रमजान की शुरुआत हो चुकी है और दुनिया भर में लोग इसे पूरे एहतराम के साथ गुजार रहे हैं. इसी बीच सोशल मीडिया पर गाजा की भी कई तस्वीरें सामने आ रही हैं, जो लंबे समय से युद्ध की मार झेल रहा है.
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गाजा में इस बार रमजान बेहद दर्दनाक माहौल में शुरू हुआ. लोग टूटी मस्जिदों, गिरे गुम्बदों और तिरपाल से बने अस्थायी ढांचों में नमाज अदा करने और रोजा खोलने को मजबूर हैं.
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रॉयटर्स न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, गाजा सिटी की अल-हस्सैना मस्जिद का विशाल गुम्बद अब मलबे पर टिका हुआ है. उसका आंगन, जहां पहले हजारों रोजेदार इकट्ठा होते थे, आज बेघर परिवारों का अस्थायी घर बन गया है.
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गाजा से ऐसी तस्वीरें भी सामने आईं, जिनमें लोग एक साथ इफ्तार करते दिखाई दिए, लेकिन उनके सिर पर न कोई छत थी और न ही खाने के लिए पर्याप्त सामान.
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मस्जिदों के खत्म होने से लोगों के लिए इबादत की जगहें लगभग गायब हो गई हैं. बेघर होकर एक मस्जिद में रहने वाली ख़िताम जब्र कहती हैं कि वे रमजान को अलग माहौल में स्वागत करना चाहती थीं, लेकिन अब नमाज तंबुओं में होती है.
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7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले के बाद इजराइल के जवाबी हमलों से गाजा लगभग खंडहर बन गया. हजारों फिलिस्तीनी मारे गए, लाखों विस्थापित.
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गाजा के धार्मिक मामलों के निदेशक आमिर अबू अल-अमरीन बताते हैं कि तबाही के बावजूद लोग हार नहीं मान रहे. लोग अपने स्तर पर छोटे-छोटे ढांचे बनाकर रमजान की रूह जिंदा रखने की कोशिश कर रहे हैं
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मस्जिदों के टूटने का असर केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक भी है. लोग कहते हैं कि यह सिर्फ इमारतों की तबाही नहीं, बल्कि समुदाय के बिखरने जैसा है. मस्जिदें वह स्थान थीं जहां लोग एक-दूसरे से जुड़ते थे, रिश्ते बनते थे, और त्योहारों का उत्साह साझा होता था. अब वह सब केवल यादों में बचा है.
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गाजा के पुनर्निर्माण के लिए एक अंतरराष्ट्रीय समूह बनाया गया है, जिसकी अध्यक्षता ट्रंप कर रहे हैं. यह समूह गाजा को दोबारा खड़ा करने, पैसा जुटाने और इलाके में स्थिरता बनाए रखने का काम देखेगा.
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