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7वां तहखाना, 2 लाख करोड़ और राज परिवार, विवादों में सबसे अमीर मंदिर

7वां तहखाना, 2 लाख करोड़ रु. और राज परिवार, विवादों में सबसे अमीर मंदिर
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नौ सालों से चल रही कानूनी लड़ाई आखिरकार खत्म हुई. अब देश के सबसे अमीर मंदिर को चलाने का अधिकार एक शाही परिवार को मिल गया है. यहां बात हो रही है, केरल के तिरुअनंतपुरम स्थित श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर की. सुप्रीम कोर्ट ने पद्भनाभ मंदिर के प्रबंधन में त्रावणकोर के राजपरिवार के अधिकार को मान्यता दे दी है.
7वां तहखाना, 2 लाख करोड़ रु. और राज परिवार, विवादों में सबसे अमीर मंदिर
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पद्मनाभ मंदिर में वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर प्रबंधन और प्रशासन के बीच पिछले 9 सालों से कानूनी विवाद चल रहा था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद अब यह मामला शांत होता दिख रहा है. शाही परिवार के प्रबंधन में शामिल होने तक फिलहाल तिरुअनंतपुरम के जिला जज की अध्यक्षता वाली कमेटी मंदिर की व्यवस्था देखेगी. (फोटोः गेटी)
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यह मामला सुप्रीम कोर्ट में 9 साल से लंबित था. केरल हाईकोर्ट के फैसले को त्रावणकोर के शाही परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. कहा जाता है कि मंदिर के पास करीब दो लाख करोड़ रुपए की संपत्ति है. यहां पर कई तहखाने हैं, जिनमें लाखों करोड़ों रुपयों का खजाना रखा है. (फोटोः गेटी)
7वां तहखाना, 2 लाख करोड़ रु. और राज परिवार, विवादों में सबसे अमीर मंदिर
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भगवान पद्मनाभ (विष्णु) स्वामी के मंदिर का पुनर्निर्माण 18वीं सदी में त्रावणकोर के शाही परिवार ने कराया था. इसी राज परिवार ने 1947 तक भारतीय संघ में विलय से पहले दक्षिणी केरल और उससे लगे तमिलनाडु के कुछ भागों पर शासन किया था. आजादी के बाद भी मंदिर का संचालन और प्रबंधन शाही परिवार के नियंत्रण वाला ट्रस्ट ही करता आया था. त्रावणकोर परिवार के अधिष्ठाता कुलदेवता भगवान पद्मनाभ स्वामी ही हैं.



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सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की बेंच ने पिछले साल 10 अप्रैल को मामले में केरल हाईकोर्ट के 31 जनवरी, 2011 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. वहीं, केरल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मंदिर, उसकी संपत्तियों का प्रबंधन संभालने तथा परिपाटियों के अनुरूप मंदिर का संचालन करने के लिए एक निकाय या ट्रस्ट बनाने को कहा था. (फोटोः गेटी)
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सुप्रीम कोर्ट को यह फैसला देना था कि देश के सबसे अमीर मंदिर का मैनेजमेंट राज्य सरकार देखेगी या त्रावणकोर का पूर्व शाही परिवार. सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर सुनवाई हुई कि क्या यह मंदिर सार्वजनिक संपत्ति है. इसके लिए तिरुपति तिरुमला, गुरुवयूर और सबरीमला मंदिरों की तरह ही देवस्थानम बोर्ड की स्थापना की जरूरत है या नहीं? (फोटोः गेटी)
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बेंच ने त्रावणकोर परिवार को प्रबंधन का अधिकार तो दे दिया है लेकिन ये भी हो सकता है कि बेंच इसका फैसला भी करे कि शाही परिवार का मंदिर पर किस हद तक अधिकार होगा. साथ ही यह भी निर्णय लेगी कि क्या मंदिर के 7वें तहखाने को खोला जाए या नहीं. (फोटोः गेटी)
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सुप्रीम कोर्ट ने मई 2011 में मंदिर के प्रबंधन और संपत्तियों पर नियंत्रण से संबंधित हाईकोर्ट के निर्देश पर रोक लगा दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मंदिर के खजाने में मूल्यवान वस्तुओं, आभूषणों का भी विस्तृत विवरण तैयार किया जाएगा.
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सुप्रीम कोर्ट ने 8 जुलाई 2011 को कहा था कि मंदिर के तहखाने-बी के खुलने की प्रक्रिया पर अगले आदेश तक रोक रहेगी. जुलाई 2017 में कोर्ट ने कहा था कि वह इन दावों का अध्ययन करेगा कि मंदिर के एक तहखाने में रहस्यमयी ऊर्जा वाला अपार खजाना है.
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ऐसा कहा जाता है कि तहखाने-बी में 700 बिलियन यूएस डॉलर्स यानी 52.59 लाख करोड़ का खजाना हो सकता है. लेकिन मंदिर में कितना खजाना है. इसकी पुष्टि कोई नहीं कर सकता. पूर्व कैग विनोद राय ने मंदिर के रिकॉर्ड्स की जांच की थी. जिसमें उन्होंने बताया था कि मंदिर के पास 200 ईसा पूर्व के 800 किलो सोने के सिक्के हैं. हर सिक्के की कीमत करीब 2.7 करोड़ रुपए है. यहां सोने का सिंहासन जिसपर रत्न और हीरे-पन्ने जड़े हैं. उसका भी रिकॉर्ड है. (फोटोः गेटी)