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सुपर चोर बंटी अपने काम पर निकला, बचके रहिएगा!

वो फिर लौट आया है. साल भर की खामोशी के बाद. साल भर पुराना वादा तोड़ कर. चोरों की दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे शातिर चोर जिसके नाम भर से दिल्ली पुलिस और दिल्ली वालों की नींद उड़ जाती थी, वो फिर से अपने पुराने काम पर लौट आया है. अब चूंकि वो लौट आया है लिहाजा हमारी आपसे बस यही गुजारिश है कि होशियार रहिएगा.

सुपर चोर बंटी सुपर चोर बंटी

वो फिर लौट आया है. साल भर की खामोशी के बाद. साल भर पुराना वादा तोड़ कर. चोरों की दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे शातिर चोर जिसके नाम भर से दिल्ली पुलिस और दिल्ली वालों की नींद उड़ जाती थी, वो फिर से अपने पुराने काम पर लौट आया है. अब चूंकि वो लौट आया है लिहाजा हमारी आपसे बस यही गुजारिश है कि होशियार रहिएगा.

जी हां, नटवर से भी बड़ा नटवरलाल. चोरी की दुनिया का सबसे शातिर चोर. एक ऐसा सुपर चोर जिसका नाम भर सुनते ही लोगों की नींदें उड़ जाया करती हैं. जिसकी मौजूदगी का अहसास भर पुलिसवालों की चैन लूट लेती है. दिल्ली की गलियों से लेकर मुंबई के बॉलीवुड तक जिसके नाम का शोर है. जो बिग बॉस के घर तक में घुस गया. वही उस्ताद बंटी चोर फिर से काम पर लग गया है. और उसका काम है चोरी.

करीब साल भर पहले जेल से आजाद होने के बाद बंटी ने बाकायदा कैमरे पर वादा किया था. वादा सुधरने का. वादा चोरी छोड़ देने का. वादा एक बेहतर इंसान बनने का.

पर बंटी साल भर भी अपना वादा नहीं निभा सका. और ये एक जौहरी की दुकान में घुस गया. और अपना काम कर गया.

ये वही बंटी चोर है जिसके नाम चोरी के ना जाने कितने रिकार्ड दर्ज हैं. ये वही बंटी है जिसके पास कभी आलीशान गाडियां होती थीं. कभी बंटी के पास बेशुमार पैसा हुआ करता था. दौलत उसके कदमों में हुआ करती थी. जब वो पकड़ा जाता तो अखबारों की सुर्खियां बनतीं. जब जेल जाता तो पुलिस को एलानिया चुनौती देकर जाता कि मैं वापस लौटकर आऊंगा.

और सचमुच पांच-पांच बार बंटी पुलिस हिरासत से भाग चुका है. हथकड़ी खोलने में बंटी माहिर था. 2004 में बंटी को जब आखिरी बार पकड़ा गया था तब उसके लिए अमेरिका से खास हथकड़ी मंगाई गई थी. जेल में रखने के लिए ख़ास इंतज़ाम किए गए थे. यहां तक कि वो भाग ना जाए इसीलिए उसे आतंकवादियों के लिए बनी सेल में रखा गया था.

2010 में बिग बॉस के घर से बाहर निकलने के बाद बंटी अचानक गायब हो गया था. और अब पहली बार वो नजर आया तो सीसीटीवी कैमरे में. आखिर क्या है इस सीसीटीवी कैमरे का राज़? क्या कर रह है यहां इस वक्त बंटी? और क्या लेकर आया है वो अपने साथ इस दुकान में? तो पेश है सुपर चोर बंटी की सबसे नई कारस्तानी.

2010 में उसने कैमरे पर वादा किया था कि अब वो चोरी छोड़ देगा. यहां तक कि जब वो बिग बॉस के घर के अंदर जा रहा था तब उसने सलमान खान तक को टोक दिया था कि वो उसे चोर कह कर ना बुलाएं. पर वही बंटी साल भर की खामोशी के बाद अचानक अपने पुराने रूप में लौट आया है. उसका ये रूप शायद ही इतनी जल्दी सामने आता..पर सीसीटीवी कैमरे ने उसे पकड़ लिया.

