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जेल से छूटे राजा, पर नहीं जा सकेंगे तमिलनाडु

2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले के मुख्य आरोपी पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा को 15 माह जेल में बिताने के बाद मंगलवार को जमानत मिल गई. केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने उन्हें जमानत दी, लेकिन यह पाबंदी भी लगाई कि वह बिना अनुमति दूरसंचार विभाग और अपने गृह राज्य तमिलनाडु नहीं जाएंगे.

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ए राजा
ए राजा

2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले के मुख्य आरोपी पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा को 15 माह जेल में बिताने के बाद मंगलवार को जमानत मिल गई. केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने उन्हें जमानत दी, लेकिन यह पाबंदी भी लगाई कि वह बिना अनुमति दूरसंचार विभाग और अपने गृह राज्य तमिलनाडु नहीं जाएंगे.

2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले के 14 आरोपियों में राजा ही अब तक जेल में बंद थे, अन्य 13 आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी थी. राजा फरवरी, 2011 से ही तिहाड़ जेल में थे. इस मामले में तीन कम्पनियों को भी आरोपी बनाया गया है.

सीबीआई की विशेष अदालत के न्यायाधीश ओ. पी. सैनी ने राजा की जमानत याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा, 'सुनवाई की प्रगति, आरोपी की हिरासत अवधि और अन्य आरोपियों की जमानत पर रिहाई को देखते हुए मेरा विचार है कि आरोपी को हिरासत में रखने से और कोई उद्देश्य पूरा नहीं होगा और इन्हीं कारणों से मैं आवेदक (राजा) को जमानत देने के पक्ष में हूं.'

न्यायाधीश ने यह भी निर्देश दिया कि राजा अदालत की पूर्व अनुमति के बगैर दूरसंचार विभाग या तमिलनाडु नहीं जा सकेंगे. राजा को जमानत मिलने के बाद अदालत में मौजूद उनकी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के समर्थकों ने नारेबाजी की.

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डीएमके ने यह भी भरोसा जताया कि राजा इस मामले में बेदाग साबित होंगे. डीएमके के प्रवक्ता टी. के. एस. एलनगोवन ने कहा, 'हम खुश हैं. जमानत मिलना कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है. हमें विश्वास है कि पूरे मामले में राजा बेदाग होकर बाहर आएंगे.'

अदालत का फैसला आने के बाद राजा के वकील ने कहा कि न्यायाधीश ने राजा से कहा, 'आपका आवेदन मंजूर किया जाता है.' उन्होंने कहा, 'राजा ने 13 लोगों को जमानत दिए जाने तक इसके लिए याचिका दायर नहीं की थी. अब सभी आरोपी जमानत पर हैं, सुनवाई जारी रहेगी.' उन्होंने कहा कि राजा को सीबीआई के विरोध के बावजूद जमानत मिली. सीबीआई ने यह कहते हुए राजा को जमानत देने का विरोध किया था कि उनके खिलाफ 200 करोड़ रुपये रिश्वत लेने का आरोप है, जो उनके मामले को पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा से अलग बनाता है, जिन्हें पिछले सप्ताह सर्वोच्च न्यायालय से जमानत मिली थी. राजा ने अपने आवेदन में समानता के आधार पर जमानत का अनुरोध किया था.

राजा ने नियंत्रक एवं महालेखा लेखा परीक्षक की रिपोर्ट आने के बाद 14 नवम्बर, 2010 को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था.

रिपोर्ट में कहा गया था कि राजा ने दूरसंचार मंत्री के रूप में वर्ष 2008 में पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन की जो नीति अपनाई थी, उससे सरकार को अनुमानत: 1.76 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.

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सीबीआई ने उन्हें दो फरवरी, 2011 को गिरफ्तार किया था.

सर्वोच्च न्यायालय ने इस साल फरवरी में 2जी स्पेक्ट्रम के सभी 122 लाइसेंस रद्द करने के आदेश दिए थे, जो राजा के कार्यकाल में आवंटित किए गए थे. अदालत ने यह भी कहा कि आगे से सभी प्राकृतिक संसाधनों के आवंटन नीलामी के आधार पर ही किए जाएं.

 

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