एक स्टडी के बाद जानकारों ने आकलन किया है कि दुनिया की 170 करोड़ आबादी, यानी धरती की कुल आबादी के 20 फीसदी से अधिक लोग कोरोना से गंभीर रूप से संक्रमित हो सकते हैं. वजह ये है कि काफी लोग पहले से मोटापा और हार्ट की बीमारी जैसी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं.
एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन और ट्रॉपिकल मेडिसिन ने वैश्विक आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद ये आकलन जारी किया है. जानकारों ने डायबिटीज, फेफड़ों की समस्या, एचआईवी जैसी बीमारियों से पहले से जूझ रहे लोगों के आंकड़ों की पड़ताल की.
पहले से गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को कोरोना वायरस से संक्रमित होने पर खतरा अधिक होता है. अब तक दुनियाभर में कोरोना से कुल 4 लाख 20 हजार से अधिक लोगों की जान जा चुकी है.
लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन और ट्रॉपिकल मेडिसिन के विशेषज्ञों ने स्टडी के दौरान पाया कि दुनिया में हर पांचवां आदमी कोई न कोई स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहा है. इसकी वजह से उन्हें कोरोना से अधिक खतरा है.
पहले से किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों की संख्या अलग-अलग देशों में
अलग-अलग है. यूरोप में करीब 30 फीसदी आबादी ऐसी है जो एक
या एक से अधिक स्वास्थ्य समस्या से जूझ रही है.
रिसर्चर्स ने कहा कि धरती की आबादी के 20 फीसदी लोगों में गंभीर संक्रमण हो सकता है. लेकिन कुल आबादी के 4 फीसदी लोगों को ही हॉस्पिटल में भर्ती होने की जरूरत पड़ेगी. यानी कि दुनियाभर में करीब 35 करोड़ लोगों को हॉस्पिटल में इलाज की जरूरत हो सकती है.