बंटी ने नए साल में पुराना काम शुरू कर दिया. 9 जनवरी, दोपहर के 12 बजकर 38 मिनट, अनुपम ज्वैलर्स, पलवल, फ़रीदाबाद.

टोपी पहने एक शख्स इस शोरूम में आता है. पर अंदर काउंटर पर तब कोई नहीं था. लिहाजा वो थोड़ी देर शोरूम में ही टहलता है और फिर बाहर निकल जाता है.

कुछ देर बाद जैसे ही शोरूम का मालिक काउंटर पर आकर बैठता है टोपी पहने वही शख्स दोबारा अंदर आता है. इस बार उसके हाथ में एक बैग होता है. अब वो काउंटर पर ही बैग खोलता है और अंदर से एक-एक कर सामान बाहर निकालता जाता है.

बैग में चांदी के प्लेट और सोने के जेवरात थे. दुकानदार जेवरात देखता जाता है और बीच-बीच में उस नौजवान को भी... जो जेवर लेकर यहां आया था.

दरअसल टोपी पहने नौजवान इस दुकान में जेवर बेचने आया था. और इस वक्त वही जेवर वो दुकानदार को दिखा रहा है. शायद सौदा पट भी जाता. पर एक गड़बड़ हो गई.

दुकानदार ने जब ध्यान से टोपी पहने शख्स का चेहरा देखा तो उसे वो चेहरा जाना-पहचाना लगा. फिर उसने दिमाग पर ज़ोर दिया तो वो उसे फौरन पहचान गया. उसने उसे टीवी पर खबरों में और बिग बॉस के घर में देखा था. ये कोई और नहीं सुपरचोर बंटी ही था.

बंटी को पहचानते ही दुकानदार को सारा माजरा समझ में आ गया. पर बंटी भी सुपर चोर था. उसे भी समझने में देर नहीं लगी कि दुकानदार उसे पहचान गया है. लिहाजा उसने फौरन अपना सारा माल वापस बैग में समेटा और ये कह कर वहां से निकल भागा कि वो दिल्ली में इसे बेचेगा.

पर बंटी के जाते ही दुकानदार ने फौरन पुलिस को इसकी इत्तिला दे दी. पुलिस को ये भी बता दिया कि वो कार में दिल्ली की तरफ गया है. दुकानदार ने कार का नंबर भी नोट कर लिया था. खबर मिलते ही फरीदाबाद पुलिस ने उसे पकडने के लिए दिल्ली-फरीदाबाद हाईवे पर नाकेबंदी कर दी.

इसके बाद जैसे ही उसी नंबर की कार पुलिस के नाके पर पहुंची तो पुलिस ने उसे रुकने का इशारा किया. पर बंटी रुकने की बजाए अपनी कार वापस मोड़ कर दूसरी तरफ भाग निकला. उसे भागता देख पुलिसवालों ने कार की तरफ डंडा भी फेंका जिससे कार का पिछला शीशा तो टूट गया पर बंटी भाग निकला.

पर आगे जाकर बंटी ने एक बुग्गी को टक्कर मार दी जिससे गाडी का टायर फट गया. इसके बाद वो गाड़ी को एक गली में भगा ले गया और वहीं गाड़ी छोड़ खुद भाग गया. बाद में कार की जांच करने पर पता चला कि ये कार 9 जनवरी की सुबह ही दिल्ली के न्यू फ्रैंड्स कलोनी से चुराई गई थी.

कार की तलाशी लेने पर पुलिस को गाडी में से दो वीआइपी नंबर प्लेट, पुलिस का स्टिकर, चाभियों का गुच्छा, विदेशी महंगी वाइन, सिगरेट के पैकेट और कुछ कागजात मिले.

बंटी के काम करने का तरीका बिल्कुल यही है. वो जिस घर में चोरी करता चोरी का माल उसी घऱ की गाड़ी में रख कर ले जाता. यानी साफ है कि पुराना सुपरचोर बंटी एक बार फिर लौट आया है.

