कर्नाटक के बल्लारी जिले में देश का करीब 25 फीसदी फीसदी लौह अयस्क भंडार है. साल 1994 तक वहां सरकारी एनएमडीसी जैसी कुछ ही कंपनियां संचालित हो रही थीं. बाद में सरकार ने निजी ऑपरेटर्स को माइनिंग का लाइसेंस दे दिया. बल्लारी के खनन उद्योग की चांदी तब शुरू हुई जब चीन से आने वाली भारी मांग की वजह से लौह अयस्क की डिमांड काफी बढ़ गई. साल 2000 से 2008 के बीच विश्व बाजार में लौह अयस्क की कीमत करीब तीन गुना बढ़ गई. भारत लौह अयस्क के बड़े निर्यातकों में शामिल हो गया. बाद में सरकार ने लौह अयस्क के खनन में 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की इजाजत दे दी.
इसके बाद निजी कंपनियों में यहां लौह अयस्क खनन को लेकर होड़ बढ़ी. आरोप-प्रत्यारोप चलने लगे. आरोप लगाया गया कि मेरिट के आधार पर नहीं बल्कि जोड़तोड़ करने वालों को खनन लाइसेंस दिया जा रहा है. बड़े पैमाने पर अवैध खनन बढ़ने लगा. यह भी आरोप है कि इस अवैध कारोबार से जो भारी मुनाफा हो रहा था, उसका बड़ा हिस्सा राजनीतिज्ञों की जेब में जाने लगा. इसी दौरान राज्य के खनन क्षेत्र और राजनीति में रेड्डी बंधुओं का उभार हुआ. आरोप है कि रेड्डी बंधुओं ने खनन से अवैध तरीके से कमाया पैसा राजनीति में झोंक दिया. आरोप लगे कि बल्लारी क्षेत्र में खनन क्षेत्र में सक्रिय निजी कंपनियों के प्रमोटर ने राजनीतिज्ञों को खूब घूस खिलाया. ऐसे कई प्रमोटर खुद राजनीति में उतर गए और राज्य सरकार में कई प्रमुख पदों पर पहुंच गए. इन नेताओं का स्थानीय अधिकारियों पर इतना दबदबा था कि मीडिया बल्लारी को 'नया गणतंत्र' कहने लगी.
इलाके में तस्वीर तब बदल गई जब जिंदल विजयनगर स्टील लिमिटेड जैसी निजी कंपनियों ने होसपेट में अपना काम शुरू किया. इसके बाद मुकंद स्टील और कल्याणी स्टील्स जैसी निजी कंपनियों के द्वारा इलाके में करीब 30,000 करोड़ रुपये का निवेश किया गया. जुलाई 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने विधानसभा में यह स्वीकार किया था कि 2003 से 2010 के बीच राज्य से 3 करोड़ टन लौह अयस्क का अवैध तरीके से निर्यात किया गया.
इस अवैध निर्यात की कीमत करीब 7,500 करोड़ रुपये थी. रेड्डी ब्रदर्स (जी.
करुणाकर रेड्डी, जनार्दन रेड्डी और सुधाकर रेड्डी) इस खनन क्रांति का सबसे
ज्यादा फायदा उठाने वालों में से थे. रेड्डी बंधु 1999 में चर्चा में आए थे, जब भाजपा नेता सुषमा स्वराज
बल्लारी (तब बेल्लारी) से सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ीं और हार गई थीं. रेड्डी
बंधुओं को कर्नाटक की येदियुरप्पा सरकार में मंत्री बनाया गया. ऐसा आरोप
लगा कि जिन कई कंपनियों को लाइसेंस दिया गया, उनके अप्रत्यक्ष मालिक रेड्डी
बंधु ही थे.
बल्लारी का लौह अयस्क काफी उम्दा क्वालिटी (64Fe) का माना जाता है जिसमें 60 से 65 फीसदी लोहा होता है. एक अनुमान के अनुसार बल्लारी में करीब 99 लौह अयस्क माइन्स हैं, जिनमें से
करीब 60 सक्रिय हैं. लेकिन इनके अलावा अवैध खनन के हजारों मामले पाए गए
हैं.
जुलाई 2011 में कर्नाटक में गैरकानूनी खनन पर लोकायुक्त संतोष हेगड़े की
रिपोर्ट से नेताओं और कॉरपोरेट के बीच साठगांठ की बात सामने आई. हेगड़े के अनुमान के अनुसार अवैध खनन करने वाले माफिया हर दिन 12 से 20 करोड़ रुपये तक की कमाई कर रहे थे. इस रिपोर्ट में कई कॉरपोरेट दिग्गजों के भी नाम थे. लोकायुक्त की जांच में पाया गया कि अवैध लौह अयस्क खनन से राज्य के खजाने को करीब 16,000 करोड़ रुपये का चूना लगा है. रिपोर्ट में कहा गया कि कर्नाटक के मंत्री जी जनार्दन रेड्डी ने बड़ी स्टील कंपनी को फायदा पहुंचाया. उन पर अवैध खनन को संरक्षण देने का आरोप लगाया गया.
लोकायुक्त संतोष हेगड़े ने राज्य के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ
भी गंभीर अभियोग लगाते हुए कहा कि अवैध खनन घोटाले में मुख्यमंत्री एवं अन्य
के खिलाफ ठोस साक्ष्य हैं. लोकायुक्त की रिपोर्ट आने के बाद जर्नादन रेड्डी
को 5 सितंबर, 2011 को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था. हालांकि बाद में 21
जनवरी 2015 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी.
लोकायुक्त रिपोर्ट के मुताबिक, महज एक साल 2009-2010 में ही रेड्डी के अवैध निर्यात साम्राज्य ने 4,635.86 करोड़ रुपये की कमाई की, जिसमें उनकी तरफ से न कोई भारी-भरकम निवेश किया गया था, न मेहनत की गई थी. लोकायुक्त की रिपोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में कर्नाटक के बल्लारी, चित्रदुर्ग और टुमकुर जिले में लौह अयस्क के खनन पर पूरी तरह से रोक लगा दी. लेकिन साल 2014 में कोर्ट ने फिर से खनन की इजाजत दे दी.