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इस देश में स्ट्रीटलाइट का रंग क्यों कर दिया गया लाल? वजह जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे

डेनमार्क को मानवीय मूल्यों के मामले में एक आदर्श देश माना जाता है. हाल ही में सामने आई एक खबर ने दिखाया कि यह देश सिर्फ इंसानों ही नहीं, बल्कि चमगादड़ों जैसे जीवों का भी उतना ही ख्याल रखता है.

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लाइटिंग डिजाइन को इस तरह तैयार किया गया है कि जहां जानवर ज्यादा सक्रिय हैं (Representational Image: Pexels)
लाइटिंग डिजाइन को इस तरह तैयार किया गया है कि जहां जानवर ज्यादा सक्रिय हैं (Representational Image: Pexels)

डेनमार्क इन दिनों एक बेहद अनोखे प्रयोग को लेकर चर्चा में है. राजधानी कोपेनहेगन के पास ग्लाडसैक्‍से नामक इलाके में पारंपरिक सफेद स्ट्रीटलाइट्स की जगह लाल रोशनी वाले लैंप लगाए जा रहे हैं. पहली नजर में यह बदलाव छोटा लगता है, लेकिन इसके पीछे की वजह किसी को भी चौंका सकती है.यह रोशनी इंसानों के लिए नहीं, बल्कि चमगादड़ों के लिए बदली गई है.

ग्लाडसैक्‍से नगरपालिका के अनुसार, फ्रेडरिक्सबोर्गवेय क्षेत्र में चमगादड़ों की एक स्थायी कॉलोनी रहती है. इस इलाके में कृत्रिम रोशनी चमगादड़ों के उड़ने, खाने और रास्ता पहचानने में बाधा डालती थी. इसलिए सड़क की विशेष पट्टियों पर सफेद लाइट हटाकर लाल रंग की रोशनी लगाई गई है.

लाल प्रकाश की तरंगें लंबी होती हैं और शोध के अनुसार यह चमगादड़ों पर सबसे कम नकारात्मक प्रभाव डालती हैं. जबकि नीली, हरी या सफेद रोशनी उनके व्यवहार को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है.

जहां चमगादड़ रहते हैं, वहीं बदली गई स्ट्रीटलाइटें

अधिकारियों ने माना कि इलाके को पूरी तरह अंधेरा करना चमगादड़ों के लिए आदर्श होता, लेकिन सड़क सुरक्षा के कारण यह संभव नहीं था. ऐसे में 'कम नुकसान' वाला विकल्प लाल रोशनी ही बचा.

ट्रैफिक सुरक्षा भी बनी प्राथमिकता

सड़क के कुछ हिस्सों पर लाल रोशनी है, लेकिन चौराहों और क्रॉसिंग पर अभी भी गर्म सफेद रोशनी लगाई गई है. इन्हें ऊंचे पोलों पर रखा गया है ताकि ड्राइवरों और साइकिल चालकों को विजिबिलिटी में किसी तरह की दिक्कत न हो.

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लाइटिंग डिजाइन को इस तरह तैयार किया गया है कि जहां जानवर ज्यादा सक्रिय हैं वहां लाल रोशनी और जहां मानवीय गतिविधि अधिक है वहां सफेद रोशनी का इस्तेमाल हो.

लक्ष्य है इंसानों और प्रकृति का संतुलन

परियोजना से जुड़े रोड इंजीनियर जोनास योर्गेनसन का कहना है कि यह बदलाव सिर्फ बल्ब बदलने जैसा सरल कदम नहीं है. इसे बनाने में काफी अध्ययन और प्लानिंग लगी. इसका उद्देश्य था सड़क का इस्तेमाल भी जारी रहे और चमगादड़ों की प्राकृतिक गतिविधि भी प्रभावित न हो.परियोजना पर काम करने वाले डिजाइनर फिलिप जेलवर्ड के अनुसार, यह प्रयोग शहरी प्रकाश व्यवस्था के पारंपरिक तरीके को चुनौती देता है. लाल रोशनी एक तरह का प्रतीक भी है.यह बताती है कि यह इलाका पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील है.


छोटा प्रयोग, लेकिन दुनिया भर में दिलचस्पी

फिलहाल लाल स्ट्रीटलाइट्स का दायरा छोटा है और इसे बढ़ाने की कोई योजना नहीं है. लेकिन यूरोप और अमेरिका के कई शहरी योजनाकार इस मॉडल को उत्सुकता से देख रहे हैं.ऊर्जा बचत, प्रकाश प्रदूषण और जैव विविधता जैसे मुद्दों से जूझ रहे शहरों के लिए यह एक शांत लेकिन शक्तिशाली उदाहरण बन रहा है.यह प्रयोग यह दिखाता है कि कभी-कभी सड़कें सिर्फ रोशनी से नहीं, बल्कि सोच में बदलाव से भी सुरक्षित बनाई जा सकती हैं.

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