दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. प्राथमिक जानकारी के मुताबिक भूकंप की तीव्रता रिएक्टर स्केल पर 6.2 मापी गई है. पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक बलूचिस्तान में कई घायल हुए हैं. बताया जा रहा है कि भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान का कुंदुज है. यह जगह हिंदुकुश पर्वत श्रृंखला पर स्थित है.
मालूम हो कि उत्तर भारत में आने वाले भूकंप का केंद्र अक्सर हिंदुकुश पर्वत श्रृंखला में ही होता है. यह पर्वत श्रृंखला उत्तरी पाकिस्तान से मध्य अफगानिस्तान तक 800 किमी तक फैली हुई है.
हिमालय क्षेत्र में आने वाली यह श्रृंखला पामीर पर्वतों से जाकर जुड़ती है. बताया जाता है कि 'पामीर का पठार' पर मनुष्य अपने प्रारंभिक दौर में रहा करते थे. इस पर्वतमाला का सबसे ऊंचा पहाड़ पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत के चित्राल जिले में स्थित है. इसे वर्तमान में तिरिच मीर पर्वत कहते हैं.
हिंदुकुश पर्वतमाला हिमालय के उस पार से भारत में आने का आसान रास्ता भी कहलाता है. क्योंकि इस पर्वत पर कई दर्रे हैं, जिसके उस पार कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान, चीन, रशिया, मंगोलिया, रशिया आदि जगह जा सकते हैं.
प्राचीन काल में लोगों ने अपने कुछ प्रमुख मार्ग इसी पर्वत के जरिये बनाए थे. इसमें सबसे मशहूर मार्ग है सिल्क रूट. यह रूट रोम के वेनिस, इजराइल के येरुशलम और तुर्की के इस्तांबुल से शुरु होकर चीन के च्वानजो शहर तक जाता था. बीच में भारतीय क्षेत्र के शहर काबुल, पेशावर, श्रीनगर व्यापार के प्रमुख केंद्रों में से एक था.
हिंदुकुश पर्वत का ताल्लुक रामायण काल से भी जुड़ा हुआ है. बताया जाता है कि पहले इस पर्वत का नाम पारियात्र पर्वत था. कुछ विद्वान इसे परिजात पर्वत भी कहते हैं. इसका दूसरा नाम हिन्दुकेश भी था. केश का अर्थ अंतिम सिरा. वहीं, ऐसी मान्यता है कि भगवान राम के बेटे कुश ने इस पर्वत पर तपस्या की थी. तपस्या के बाद उन्होंने यहां पर अमृत दीक्षा ली. वह इस पूरे क्षेत्र पर अपना अधिकार रखते थे. यही वजह है कि इस पर्वतमाला के आसपास रहने वाली कई जातियों के नाम कुश के ऊपर ही हैं.