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पति की संपत्ति की कानूनी संरक्षक बनना चाहती हैं राजकुमारी रत्ना सिंह, अब देंगी नई अर्जी

राजकुमारी रत्ना सिंह ने वापस ली याचिका
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राजस्थान के पूर्व राजघराने की राजकुमारी और महाराणा प्रताप की वंशज परिवार से संबंध रखने वाली रत्ना सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं.  61 साल की राजकुमारी रत्ना सिंह ने बॉम्बे हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर खुद को अभिवावक बनाए जाने की मांग की थी. अब उन्होंने कोर्ट की सलाह पर उस याचिका को वापस ले लिया है और इसके लिए वो नई याचिका दायर करेंगी.

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दरअसल, यूपी के प्रतापगढ़ से दो बार सांसद रह चुकीं और पूर्व विदेश मंत्री दिनेश सिंह की बेटी रत्ना सिंह ने अपनी याचिका में पति के ड्रग एडिक्ट होने और ज्यादा शराब पीने का तर्क दिया था. उन्होंने याचिका में बताया था कि वो कैंसर और डायबिटीज जैसी कई बीमारियों से ग्रसित हैं और खुद चलने में भी असमर्थ हैं. राजकुमारी ने कहा था कि पति के इलाज के लिए और अपने दो बच्चों के लिए संपत्ति की रक्षा करने की जरूरत है जिसके लिए उन्हें अभिवावक के रूप में नियुक्त करना जरूरी है.

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रत्ना सिंह ने अपनी याचिका में कहा था कि उनके पति राजस्थान के प्रतापगढ़ के एक शाही परिवार से हैं और वह "प्रसिद्ध महाराणा प्रताप के वंशज" हैं. रत्ना सिंह के मुताबिक राजा जय सिंह सिसोदिया को भारत और विदेशों में अपने माता-पिता से चल और अचल संपत्तियां विरासत में मिली थी. अन्य चीजों के अलावा म्यूचुअल फंड, फिक्स्ड डिपॉजिट, शेयर, ज्वैलरी, पेंटिंग्स, और ट्रस्ट भी विरासत में मिले थे. इसलिए, इन संपत्तियों की सुरक्षा के लिए उन्हें पति जय सिंह सिसोदिया का कानूनी अभिवावक बनाया जाना चाहिए. इस अर्जी पर पिछली सुनवाई के दौरान, बॉम्बे हाई कोर्ट में, सरकार की तरफ से इसका विरोध किया गया और कहा गया कि रत्ना सिंह की अर्जी सुनने योग्य ही नहीं है क्योंकि वो जिस कानून के आधार पर ये दावा कर रही हैं उसमें बच्चों का नाबालिग होना जरूरी है.

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इस पर सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी कहा था कि राजकुमारी रत्ना सिंह इसके लिए आर्टिकल 226 का सहारा ले सकती हैं जिसके तहत वह वर्तमान याचिका को वापस लेने के बाद एक नई याचिका दायर कर सकती हैं. भारतीय संविधान में आर्टिकल 226 हाई कोर्ट को कुछ रिट जारी करने का अधिकार देता है. कोर्ट के सुझाव पर एक सप्ताह तक सोच विचार करने के बाद रत्ना सिंह ने याचिका वापस लेने का फैसला किया. राजकुमारी रत्ना सिंह प्रतापगढ़ के कालाकांकर राजघराने की बेटी हैं और उनके परदादा कांग्रेस के संस्थापकों में से एक थे. रत्ना सिंह के पिता भी इंदिरा गांधी के काफी करीबी माने जाते थे. कॉमर्स की पढ़ाई करने वाली रत्ना सिंह की शादी राजा जय सिंह सिसोदिया से हुई थी. दोनों के दो बच्चे हैं . बेटे का नाम भुवन्यू सिंह और बेटी का नाम तनुश्री सिंह है. 

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राजकुमारी रत्ना सिंह उस वक्त सुर्खियों में आई थीं जब उन्होंने प्रतापगढ़ में बाहुबली राजा भैय्या को चुनौती दी थी. कांग्रेस के टिकट पर वो तीन बार चुनाव लड़ी हैं. 1996, 1999  में चुनाव जीत कर वो संसद पहुंची थीं जबकि साल 2004 में उन्हें राजा भैय्या के चचेरे भाई अक्षय सिंह से हार का सामना करना पड़ा था. हालांकि बाद में वो कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गई थी.