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अफगानिस्तान: 3 महिला मीडिया कर्मचारियों की दिन-दहाड़े हत्या, ISIS ने ली जिम्मेदारी

तीन युवतियों की दिन-दहाड़े हत्या
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अफगानिस्तान में एक स्थानीय रेडियो और टीवी स्टेशन में काम करने वाली तीन युवतियों की दिन-दहाड़े हत्या कर दी गई है. जलालाबाद में हुई इस घटना की जिम्मेदारी आईएसआईएस ने ली है. इन तीन महिलाओं का नाम मुर्सल वाहिदी, सादिया सदत और शहनाज है. इन तीनों की उम्र महज 18 से 20 साल के आसपास थी. तीनों युवती जब एनिकेस टीवी स्टेशन से अपना काम खत्म कर घर लौट रही थीं तो उन पर हमला किया गया. अफगानिस्तान के प्रशासन का कहना है कि उन्होंने इस मामले में किलर को अरेस्ट कर लिया है. इस शख्स का नाम कारी बसर है और इसे तालिबान का सदस्य बताया जा रहा है. हालांकि, तालिबान के प्रवक्ता जबीदुल्ला मुजाहिद ने दावा किया है कि इस शख्स का तालिबान से कोई लेना-देना नहीं है. (फोटो सोर्स: रायटर्स)

तीन युवतियों की दिन-दहाड़े हत्या
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वहीं हमले की जिम्मेदारी लेने वाले आईएसआईएस ने इस मामले में कहा है कि इन महिलाओं को इसलिए टारगेट किया गया क्योंकि वे एक ऐसे मीडिया स्टेशन के साथ काम करती थीं जो 'धर्मभ्रष्ट' अफगानिस्तान सरकार का वफादार है. गौरतलब है कि इससे पहले भी आईएसआईएस ने दिसंबर 2020 में एनिकेस रेडियो एंड टीवी की एक महिला कर्मचारी को भी जान से मार दिया था. (फोटो सोर्स: रायटर्स)

तीन युवतियों की दिन-दहाड़े हत्या
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इस मामले में मोहम्मद नजीफ ने एएफपी न्यूज एजेंसी के साथ बातचीत में कहा कि उनकी कजिन सादिया सदत सिर्फ 18 साल की थीं और वे पिछले एक साल से इस टीवी स्टेशन में काम कर अपनी फैमिली को सपोर्ट करने की कोशिश कर रही थी. उसका परिवार बेहद खुश था कि वो जॉब कर रही थी. उसे किसी संगठन से कोई चेतावनी भी नहीं आई थी. मुझे नहीं पता ये आतंकी मासूम बच्चियों को क्यों टारगेट करते हैं. (फोटो सोर्स: रायटर्स)

प्रतीकात्मक तस्वीर
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अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने भी इन हमलों की निंदा की है. उन्होंने कहा कि निर्दोष महिलाओं पर जानलेवा हमले ना केवल इस्लाम बल्कि अफगानिस्तान के कल्चर और शांति के खिलाफ है. वहीं इस विवादित टीवी स्टेशन के न्यूज ए़डिटर ने कहा कि ये तीनों युवतियां काफी लोकप्रिय थीं और अक्सर तुर्की और भारत के इमोशन्स से भरे सीरियल्स को अफगानिस्तान की स्थानीय भाषा में डब करती थीं. (फोटो सोर्स: रायटर्स)

प्रतीकात्मक तस्वीर
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इस प्राइवेट आउटलेट पर पॉलिटिकल, सोशल, इस्लामिक, एजुकेशनल, सेटायर और कई मशहूर सीरियल्स और फिल्मों की डबिंग कर उन्हें अफगानिस्तान के लोगों के हिसाब से तैयार किया जाता है.  गौरतलब है कि अफगानिस्तान पिछले कुछ सालों में मीडिया कर्मचारियों के लिए सबसे खतरनाक देश के तौर पर उभरा है. पिछले छह महीनों में अफगानिस्तान में 15 मीडिया कर्मचारी मारे जा चुके हैं. (फोटो सोर्स: रायटर्स)