केंद्र सरकार ने सोमवार को 2006 में 4000 करोड़ रुपये के एयरसेल-मैक्सिस सौदे को मंजूरी देने में और खासकर फैसले लेने में तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम की भूमिका में किसी भी तरह की गड़बड़ी होने से इंकार किया.
केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने दोनों ही सदनों में इस सम्बंध में बयान दिया. इसमें निवेश के लिए आवेदन की तिथि और विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) द्वारा मंजूरी की तिथि बताई गई. उन्होंने कहा कि दो अलग-अलग प्रस्तावों पर साधारण रूप में बिना देरी के विचार किया गया.
मुखर्जी ने कहा, 'गलतफहमी और गलत व्याख्या की कोई गुंजाइश नहीं है. दोनों ही मामलों में मंजूरी देने में कोई देरी नहीं की गई.'
पुत्र कार्ति की कथित भूमिका के कारण विपक्षियों के निशाने पर रहे चिदम्बरम ने खुद भी अपने किसी भी पारिवारिक सदस्य या स्वयं की अवैध गतिविधियों में शामिल रहने से इंकार किया और कहा कि वित्त मंत्रालय संदिग्ध कम्पनी 'एडवांटेज स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग' की जांच कर सकता है.
राज्य सभा में मुद्दा उठाते हुए सदन में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने एयरसेल-मैक्सिस को एफआईपीबी की मंजूरी और ऑसब्रिज को धन के हस्तांतरण का जिक्र किया. चिदम्बरम के पुत्र पहले ऑसब्रिज के मालिकों में शामिल थे.
जेटली ने कहा कि ऑसब्रिज होल्डिंग्स एंड इनवेस्टमेंट और एयरसेल-मैक्सिस में निवेश करने वाली एडवांटेज स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग के ई-मेल और वेब पता 2006 में समान थे.
विपक्ष ने आरोप लगाया कि 2006 में दूरसंचार कारोबार के लिए एयरसेल के आवेदन को एफआईपीबी द्वारा मंजूरी दिए जाने से पहले केंद्रीय गृह मंत्री के पुत्र की कम्पनी में पैसे स्थानांतरित किए गए थे.
एयरसेल और किसी भी अन्य दूरसंचार कम्पनी से अपने या अपने परिवार का सम्बंध होने से इंकार करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम ने सोमवार को कहा, 'मेरी ईमानदारी पर सवाल खड़े करने से बेहतर है कि मेरे हृदय में खंजर घोंप दीजिए.'
जेटली ने कहा कि एयरसेल में हिस्सेदारी खरीदने वाली मलेशिया की कम्पनी मैक्सिस ने मलेशियन स्टॉक एक्सचेंज को सूचित किया था कि उसने एयरसेल में 99 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी खरीदी है.
लेकिन भारतीय नीति दूरसंचार कम्पनियों में 74 फीसदी से अधिक विदेशी निवेश की इजाजत नहीं देती है. पैसे कथित तौर पर एयरसेल प्रमुख सी. शिवशंकरण ने एयरसेल-मैक्सिस सौदे को एफआईसीबी मंजूरी की पूर्व संध्या पर हस्तांतरित किए थे.
गृह मंत्री ने हालांकि कहा कि मलेशिया की कम्पनी ने यदि किसी देश को गलत सूचना दी थी, तो वित्त मंत्रालय इसकी तहकीकात कर सकता है. लेकिन एफआईपीबी ने 2006 में 74 फीसदी से कम हिस्सेदारी के लिए मंजूरी दी थी.
पिछले महीने जनता पार्टी के प्रमुख सुब्रह्मण्यम स्वामी ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन वित्त मंत्री ने तब तक सौदे को एफआईपीबी मंजूरी लटका कर रखी, जब तक उनके पुत्र ने कम्पनी में पांच फीसदी हिस्सेदारी नहीं ले ली.
एयरसेल के 6.2 करोड़ से अधिक ग्राहक हैं और यह तमिलनाडु, असम, पूर्वोत्तर तथा चेन्नई में काफी लोकप्रिय है.