया.
बालीवुड के शोमैन राजकपूर की मूछों की शैली तो आज भी देखने को मिलती है. वो पतली पतली मूछें तो आज भी पुरुषों में प्रचलित हैं. मनोविज्ञानी मधु प्रकाश के अनुसार, ‘एक दूसरे को देखकर हाव भाव बदलना आम बात है. लोग व्यवहार तक बदल डालते हैं. सिनेमा का प्रभाव आम जनों पर बहुत अधिक पड़ता है. वहीं बच्चे अपने साथियों और टीवी से काफी कुछ सीखते हैं.’