किसी शायर ने शायद ये बंटी के लिये ही कहा है कि बदनाम हुए तो क्या हुआ, नाम तो हुआ? जी हां. बंटी की बदनामी में ही छुपा है उसके मशहूर होने का राज़. जिसे उसने कमाया..चोरी करने के अपने खास अंदाज से. शायद यही वजह है कि दर्जनों बार उसके हाथों चकमा खा चुकी पुलिस भी उससे हमदर्दी रखती है.

चोरी के काम में इतना नाम कमाने का मौका यकीनन आज से पहले किसी चोर को नहीं मिला. लेकिन जैसा कि कहते हैं इस दुनिया में बिना मेहनत कुछ भी हासिल नहीं होता, बंटी ने भी चोरी की कला में महारत हासिल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. एक वक्त में दिल्ली पुलिस के दक्षिणी जिले का लगभग हर पुलिस वाला बंटी के पीछे था. इसके बावजूद बंटी लगातार पुलिस को चकमा देता रहा. लेकिन उसकी फरारी के दौरान हुई तफ्तीश से पुलिस को इतना फायदा जरूर हुआ कि वो उसके काम करने के तौर-तरीके को बारीकी से समझ पाई.

चोरी के पेशे में बंटी की कामयाबी का राज दरअसल उसके खुद पर भरोसे पर टिका था. बंटी ने अपने काम में कभी किसी दूसरे को शरीक नहीं किया. चोरी की सारी वारदातें वो अकेले ही अंजाम देता था और वो भी इतने यकीन के साथ कि खुद लुटने वाले को अपने लुट जाने का पता नहीं चल पाता था.

मिसाल के तौर पर बंटी जब एक घर में चोरी के लिए पहुंचा तो सबसे पहले उसका सामना घर के चौकीदार से हुआ. इससे पहले की चौकीदार उसे रोक कर कुछ पूछताछ करता, उसने घर के मालिक का हवाला दे कर चौकीदार पर कुछ ऐसा रौब गांठा उसकी सिट्टी पिट्टी गुम हो गई. इसके बाद बंटी बड़े आराम से घर में घुसा और वहां से गाड़ी की चाबी और लैपटॉप लेकर बाहर निकल आया. बंटी ने चौकीदार से उसके मालिक के कहने पर ही एयरपोर्ट जाने की बात कही और उसकी आंखों के सामने गाड़ी और लैपटॉप चुरा कर गुम हो गया. मज़ेदार बात ये रही कि चौकीदार बंटी की बातों में कुछ ऐसा आया कि जाते-जाते उसने बंटी को सलाम भी ठोंक दिया.

दरअसल बंटी ने एक के बाद एक चोरी की वारदातें कर दिल्ली पुलिस को इतना परेशान किया कि पुलिसवालों और फोरेंसिक एक्सपर्टस की टीम ने उसके काम करने के तरीके पर बाकायदा रिसर्च कर डाली. इसके बाद पुरानी और नई चोरियों का मिलान किया गया जिससे उसके हाथों हुई चोरियों का एक खास पैटर्न सामने आ गया. चोरी की ये सभी वारदातें एक दूसरे से हूबहू मेल खाती थीं.

और बंटी सुपरचोर के पैटर्न की कुछ खास बातें ये रहीं...

1. बंटी सभी चोरियां रात दो बजे से लेकर सुबह छह बजे के बीच ही करता था.
2. बंटी चोरी से पहले मकान में दाखिल होने के लिये दरवाजे या खिड़की की ग्रिल को एक लम्बे पेचकस और लीवर की मदद से खोलता था. इसके अलावा उसने कभी किसी और औजार का इस्तेमाल नहीं किया.
3. बंटी हमेशा लग्जरी कार, ज्वैलरी, क्ट्लरी, विदेशी घड़ियां और एन्टीक फर्नीचर जैसी बेहद कीमती चीजों पर ही हाथ साफ करता था. चोरी गये सामान में कभी कोई मामूली चीज शामिल नहीं होती. बंटी का रिकॉर्ड देखकर मालूम होता था जैसे आम चीजें चुराना वो अपनी शान के खिलाफ समझता हो.
4. बंटी ने चुराने से पहले आज तक किसी भी कार का लॉक तोड़ा नहीं. कार खोलने के लिये वो हमेशा कार मालिक के घर से चुराई गई चाबी का इस्तेमाल ही करता था.
5. बंटी के बारे में एक और दिलचस्प बात थी. चोरी करने वो हमेशा कार पर सवार होकर जाता था. और पुरानी कार मौके पर छोड़ वो मौके पर मिली नई कार में फरार हो जाता था.

