जल्द ही आप वैसे सेब खा सकेंगे, जिन्हें काटने के बाद उनका रंग भूरा नहीं होगा, वहीं आप विटामिन ‘ए’ से भरपूर सुपर केले का स्वाद भी चख सकेंगे. क्योंकि बहुत जल्द जेनेटिक इंजीनियरिंग से पैदा किए गए ‘स्मार्ट’ फल बाजारों में उपलब्ध होंगे. मूल भारतीय शोधकर्ता चिदानंद एन. कांचीस्वामी के अनुसार, गुणसूत्रों की सटीक एडिटिंग (हेरफेर) से फलों और फसलों को विदेशी जीन की मदद के बिना जेनेटिक रूप से बेहतर बनाने की संभावनाओं को मौका मिला है.
इटली के इंस्टीट्यूटो एगरेरियो सेन मिशेल में कार्यरत चिदानंद ने कहा, ‘अगर हम विदेशी जीन को नजरअंदाज करें, तो साधारण जेनेटिक मोडिफाइड फसलें ट्रांसजेनिक फसलों से कहीं ज्यादा प्राकृतिक होती हैं.’ उन्होंने कहा, ‘जेनेटिक रूप से संशोधित फलों और फसलों को समाज में ज्यादा स्वीकार्यता मिल सकती है, बजाय जीएमओ के, जो अब तक एकमात्र विकल्प था.’
चिदानंद ने कहा, ‘फलों में गुणसूत्र संशोधन सीआरआईएसपीआर और टीएएलईएन के आगमन के बाद संभव हो सका है. इनकी मदद से फलों के गुणसूत्रों के बारे में ज्यादा जानकारियां भी मिली हैं.’ उन्होंने कहा, ‘फलों और फसलों का जेनेटिक मोडिफिकेशन एक उदाहरण भर है. जीएमओ विधि की मदद से भविष्य में कई महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी खोज की जा सकती है.’
यह शोध जर्नल ‘ट्रेंड्स इन बॉयोटेक्नोलॉजी’ में प्रकाशित हुआ है.