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वो किला जिस पर तानाजी ने फहराया था मराठा ध्वज

वो किला जिस पर तानाजी ने फहराया था मराठा ध्वज
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हाल ही में अजय देवगन और सैफ अली खान स्टारर फिल्म 'तानाजी' का ट्रेलर रिलीज़ हुआ है. इस फिल्म में छत्रपति शिवाजी महाराज की सेना के वीर सिपाही तानाजी ने जिस 'कोंढाणा' जिले को जीतने में अपनी जान दे दी, वह किला उनकी मौत के बाद सिंहगढ़ किले के नाम से जाना जाता है. यह किला महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थ‍ित है.
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कोंढाणा किला बहुत पुराना है. इस किले पर शिवाजी महाराज से पहले भी कई राजाओं ने राज किया था. छत्रपति शिवाजी महाराज के समय यह किला उनके कब्जे में था. जब यह किला आदिलशाह के पास था तो दादोजी कोंडदेव इस किले के ही सूबेदार थे. यहीं पर आदिलशाह ने अपनी छावनी बनाई थी.
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बाद में शिवाजी महाराज ने इसे अपने कब्जे में लिया. सन् 1649 ईस्वी में शिवाजी महाराज ने आदिलशाह से अपने पिता को छुड़ाने के बदले में यह किला उन्हें वापस कर दिया. शिवाजी महाराज ने जून 1665 में मुगलों से किए गए करार के तहत कोंढाणा समेत 22 किले उन्हें लौटाए थे. इस करार से शिवाजी महाराज काफी दुखी हुए थे और उनकी भावना को ठेस पहुंची थी. उन्होंने मराठाओं की सेना के लिए महत्वूपर्ण यह किला वापस कब्जे में लेने का निर्णय लिया.
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शिवाजी महाराज की सेना में कई सरदार थे जो कोंढाणा किले को जीतने के लिए तैयार थे. लेकिन इस असंभव काम के लिए शिवाजी ने तानाजी मालुसरे का चयन किया जो शिवाजी के बचपन के दोस्त और उनके खास सरदार थे. उन्होंने कई युद्धों में शिवाजी का साथ दिया था.
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जब कोंढाणा किले की लड़ाई की तैयारी की जा रही थी, तभी तानाजी के बेटे रायबा की शादी भी की जाने वाली थी. शिवाजी के सरदार शेलार मामा ने तानाजी को रायबा की शादी करने के बाद कोंढाणा किले मुहिम पर जाने की सलाह दी लेकिन तानाजी ने शेलार मामा की बात न मानते हुए कोंढाणा किले की मुहिम पर जाना तय किया.
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तानाजी ने 4 फरवरी 1672 को अपनी सेना के साथ कोंढाणा किले पर आक्रमण किया. मराठाओं ने मुगलों को हराकर यह किला जीत लिया लेकिन इसमें तानाजी को शहादत देनी पड़ी. जब शिवाजी महाराज को यह संदेश मिला तो उन्होंने कहा कि गढ़ मिला लेकिन शेर नहीं रहा. इसके बाद छत्रपति शिवाजी ने तानाजी की याद में इस किले का नाम सिंह (शेर) गढ़ रखा. सिंहगढ़ पर तानाजी का स्मारक भी बनाया गया.

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