आज के समय में जब युवा नौकर की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं, ऐसे में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपना सपना पूरा करने के साथ हू दूसरों को भी रोजगार दे रहे हैं. ऐसी ही कहानी है राजस्थान के अलवर के रहने वाले मनीष कुमार सुनारी की, जिन्होंने हेलीकॉप्टर कंपनी की शुरुआत कर न सिर्फ देश के एविएशन सेक्टर में नई पहचान बनाई है बल्कि 80 लोगों को नौकरी भी दी है.
मनीष की यह सफलता उन युवाओं के लिए मिसाल है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं और उन्हें पूरा करने का जज्बा रखते हैं. इस समय वह 8 हेलिकॉप्टर और 2 प्लेन के मालिक हैं.
हमेशा से आसमान में उड़ना चाहते थे मनीष
बता दें कि मनीष कुमार सुनारी बचपन से ही आसमान में उड़ान भरने की चाह रखते थे. उन्हें गेलीकॉप्टर और विमानों में खास रुचि थी. पढ़ाई करते समय ही उन्होंने ये तय कर लिया था कि वह केवल नौकरी नहीं करेंगे बल्कि कुछ ऐसा करेंगे जिससे देश और सामाज को फायदा मिले. शुरुआत में उन्हें आर्थिक दिक्कतों, संसाधनों की कमी और अनुभव की कभी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी.
शुरू की हैलीकॉप्टर कंपनी
मनीष की कड़ी मेहनत और सही प्लानिंग ने उन्हें आगे बढ़ने में मदद की और खुद की हेलीकॉप्टर कंपनी की नींव रखी. उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ अपने सपनों को पूरा करने पर ध्यान दिया. उनके लिए शुरुआत में ये काम आसान नहीं था लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी. लाइसेंस, तकनीकी मंजूरी, निवेश और सुरक्षा मानकों को पूरा करना भी एक बड़ी चुनौती थी. लेकिन उन्होंने उस दौरान विशेषज्ञों की मदद ली और अपनी कंपनी को धीरे-धीरे मजबूत किया और लोगों के बीच पहुंचाया. आज के टाइम पर उनकी कंपनी हेलीकॉप्टर से जुड़ी सेवाएं दे रही हैं.
80 लोगों को मिला रोजगार
मनीष ने केवल अपने सपने को साकार किया है बल्कि लोगों के बीच कंपनी को भी पहुंचाया है. खास बात यह है कि उन्होंने करीब 80 लोगों को रोजगार भी दिया है. इनमें पायलट, इंजीनियर, टेक्नीशियन, ग्राउंड स्टाफ और ऑफिस स्टाफ शामिल है. मनीष का कहना है कि जब युवा खुद आगे बढ़ेगा तो, वह दूसरों को आगे बढ़ने का मौका देगा.
क्या मनीष की आगे की योजना?
मनीष कुमार सुनारी आने वाले समय में अपनी हेलीकॉप्टर कंपनी को और विस्तार देना चाहते हैं. उनका लक्ष्य है कि आने वाले सालों में और लोगों को रोजगार दिया जाए और भारत के एविएशन फील्ड में आत्मनिर्भर्ता को बढ़ावा मिले. वह चाहते हैं कि उनके कंपनी देश की जरूरतों के समय काम आए.