यकीनन चोरी का ये अंदाज एक ही चोर का हो सकता था. और अपने पुराने तजुर्बे के बल पर ऐसी किसी भी चोरी के सामने आते ही दिल्ली पुलिस के दिमाग में बंटी की घंटी बज उठती. इसीलिये बंटी का पकड़ा जाना पहली और दूसरी बार के मुकाबले तीसरी बार शायद उतना मुश्किल नहीं रहा. और एक कामयाब चोर का चोरी का कामयाब तरीका उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन गया. कहने को वो एक चोर है लेकिन अपने इस पेशे में उसने वो मकाम हासिल किया है जिस तक पहुंचना किसी मामूली चोर तो क्या अच्छे अच्छों के लिये भी मुश्किल है.

आंखों से काजल चुराने में महारथ हासिल कर चुके बंटी चोर का नाम उन लोगों की फेहरिस्त में शुमार हो चुका है, जिनकी जिंदगी को बाकायदा फिल्मी पर्दे पर उतारा गया.

ख्वाब और हकीकत. इंसानी जिंदगी के ये दो बिलकुल अलग पहलू हैं. ख्वाब देखने पर इस दुनिया में कोई पाबंदी नहीं है लेकिन हकीकत पर नजर रख कर चलना जरूरी है. पीढ़ी दर पीढ़ी बड़े बूढ़े यही नसीहत देते आए हैं. पर बंटी को ये नसीहत देने वाला शायद कोई नहीं था. इसीलिये बंटी ने जो ख्वाब देखे उन्हें सच कर दिखाना अपनी आदत बना ली. फिर बात चाहे कीमती गाड़ियां और हीरे-जवाहरात चुराने की हो या फिर फिल्मी पर्दे पर आने का जुनून.

ये ख्वाब बंटी ने देखा और सच भी कर दिखाया. जी हां, बंटी के किरदार पर आधारित बाकायदा एक फिल्म बन चुकी है. नाम है "ओय लकी, लकी ओय". इस फिल्म में बंटी का किरदार एक्टर अभय देओल ने निभाया है. और फिल्म बनाई है खोसला का घोसला जैसी हिट फिल्म दे चुके फिल्म-मेकर दिबाकर बैनर्जी ने.

बंटी का किरदार उन्हें सचमुच इतना भा गया था कि फिल्म की कहानी बंटी के ही इर्द गिर्द घूमती है. फिल्म के कई प्लॉट सीधे सुपर चोर बंटी की असल जिंदगी से उठाए गये हैं. वैसे दिबाकर अपनी फिल्म में असली बंटी को लेना चाहते थे. मगर चूंकि बंटी जेल के अंदर था लिहाजा शूटिंग के लिये उसकी डेट्स मिलने का सवाल ही नहीं उठता था.

असल में दिबाकर ने उसका किरदार फिल्म में लेने से पहले सुपर चोर बंटी पर खासी रिसर्च की. इसके लिये उन्होंने दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बैंगलोर, अहमदाबाद, चंडीगढ़ और लुधियाना समेत हिंदुस्तान के तकरीबन हर बड़े शहर में मौजूद बंटी का पुलिस रिकॉर्ड खंगाला. इनमें 500 से ज्यादा चोरी की वारदातें शामिल थीं. बिलकुल किसी फिल्मी चोर की तर्ज पर.

मगर बंटी पर रिसर्च के बाद दिबाकर ये समझ गये कि बंटी अपने हाथ की सफाई से ज्यादा जाना जाता है अपने खास अंदाज के लिये. वो अंदाज जिसकी वजह से उससे एक बार मिलने वाला उसे जिंदगी भर नहीं भूलता. क्योंकि बंटी की बातों में वो जादू है जिसके बूते उसके हाथों लुटने वाला लुट भी जाता है और उसको पता भी नहीं चलता.

