दुनियाभर में टेक्नोलॉजी तेजी से बदल रही है. अब कई ऐसे काम, जिन्हें पहले इंसान किया करते थे, मशीनें और रोबोट करने लगे हैं. चीन इस मामले में सबसे आगे माना जा रहा है. यहां अब ऐसी फैक्ट्रियां तैयार हो रही हैं, जहां इंसानों की जरूरत बहुत कम पड़ती है. इन्हें 'डार्क फैक्ट्री' कहा जाता है.
हर दिन दुनिया भर में करोड़ों सामान फैक्ट्रियों में तैयार किए जाते हैं. पहले इन फैक्ट्रियों में हजारों मजदूर काम करते थे, लेकिन अब चीन की कई कंपनियां ऐसे सिस्टम पर काम कर रही हैं, जहां ज्यादातर काम मशीनें खुद करती हैं. यही वजह है कि इन फैक्ट्रियों को लेकर पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है.
आखिर क्या होती है डार्क फैक्ट्री?
डार्क फैक्ट्री ऐसी फैक्ट्री होती है, जहां काम लगभग पूरी तरह मशीनों और रोबोट्स के जरिए किया जाता है. यहां इंसानों की मौजूदगी बहुत कम होती है. कई जगह तो रोशनी की भी ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि मशीनों को इंसानों की तरह देखने के लिए लाइट की जरूरत नहीं होती. इसी कारण इन्हें 'डार्क फैक्ट्री' कहा जाता है.
इन फैक्ट्रियों में रोबोट सामान बनाते हैं, पैकिंग करते हैं और एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का काम भी खुद करते हैं. इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से मशीनें सामान की क्वालिटी भी चेक करते हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन की बड़ी टेक कंपनी शियोमी की चांग पिंग फैक्ट्री में बिना किसी कर्मचारी के हर सेकंड एक स्मार्टफोन तैयार हो रहा है. यहां ज्यादातर काम पूरी तरह मशीनों और ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए किया जाता है. इसी तरह दुनिया की बड़ी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी फॉक्सकॉन ने भी कई फैक्ट्रियों में ऑटोमेशन बढ़ा दिया है. इसका असर नौकरियों पर भी पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ कुनशान इलाके में ही 60 हजार से ज्यादा नौकरियां खत्म हो गईं.
इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियां भी बढ़ा रहीं ऑटोमेशन
चीन की बड़ी इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी कंपनियां बीवाईडी और सीएटीएल भी अब अपने प्लांट्स में ज्यादा से ज्यादा रोबोट और मशीनों का इस्तेमाल कर रही हैं. इन कंपनियों का मकसद कम समय में ज्यादा प्रोडक्शन करना है. फैक्ट्रियों में अब रोबोट सामान बनाने, पैकिंग करने और जांच करने जैसे काम तेजी से कर रहे हैं.
लाखों नौकरियों पर पड़ा असर
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में फैक्ट्री मजदूरों की संख्या तेजी से कम हुई है. साल 2013 में जहां करीब 11.5 करोड़ लोग फैक्ट्रियों में काम करते थे, वहीं 2025 तक यह संख्या घटकर 8.5 करोड़ से भी कम रह गई. यानि करीब 3 करोड़ से ज्यादा नौकरियां कम हो चुकी हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि इसका सबसे बड़ा कारण ऑटोमेशन और रोबोट्स का बढ़ता इस्तेमाल है.
दुनिया में सबसे ज्यादा रोबोट चीन में
इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रोबोटिक्स की रिपोर्ट के अनुसार, चीन अब दुनिया का सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल रोबोट मार्केट बन चुका है. साल 2024 में चीन में 20 लाख से ज्यादा फैक्ट्री रोबोट मौजूद थे. यह दुनिया की कुल मांग का 54 फीसदी हिस्सा था. वहीं चीन में हर 10 हजार मजदूरों पर करीब 392 रोबोट काम कर रहे हैं, जबकि दुनिया का औसत सिर्फ 141 है.
तेजी से बदल रही है फैक्ट्री की दुनिया
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में दुनिया की ज्यादातर फैक्ट्रियां इसी तरह हाई-टेक और ऑटोमेटेड हो सकती हैं. इससे प्रोडक्शन तेज होगा, लेकिन लोगों को नई तकनीक सीखने की जरूरत भी बढ़ेगी. चीन का यह मॉडल अब पूरी दुनिया के लिए चर्चा का विषय बन चुका है.
24 घंटे लगातार चलता है काम
सामान्य फैक्ट्रियों में मजदूरों को आराम और शिफ्ट की जरूरत होती है, लेकिन डार्क फैक्ट्री में मशीनें 24 घंटे लगातार काम कर सकती हैं. चीन की कई फैक्ट्रियां साल के 365 दिन बिना रुके काम कर रही है. इससे कंपनियों का प्रोडक्शन तेजी से बढ़ता है और कम समय में ज्यादा सामान तैयार हो जाता है. साथ ही इंसानी गलती की संभावना भी कम हो जाती है.
क्यों बढ़ रहा है यह ट्रेंड?
विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन में मजदूरों की लागत लगातार बढ़ रही है. ऐसे में कंपनियां खर्च कम करने के लिए ऑटोमेशन और रोबोट्स का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं. इसके अलावा टेक्नोलॉजी में तेजी से हो रही प्रगति भी इसका बड़ा कारण है. AI, स्मार्ट मशीनें और ऑटोमेटेड सिस्टम अब पहले से ज्यादा तेज और सटीक तरीके से काम कर रहे हैं. चीन की सरकार भी हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे रही है ताकि देश दुनिया का सबसे बड़ा टेक्नोलॉजी हब बन सके.
किन चीजों का होता है प्रोडक्शन?
डार्क फैक्ट्रियों में मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक सामान, कारों के पार्ट्स और कई हाई-टेक प्रोडक्ट बनाए जाते हैं. कुछ फैक्ट्रियों में तो पूरा प्रोडक्शन सिस्टम मशीनों से कंट्रोल होता है. रोबोटिक आर्म्स सामान जोड़ने, पैकिंग करने और जांच करने जैसे काम करते हैं. वहीं AI सिस्टम हर चीज पर नजर रखता है.
क्या लोगों की नौकरियां खतरे में हैं?
डार्क फैक्ट्री को लेकर सबसे बड़ी चिंता नौकरियों को लेकर जताई जा रही है. कई विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर मशीनें इंसानों का काम करने लगेंगी, तो मजदूरों की जरूरत कम हो सकती है. हालांकि, कुछ लोग यह भी मानते हैं कि नई टेक्नोलॉजी के साथ नए तरह की नौकरियां भी पैदा होंगी. मशीनों को चलाने, प्रोग्राम करने और उनकी निगरानी के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की जरूरत बढ़ सकती है.