दुनियाभर में कोरोना वायरस से अब तक एक लाख 65 हजार से अधिक लोगों की जान जा चुकी है. वहीं, संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों का कहना है कि कोरोना वायरस महामारी का अगला केंद्र अफ्रीका बन सकता है. यूएन इकोनॉमिक कमिशन फॉर अफ्रीका ने चेतावनी दी है कि महाद्वीप में कम से कम 3 लाख लोगों की मौत हो सकती है. कमिशन ने कोरोना से लड़ने के लिए 100 बिलियन डॉलर की रकम की भी मांग की है. (फाइल फोटो/AFP)
अफ्रीका का बड़ा हिस्सा पहले से गरीबी से जूझ रहा है. लेकिन यूएन का कहना है कि कोरोना की वजह से 3 करोड़ लोग गरीब हो सकते हैं. अफ्रीका में संक्रमण के 19 हजार से अधिक मामले सामने आ चुके हैं और एक हजार लोगों की मौत भी हो चुकी है. वहीं, कोरोना वायरस के इलाज में बेहद जरूरी मेडिकल यंत्र वेंटिलेटर की भी अफ्रीकी देशों में काफी कमी है.
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अफ्रीका के 10 देश ऐसे हैं जहां अस्पतालों में एक भी वेंटिलेटर नहीं हैं. बता दें कि अफ्रीका महाद्वीप में 55 देश हैं. साउथ सूडान की बात करें तो वहां 5 उप राष्ट्रपति हैं, लेकिन देश में वेंटिलेटर सिर्फ 4 हैं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, 41 अफ्रीकी देशों में करोड़ों लोगों की आबादी के लिए कुल वेंटिलेटर की संख्या सिर्फ 2 हजार है. वहीं, अकेले अमेरिका में 1 लाख 70 हजार वेंटिलेटर हैं.
WHO ने यह भी कहा है कि अफ्रीका के 55 देशों में से 43 देशों में कुल मिलाकर सिर्फ 5 हजार आईसीयू बेड हैं. यानी कि हर 10 लाख लोगों पर सिर्फ 5 बेड. जबकि यूरोप में हर 10 लाख लोगों पर 4000 आईसीयू बेड हैं.
अफ्रीकी देश पहले से हॉस्पिटल और मेडिकल सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं. कई इलाकों में मास्क, ऑक्सीजन, साबुन और पानी का भी संकट है. इसकी वजह से ये डर है कि कोरोना का संक्रमण बड़े पैमाने पर तबाही ला सकता है.
अफ्रीका में साफ पानी की इतनी बड़ी समस्या है कि यूनाइटेड नेशन्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 2015 में उप-सहारा अफ्रीका में सिर्फ 15 फीसदी लोगों के पास हाथ धोने की सुविधा थी. वहीं, लाइबेरिया में 2017 में 97 फीसदी लोगों के पास साफ पानी और साबुन नहीं था.