दोषियों को फांसी देने वाले पवन जल्लाद ने बताया कि फांसी घर में किसी को बोलने की अनुमति नहीं होती है. जिसकी वजह से फांसी वाले दिन भी केवल इशारों से काम किया गया. पवन जल्लाद ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मैंने निर्भया के चारों दोषियों को फांसी देकर अपना धर्म निभाया है. यह हमारा पुश्तैनी काम है.' उनका कहना था कि फांसी होने से पहले दरिंदों को पश्चाताप होना चाहिए था, लेकिन उनमें से किसी को पश्चाताप नहीं था.'