जी हां, बंटी की इस अदा से आम लोग तो क्या खुद पुलिस भी अछूती नहीं रही है. पुलिसवालों को धोखा देकर भागना बंटी के बांए हाथ का खेल है. सुपर चोर बंटी ने ऐसा कई मौकों पर कर दिखाया है. कभी पुलिस हिरासत में कांच के टुकड़े खा कर तो कभी सीरिंज की मदद से अपनी हथकड़ियां खोल कर. पिछले दस सालों में बंटी कई बार पकड़ा गया लेकिन वो हर बार पुलिस को चकमा देकर भाग निकलने में कामयाब रहा.

बंटी को आखिरी बार दिल्ली पुलिस ने अप्रैल 2007 में गिरफ्तार किया था. जिसके बाद से ही वो दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद था. मगर जेल में रहते हुए भी बंटी ने ख्वाब देखना बंद नहीं किया. वो तब भी दावे के साथ कहता रहा कि जेल की सलाखें उसे ज्यादा दिन तक रोक नहीं पाएंगी. और आखिरकार वही हुआ. हालांकि इस बार उसे जेल या पुलिस हिरासत से भागने की जरूरत नहीं पड़ी. उल्टा अदालत ने ही उसे उसके इल्जामों से बरी कर दिया.

बॉलीवुड के इस सुपर चोर ने बॉक्स ऑफिस पर खूब धमाल मचाया. फिल्म ओए लकी लकी ओए चल निकली. सुपर चोर हिट हो गया. परदे का ये बंटी असल में भी सुपर चोर बंटी ही है. फिल्म इसी सुपर चोर पर बनी थी. वो दिल्ली के लिए दहशत था. पुलिस उसकी हरकतों से हैरान-परेशान थी. वो हर चोरी अकेले करता था. उसकी नज़र हमेशा से लग्जरी कार, जुलरी, क्ट्लरी, विदेशी घड़ियां और एन्टीक फर्नीचर पर होती थी. छोटी चीजें चुराना वो अपनी शान के खिलाफ समझता था.

लेकिन 2010 में 3 साल की सज़ा काटने के बाद बंटी जब जेल से बाहर निकला तब सिर छुपाने के लिए इसके पास एक अदद छत भी नहीं थी. कभी करोड़ों की गाड़ियों में सफर करने वाला ये शातिर चोर एक छत के लिए मोहताज़ हो गया.

जेल से निकलने के बाद बंटी ने खुद कहा था कि मुझे पहले घर वालों ने बगैर कुछ दिए निकाल दिया, अब मैं जब जेल से छूट कर आया हूं, कोई मुझे रखने को तैयार नहीं है.

कभी ये शातिर चोर बड़े बड़े होटलों में रुकता था. पर 10 जून 2010 को वो सज़ा काटकर जब तिहाड़ जेल से बाहर आया तो पहले भाई के पास गया लेकिन भाई ने अपने बदनाम भाई से कोई भी रिश्ता रखने से मना कर दिया. हार कर वो लोधी कॉलोंनी एसएचओ राजेंद्र सिंह के पास पहुंचा. ये वही पुलिस अफसर हैं जिन्होंने बंटी को सलाखों के पीछे पहुंचाया था.

राजेंद्र सिंह ने ही बंटी को कपड़े दिलवाए और उसके दो वक्त के खाने का भरोसा दिलाया. हालात से परेशान बंटी पूरी तरह से टूट गया था. जिस गर्लफैंड के साथ उसने जीने मरने की कसमें खाई थी, उसने बंटी के जेल में जाने के बाद किसी और से शादी कर ली. लेकिन बंटी की यादों में वो तब भी बसी थी.

बंटी ने कहा था कि मेरी गर्लफ्रेंड ने जेल में जाने के बाद शादी कर ली, मैं तो तभी शादी करुंगा जब कुछ काम धंधा जम जाएगा.

शायद बंटी का बीता हुआ कल उसके आगे आकर खड़ा हो गया था. और इसीलिए वो वापस फिर से उसी रास्ते पर चल पड़ा है. या फिर बंटी को कभी सुधरना ही नहीं था.

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