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सेना के रहने से हिंसा नहीं बढ़ती: गोगोई

निचले असम के दंगा प्रभावित जिलों में स्थिति में सुधार के संकेत के साथ ही असम के मुख्यमंत्री तरूण गोगोई ने कहा कि अगर पहले दिन ही सेना की तैनाती कर दी गई होती तो स्थिति नहीं बिगड़ती.

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निचले असम के दंगा प्रभावित जिलों में स्थिति में सुधार के संकेत के साथ ही असम के मुख्यमंत्री तरूण गोगोई ने कहा कि अगर पहले दिन ही सेना की तैनाती कर दी गई होती तो स्थिति नहीं बिगड़ती.

गोगोई ने संवाददाताओं से कहा कि संकट के पहले दिन से ही हम सेना की तैनाती चाहते थे और जब सेना आ गई है तो स्थिति सामान्य हो रही है. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार में अब तक के सबसे बुरे संकट में 45 लोगों की मौत हो गई है.

उन्होंने कहा कि सरकार ने कानून..व्यवस्था बनाए रखने के लिए हरसंभव कदम उठाया है और कोकराझार शहर में चार मंत्री डेरा डाले हुए हैं. आधिकारिक सूत्रों ने कहा है कि धुबरी जिले के गौरांग नदी में एक शव तैरता हुआ पाया गया जबकि 11 लोगों के लापता होने की खबर है.

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उन्होंने कहा कि बस्का जिले में गुरुवार को अल्पसंख्यक प्रवासियों और बोडो के बीच संघर्ष की खबर मिली थी. वहां के देवधर गांव के शिमला में तीन घरों में आग लगा दी गई. बहरहाल किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. दंगा प्रभावित तीन अन्य बीटीएडी जिलों कोकराझार, चिरांग और धुबरी में दोनों समुदायों के बीच छिटपुट हमले की खबर है.

क्योंझर जिले में सेना के फ्लैग मार्च के बीच शुक्रवार सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक कर्फ्यू में ढील दी गई जबकि अल्पसंख्यक बहुल धुबरी जिले में सुबह आठ बजे से दस बजे तक कफ्र्यू में ढील दी गई. सूत्रों ने कहा कि चिरांग जिले में रात का कर्फ्यू जारी रहेगा.

इस बीच केंद्र सरकार ने असम के हिंसाग्रस्त जिलों में चिकित्सकों और नर्सों के दो दल भेजे हैं. एक सवाल के जवाब में गोगोई ने कहा कि पहले दिन से सेना की तैनाती नहीं हो सकी क्योंकि कुछ प्रक्रियाओं का पालन करना होता है.

केंद्रीय गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव शंभू सिंह ने गुरुवार को कोकराझार में कहा था कि सेना की तैनाती में विलंब हुआ और जिलों में शुरुआत में सुरक्षा बलों की कमी थी.

सिंह ने कहा था कि अगर पहले दिन से ही सेना आ गई होती तो स्थिति इतनी नहीं बिगड़ती लेकिन कभी-कभी इसमें वक्त लगता है. मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र ने सुरक्षा बलों के 50 अतिरिक्त कंपनियों की मंजूरी दी है और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह स्थिति का जायजा लेने के लिए कल आ रहे हैं.

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गोगोई ने कहा कि यह जातीय दंगा नहीं है. बदमाशों ने स्थिति का फायदा उठाया है. हम कड़ी कार्रवाई करेंगे. दो दिनों तक ट्रेन सेवाओं के बाधित रहने के बाद अब उनके सामान्य होने की खबर है. सूत्रों ने कहा कि 250 राहत शिविरों में करीब दो लाख लोगों ने शरण ले रखी है.

असम के स्वास्थ्य मंत्री हिमांता बिस्वा सरमा ने कहा कि कोकराझार, बोंगाईगांव, चिरांग, बस्का और धुबरी जिलों के राहत शिविरों में 55 और चिकित्सकों को भेजा गया है. बहरहाल गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों का एक दल पहले से ही कोकराझार में कार्यरत है. सरमा ने कहा कि प्रभावित जिलों में दवा की आपूर्ति हो रही है लेकिन एहतियात के तौर पर दवा के चार और ट्रक भेजे गए हैं.

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